राम मंदिर चढ़ावा चोरी: ट्रस्ट अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास ने पत्र लिखकर मोदी-योगी पर जताया भरोसा, राजनीति न करने की अपील
सारांश
मुख्य बातें
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने 6 जुलाई 2026 को अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले पर गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए एक पत्र जारी किया, जिसमें उन्होंने दोषियों को कड़ी सजा देने की माँग की और इस मामले का राजनीतिकरण न करने की अपील की। पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पूरा भरोसा जताया कि वे न्याय सुनिश्चित करेंगे।
महंत का पत्र: क्या कहा
महंत नृत्य गोपाल दास ने अपने पत्र में लिखा, 'श्री रामलला सरकार के मंदिर से दान की चोरी से मुझे बहुत दुख हुआ है। जिसने भी यह पाप किया है, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। मुझे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूरा भरोसा है कि वे इस पाप कर्म में शामिल व्यक्ति को सजा दिलाएंगे।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़ा है और किसी को भी निजी फायदे के लिए इस पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।
ट्रस्ट की अहम बैठक
इसी बीच, ट्रस्ट ने 6 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा द्वारा सौंपे गए इस्तीफों पर विचार किया जाएगा। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि यह बैठक अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की मंजूरी से कम समय के नोटिस पर बुलाई गई है।
गौरतलब है कि महंत नृत्य गोपाल दास इस समय अस्पताल में भर्ती हैं, फिर भी उन्होंने ट्रस्ट के मामलों में सक्रिय रुचि बनाए रखी है।
एसआईटी जाँच और अनियमितताओं पर चर्चा
बैठक में मंदिर के लिए चढ़ावा संग्रह और राम मंदिर के प्रबंधन से जुड़ी कथित अनियमितताओं की चल रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की जाँच पर भी विचार-विमर्श होगा। यह ऐसे समय में आया है जब मंदिर प्रबंधन को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं और ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफों ने विवाद को और गहरा कर दिया है।
राजनीतिकरण पर चिंता
महंत के पत्र में राजनीतिकरण न करने की अपील इस लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर सरकार और ट्रस्ट को घेरने की कोशिश की है। आलोचकों का कहना है कि इतने बड़े धार्मिक स्थल पर चढ़ावे की सुरक्षा व्यवस्था में चूक गंभीर प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है।
आगे क्या
एसआईटी की जाँच जारी है और ट्रस्ट की आज की बैठक के नतीजे यह तय करेंगे कि इस्तीफे स्वीकार होते हैं या नहीं। मंदिर प्रशासन में बड़े फेरबदल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। महंत के पत्र ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ट्रस्ट इस मामले को आंतरिक रूप से हल करना चाहता है, न कि इसे राजनीतिक विवाद बनने देना।