सनातन बोर्ड बने तो मंदिरों के चढ़ावे का सदुपयोग होगा, चोरी रुकेगी: देवकीनंदन ठाकुर
सारांश
मुख्य बातें
कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के आरोपों, सनातन बोर्ड के गठन की माँग और चंपत राय के इस्तीफे जैसे संवेदनशील मुद्दों पर राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में अपना पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थलों के प्रबंधन की ज़िम्मेदारी धर्माचार्यों को सौंपी जानी चाहिए, न कि प्रशासनिक अधिकारियों को।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों पर प्रतिक्रिया
कथित चढ़ावा चोरी के आरोपों पर देवकीनंदन ठाकुर ने कहा, 'मैं अभी इस मुद्दे पर ज़्यादा कुछ नहीं कह सकता। सभी जानते हैं कि यदि ऐसा कुछ हुआ है तो इसकी जाँच चल रही है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर ऐसी घटना सच है, तो उन 100 करोड़ हिंदुओं और सनातन भक्तों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुँची है जिनकी भगवान राम में अटूट आस्था है।
उन्होंने कहा कि यदि शंकराचार्यों को राम मंदिर के प्रबंधन से जोड़ा गया होता, तो आज इस प्रकार के आरोपों का सामना नहीं करना पड़ता। यह ऐसे समय में आया है जब मंदिर के ट्रस्ट की कार्यशैली पर विभिन्न पक्षों से सवाल उठ रहे हैं।
विश्व हिंदू परिषद और आलोक कुमार के बयान पर रुख
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा था कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद राम मंदिर से विहिप की भूमिका समाप्त हो गई। देवकीनंदन ठाकुर ने इस बयान से सहमति जताते हुए कहा, 'उन्होंने विश्व हिंदू परिषद, सनातन और देश के लिए बहुत काम किया है तथा आगे भी करते रहेंगे। मैं उनकी बात से सहमत हूँ।'
सनातन बोर्ड की माँग: क्या है प्रस्ताव
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि वे लंबे समय से सनातन बोर्ड के गठन की वकालत करते रहे हैं और इस विषय पर संघ व विहिप के वरिष्ठ लोगों से चर्चा भी हो चुकी है। उनके अनुसार, 'जैसे IAS और IPS अधिकारियों को संविधान का ज्ञान होता है, वैसे क्या उन्हें रामायण, वेद और शास्त्रों का भी ज्ञान होता है? धर्म से जुड़े कार्य धर्माचार्यों पर छोड़ दिए जाने चाहिए।'
उन्होंने माँग की कि चारों शंकराचार्य और पाँचवें वैष्णवाचार्य इस बोर्ड का नेतृत्व करें। भगवान के नाम पर आए धन का उपयोग गरीबों की सेवा, नि:शुल्क अस्पतालों और गौसेवा में किया जाए। उनका कहना था, 'राम और कृष्ण का धन किसी एक ट्रस्ट का नहीं, बल्कि पूरे सनातन समाज का होना चाहिए।'
चंपत राय के इस्तीफे और विपक्ष के बयान पर प्रतिक्रिया
राम मंदिर चंदे को लेकर हुए विवाद और चंपत राय के इस्तीफे के बाद विपक्ष की प्रतिक्रियाओं पर देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि बहस पीछे की बातों पर नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने पर होनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपेक्षा जताई कि इस बार ऐसा निर्णय लिया जाए जो आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखे।
आगे की राह: मोदी और शाह से अपेक्षाएँ
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा, 'आज़ादी के बाद से अब तक किसी प्रधानमंत्री ने यह काम नहीं किया। मुझे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह से आशा है कि जिस प्रकार वक्फ बोर्ड को अधिकार दिए गए हैं, उसी प्रकार सनातन बोर्ड को भी अधिकार दिए जाएँ।' उनका प्रस्ताव है कि सभी मंदिरों को सनातन बोर्ड के अंतर्गत लाया जाए और चारों शंकराचार्यों में से किसी एक को बोर्ड का अध्यक्ष बनाया जाए। गौरतलब है कि मंदिर प्रबंधन में धर्माचार्यों की भूमिका को लेकर यह बहस देशभर में तेज़ होती जा रही है।