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राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: देवकीनंदन ठाकुर बोले — मोदी और योगी सरकार आरोपियों पर करेगी कड़ी कार्रवाई

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राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: देवकीनंदन ठाकुर बोले — मोदी और योगी सरकार आरोपियों पर करेगी कड़ी कार्रवाई

सारांश

राम मंदिर के दान पात्र में कथित घोटाले पर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर का स्पष्ट संदेश — मोदी और योगी सरकार आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। साथ ही उन्होंने सनातन बोर्ड के गठन और मंदिरों में सरकारी हस्तक्षेप समाप्त करने की माँग भी दोहराई।

मुख्य बातें

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने 23 जून को धौलपुर, राजस्थान में राम मंदिर चढ़ावा घोटाले पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार (मोदी) और यूपी सरकार (योगी) आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगी।
ठाकुर ने सनातन बोर्ड के गठन की माँग दोहराई — ताकि मंदिर की संपत्ति अस्पतालों और गौशालाओं के निर्माण में लगे।
उन्होंने मंदिरों में सरकारी अधिकारियों की नियुक्ति का विरोध किया।
16 जून को भी उन्होंने शास्त्रों का हवाला देते हुए कहा था कि मंदिर धन के दुरुपयोग पर 60 हजार वर्षों के दंड का प्रावधान है।

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने राम मंदिर के दान पात्र में कथित घोटाले पर 23 जून को धौलपुर, राजस्थान में पत्रकारों से बातचीत में तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र में नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार इस मामले में संलिप्त आरोपियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरतेगी।

देवकीनंदन ठाकुर का बयान

ठाकुर ने कहा, 'हमें जैसा सुनने को मिल रहा है, अगर उसमें सच्चाई है, तो मैं एक बात साफ कर देना चाहता हूं — देश में नरेंद्र मोदी की सरकार है और प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार है। आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

सनातन बोर्ड और मंदिर की संपत्ति का सवाल

कथावाचक ने कहा कि जो धर्म और शास्त्रों को जानते हैं, उनके लिए भगवान राम पर चढ़ाया गया धन केवल धन नहीं है — वह प्रभु का प्रसाद है। उनका मानना है कि यह प्रसाद गरीब जनता के कल्याण में, अस्पतालों और गौशालाओं के निर्माण में उपयोग होना चाहिए। उन्होंने कुंभ के दौरान उठाई गई सनातन बोर्ड की माँग को दोहराया और कहा कि इसकी शुरुआत अब हो जानी चाहिए।

मंदिरों में सरकारी हस्तक्षेप पर आपत्ति

देवकीनंदन ठाकुर ने यह भी कहा कि मंदिरों में किसी भी कीमत पर सरकारी अधिकारियों की नियुक्ति नहीं होनी चाहिए। उनके शब्दों में, 'पहले वो ज्ञान लें, सिर्फ नोट गिनने का काम नहीं करें। अगर राम जी की संपत्ति का दुरुपयोग करोगे, तो उसका परिणाम गलत ही होगा।' यह टिप्पणी मंदिर प्रबंधन में धर्मनिरपेक्ष प्रशासनिक हस्तक्षेप पर उनकी व्यापक आपत्ति को दर्शाती है।

16 जून का पूर्व बयान और शास्त्रों का संदर्भ

गौरतलब है कि 16 जून को भी देवकीनंदन ठाकुर ने राम मंदिर दान पात्र विवाद पर बोलते हुए शास्त्रों का हवाला दिया था। उन्होंने कहा था कि शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति मंदिर के धन का दुरुपयोग करता है, उसे 60 हजार वर्षों तक कठोर दंड भोगना पड़ता है। उनका तर्क था कि यदि लोगों को इस धार्मिक नियम का वास्तविक ज्ञान हो, तो कोई भी मंदिर का एक रुपया तक चुराने की हिम्मत नहीं करेगा।

आगे क्या

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब मंदिर ट्रस्ट और उसकी वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। देवकीनंदन ठाकुर की माँग है कि सनातन बोर्ड के गठन की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि मंदिरों की संपत्ति का उपयोग सामाजिक कल्याण के लिए हो सके और भविष्य में ऐसे विवादों की पुनरावृत्ति न हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु उसका ढाँचा और जवाबदेही तंत्र अभी तक अस्पष्ट है। मंदिर में सरकारी हस्तक्षेप का विरोध और साथ ही सरकार से न्याय की उम्मीद — यह विरोधाभास इस पूरी बहस के केंद्र में है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा घोटाला क्या है?
राम मंदिर के दान पात्र में कथित अनियमितताओं का यह विवाद है, जिसमें आरोप है कि मंदिर में चढ़ाई गई राशि का दुरुपयोग किया गया। मामला सामने आने के बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है।
देवकीनंदन ठाकुर ने इस मामले में क्या कहा?
कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने 23 जून को धौलपुर में पत्रकारों से कहा कि यदि आरोपों में सच्चाई है, तो मोदी और योगी सरकार आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी और किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी।
देवकीनंदन ठाकुर सनातन बोर्ड की माँग क्यों कर रहे हैं?
ठाकुर का मानना है कि मंदिरों की संपत्ति का उपयोग गरीब जनता के कल्याण में — जैसे अस्पताल और गौशाला निर्माण में — होना चाहिए। सनातन बोर्ड इसी उद्देश्य के लिए एक स्वतंत्र प्रबंधन ढाँचा होगा।
मंदिरों में सरकारी अधिकारियों की नियुक्ति पर ठाकुर का क्या रुख है?
देवकीनंदन ठाकुर ने स्पष्ट कहा कि मंदिरों में किसी भी कीमत पर सरकारी अधिकारियों की नियुक्ति नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार, नियुक्त व्यक्तियों को पहले धर्म और शास्त्रों का ज्ञान होना चाहिए।
16 जून को देवकीनंदन ठाकुर ने क्या कहा था?
16 जून को उन्होंने शास्त्रों का हवाला देते हुए कहा था कि मंदिर के धन का दुरुपयोग करने वाले को 60 हजार वर्षों तक कठोर दंड भोगना पड़ता है। उन्होंने तब भी सनातन बोर्ड के गठन की माँग उठाई थी।
राष्ट्र प्रेस
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