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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: देवेशाचार्य बोले — सनातन धर्म को लगी गहरी चोट, सरकार सख्त कार्रवाई करे

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: देवेशाचार्य बोले — सनातन धर्म को लगी गहरी चोट, सरकार सख्त कार्रवाई करे

सारांश

राम मंदिर चढ़ावे की कथित चोरी ने अयोध्या में धार्मिक और राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेशाचार्य ने सनातन धर्म को 'गहरी चोट' बताते हुए कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी से इस्तीफे की माँग की। पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया, तो मंत्री सुरेश खन्ना ने विपक्ष को घेरा।

मुख्य बातें

हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेशाचार्य ने कहा कि राम मंदिर चढ़ावे की कथित चोरी से सनातन धर्म को गहरी चोट पहुँची है।
देवेशाचार्य ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी से पद से इस्तीफा देने और जाँच में सहयोग करने की माँग की।
बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने घटना को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' बताया और कहा कि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति रोकने पर ध्यान देना जरूरी है।
उत्तर प्रदेश के मंत्री सुरेश खन्ना ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का हवाला दिया।
इकबाल अंसारी ने माना कि यदि पहले उचित कानून होते तो यह घटना टाली जा सकती थी।

हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेशाचार्य ने 11 जुलाई को अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस घटना ने सनातन धर्म को गहरी चोट पहुँचाई है और सरकार को तत्काल सख्त कदम उठाने चाहिए। यह विवाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़ा है, जिसने धार्मिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर तूफान खड़ा कर दिया है।

देवेशाचार्य का बयान: 'देश का सिर शर्म से झुका'

हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेशाचार्य ने कहा, 'राम जन्मभूमि तीर्थ स्थल पर भगवान राम के नाम पर दिए गए चढ़ावे की चोरी ने पूरे देश को शर्मसार किया है। देश का सिर शर्म से झुक गया है और सनातन धर्म को मानने वालों को गहरा दुख पहुँचा है।' उन्होंने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी पर भी निशाना साधा और कहा कि कोषाध्यक्ष होने के नाते उनकी नैतिक जिम्मेदारी थी कि वे अपनी जवाबदेही स्वीकार करें, पद से इस्तीफा दें और जाँच में सहयोग करें।

इकबाल अंसारी की प्रतिक्रिया: आस्था बनाए रखें, दोबारा न हो ऐसी घटना

बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने इस घटना को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया। उन्होंने कहा, 'अयोध्या हमेशा से एक धार्मिक शहर और सभी की आस्था का केंद्र रहा है। यहाँ जो भी घटनाएँ हुईं, वे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थीं और उनसे सभी को दुख पहुँचा है।' अंसारी ने सरकार की कानून बनाने की पहल की सराहना की, लेकिन यह भी जोड़ा कि यदि पहले ही उचित कानून होते तो यह घटना टाली जा सकती थी। उनके अनुसार अभी भी लोगों की आस्था बनी हुई है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

मंत्री सुरेश खन्ना का विपक्ष पर हमला

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री सुरेश खन्ना ने इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देते हुए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'समाजवादी पार्टी के लोगों का कोई भरोसा नहीं है। पूरा देश उनका बर्ताव देख चुका है, जब उन्होंने कार सेवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया था।' खन्ना ने यह भी कहा कि अयोध्या शुरू से ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एजेंडे का हिस्सा रहा है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति लागू है।

विवाद की पृष्ठभूमि और व्यापक असर

यह ऐसे समय में सामने आया है जब राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की प्रशासनिक पारदर्शिता पहले से ही सवालों के घेरे में है। गौरतलब है कि जनवरी 2024 में मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से करोड़ों श्रद्धालु यहाँ चढ़ावा चढ़ा चुके हैं, जिससे ट्रस्ट की जवाबदेही का सवाल और भी अहम हो जाता है। आलोचकों का कहना है कि इतने बड़े धार्मिक स्थल के वित्तीय प्रबंधन में निगरानी तंत्र की कमी उजागर हुई है।

आगे क्या होगा

देवेशाचार्य और अन्य धर्माचार्यों की माँग है कि सरकार इस मामले में निष्पक्ष और त्वरित जाँच सुनिश्चित करे। इकबाल अंसारी के बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि इस मुद्दे पर सामाजिक सहमति बनाना संभव है, बशर्ते जाँच पारदर्शी हो। अब सबकी नजरें उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र पर टिकी हैं कि वे ट्रस्ट की जवाबदेही तय करने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी वित्तीय निगरानी का ढाँचा स्पष्ट नहीं है — यह खामी अब सामने आ गई है। मंत्री सुरेश खन्ना का विपक्ष पर हमला राजनीतिक दृष्टि से अपेक्षित था, लेकिन असली सवाल यह है कि सत्तारूढ़ दल की निगरानी में चल रहे ट्रस्ट में यह घटना कैसे हुई। इकबाल अंसारी का संतुलित बयान एक महत्वपूर्ण संकेत है — यदि सरकार पारदर्शी जाँच सुनिश्चित करे तो इस मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने से बचा जा सकता है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा विवाद क्या है?
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में भगवान राम के नाम पर चढ़ाए गए चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सामने आया है, जिसने धार्मिक और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न की है। यह घटना जनवरी 2024 में मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन पर उठते सवालों के बीच सामने आई है।
देवेशाचार्य ने गोविंद देव गिरी से इस्तीफे की माँग क्यों की?
हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेशाचार्य ने कहा कि कोषाध्यक्ष होने के नाते गोविंद देव गिरी की नैतिक जिम्मेदारी है कि वे जवाबदेही स्वीकार करें और पद से इस्तीफा देकर जाँच में सहयोग करें। उनके अनुसार इस घटना ने सनातन धर्म को मानने वालों को गहरा दुख पहुँचाया है।
इकबाल अंसारी ने इस मामले पर क्या कहा?
बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि यदि सरकार पहले ही उचित कानून बना देती तो यह नहीं होता। उन्होंने सरकार की मौजूदा पहल की सराहना की और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने पर जोर दिया।
उत्तर प्रदेश सरकार की इस मामले में क्या स्थिति है?
मंत्री सुरेश खन्ना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का हवाला देते हुए कहा कि अपराध के प्रति कोई ढील नहीं दी जाएगी। उन्होंने विपक्षी समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा।
इस विवाद का अयोध्या और आस्था पर क्या असर पड़ा है?
इकबाल अंसारी के अनुसार अभी भी लोगों की आस्था बनी हुई है, लेकिन इस घटना ने सभी धर्मों के श्रद्धालुओं को दुखी किया है। देवेशाचार्य का कहना है कि सनातन धर्म की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँची है और सरकार की सख्त कार्रवाई ही इस आस्था को बहाल कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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