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सनातन बोर्ड बने तो मंदिरों के चढ़ावे का सदुपयोग होगा, चोरी रुकेगी: देवकीनंदन ठाकुर

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सनातन बोर्ड बने तो मंदिरों के चढ़ावे का सदुपयोग होगा, चोरी रुकेगी: देवकीनंदन ठाकुर

सारांश

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर का कहना है कि राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी जैसी घटनाएँ तब नहीं होतीं, जब धर्माचार्य प्रबंधन में होते। उनकी माँग है — सनातन बोर्ड बने, शंकराचार्य नेतृत्व करें, और भगवान का धन समाजसेवा में लगे।

मुख्य बातें

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने सनातन बोर्ड के गठन की माँग दोहराई और कहा कि इससे मंदिरों में कथित चोरी जैसी घटनाएँ रुकेंगी।
राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी की जाँच जारी है; ठाकुर ने कहा कि इससे 100 करोड़ सनातन भक्तों की भावनाएँ आहत हुई हैं।
उन्होंने माँग की कि चारों शंकराचार्य और वैष्णवाचार्य सनातन बोर्ड का नेतृत्व करें और मंदिरों का धन गरीबों, नि:शुल्क अस्पतालों व गौसेवा में लगे।
VHP राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार के बयान से सहमति जताते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद विहिप की भूमिका स्वाभाविक रूप से बदली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से अपेक्षा — वक्फ बोर्ड जैसे अधिकार सनातन बोर्ड को भी मिलें।

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के आरोपों, सनातन बोर्ड के गठन की माँग और चंपत राय के इस्तीफे जैसे संवेदनशील मुद्दों पर राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में अपना पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थलों के प्रबंधन की ज़िम्मेदारी धर्माचार्यों को सौंपी जानी चाहिए, न कि प्रशासनिक अधिकारियों को।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों पर प्रतिक्रिया

कथित चढ़ावा चोरी के आरोपों पर देवकीनंदन ठाकुर ने कहा, 'मैं अभी इस मुद्दे पर ज़्यादा कुछ नहीं कह सकता। सभी जानते हैं कि यदि ऐसा कुछ हुआ है तो इसकी जाँच चल रही है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर ऐसी घटना सच है, तो उन 100 करोड़ हिंदुओं और सनातन भक्तों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुँची है जिनकी भगवान राम में अटूट आस्था है।

उन्होंने कहा कि यदि शंकराचार्यों को राम मंदिर के प्रबंधन से जोड़ा गया होता, तो आज इस प्रकार के आरोपों का सामना नहीं करना पड़ता। यह ऐसे समय में आया है जब मंदिर के ट्रस्ट की कार्यशैली पर विभिन्न पक्षों से सवाल उठ रहे हैं।

विश्व हिंदू परिषद और आलोक कुमार के बयान पर रुख

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा था कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद राम मंदिर से विहिप की भूमिका समाप्त हो गई। देवकीनंदन ठाकुर ने इस बयान से सहमति जताते हुए कहा, 'उन्होंने विश्व हिंदू परिषद, सनातन और देश के लिए बहुत काम किया है तथा आगे भी करते रहेंगे। मैं उनकी बात से सहमत हूँ।'

सनातन बोर्ड की माँग: क्या है प्रस्ताव

देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि वे लंबे समय से सनातन बोर्ड के गठन की वकालत करते रहे हैं और इस विषय पर संघ व विहिप के वरिष्ठ लोगों से चर्चा भी हो चुकी है। उनके अनुसार, 'जैसे IAS और IPS अधिकारियों को संविधान का ज्ञान होता है, वैसे क्या उन्हें रामायण, वेद और शास्त्रों का भी ज्ञान होता है? धर्म से जुड़े कार्य धर्माचार्यों पर छोड़ दिए जाने चाहिए।'

उन्होंने माँग की कि चारों शंकराचार्य और पाँचवें वैष्णवाचार्य इस बोर्ड का नेतृत्व करें। भगवान के नाम पर आए धन का उपयोग गरीबों की सेवा, नि:शुल्क अस्पतालों और गौसेवा में किया जाए। उनका कहना था, 'राम और कृष्ण का धन किसी एक ट्रस्ट का नहीं, बल्कि पूरे सनातन समाज का होना चाहिए।'

चंपत राय के इस्तीफे और विपक्ष के बयान पर प्रतिक्रिया

राम मंदिर चंदे को लेकर हुए विवाद और चंपत राय के इस्तीफे के बाद विपक्ष की प्रतिक्रियाओं पर देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि बहस पीछे की बातों पर नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने पर होनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपेक्षा जताई कि इस बार ऐसा निर्णय लिया जाए जो आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखे।

आगे की राह: मोदी और शाह से अपेक्षाएँ

देवकीनंदन ठाकुर ने कहा, 'आज़ादी के बाद से अब तक किसी प्रधानमंत्री ने यह काम नहीं किया। मुझे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह से आशा है कि जिस प्रकार वक्फ बोर्ड को अधिकार दिए गए हैं, उसी प्रकार सनातन बोर्ड को भी अधिकार दिए जाएँ।' उनका प्रस्ताव है कि सभी मंदिरों को सनातन बोर्ड के अंतर्गत लाया जाए और चारों शंकराचार्यों में से किसी एक को बोर्ड का अध्यक्ष बनाया जाए। गौरतलब है कि मंदिर प्रबंधन में धर्माचार्यों की भूमिका को लेकर यह बहस देशभर में तेज़ होती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के आरोपों ने इसे नई तात्कालिकता दे दी है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार धार्मिक स्वायत्तता और प्रशासनिक जवाबदेही के बीच संतुलन बना सकती है — क्योंकि शंकराचार्यों के नेतृत्व वाला बोर्ड पारदर्शिता की गारंटी नहीं है, जब तक उसके पास स्वतंत्र ऑडिट और सार्वजनिक रिपोर्टिंग का ढाँचा न हो। वक्फ बोर्ड की तुलना राजनीतिक रूप से प्रभावशाली है, लेकिन वक्फ की अपनी जवाबदेही की समस्याएँ रही हैं — उसे आदर्श मानकर सनातन बोर्ड बनाना पर्याप्त नहीं होगा।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सनातन बोर्ड क्या है और देवकीनंदन ठाकुर इसकी माँग क्यों कर रहे हैं?
सनातन बोर्ड एक प्रस्तावित स्वायत्त निकाय है जो सभी हिंदू मंदिरों के प्रबंधन और उनके चढ़ावे के उपयोग की देखरेख करे। देवकीनंदन ठाकुर का तर्क है कि धार्मिक स्थलों का प्रबंधन धर्माचार्यों — विशेषकर चारों शंकराचार्यों और वैष्णवाचार्य — के हाथ में होना चाहिए, न कि प्रशासनिक अधिकारियों के।
राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के आरोप क्या हैं?
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के आरोप सामने आए हैं, जिनकी जाँच जारी बताई जा रही है। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि यदि यह सच है, तो 100 करोड़ सनातन भक्तों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुँची है।
सनातन बोर्ड में मंदिरों के चढ़ावे का उपयोग कैसे होगा?
देवकीनंदन ठाकुर के प्रस्ताव के अनुसार, मंदिरों में आए धन का उपयोग गरीबों की सेवा, नि:शुल्क अस्पतालों के निर्माण, गौशालाओं और आधुनिक गुरुकुलों के संचालन में किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यह धन किसी एक ट्रस्ट का नहीं, पूरे सनातन समाज का है।
चंपत राय के इस्तीफे पर देवकीनंदन ठाकुर का क्या कहना है?
ठाकुर ने इस्तीफे पर सीधी टिप्पणी से परहेज़ किया और कहा कि बहस भूतकाल पर नहीं, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने पर होनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह से ऐसा निर्णय लेने की अपेक्षा जताई जो आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखे।
VHP अध्यक्ष आलोक कुमार के बयान पर ठाकुर का क्या रुख है?
देवकीनंदन ठाकुर ने VHP राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार के उस बयान से सहमति जताई जिसमें उन्होंने कहा था कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद राम मंदिर से विहिप की भूमिका समाप्त हो गई। ठाकुर ने कुमार के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने सनातन और देश के लिए अहम काम किया है।
राष्ट्र प्रेस
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