राम नाम के बेलपत्र से सजे बाबा महाकाल, आषाढ़ अष्टमी पर भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 8 जुलाई 2026 को आषाढ़ कृष्ण पक्ष अष्टमी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस दिव्य अनुष्ठान के दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु बीती रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध हो गए थे। विशेष रूप से राम नाम के बेलपत्रों से सजाए गए बाबा महाकाल के इस स्वरूप ने भक्तों को अभिभूत कर दिया।
मुख्य घटनाक्रम
बुधवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच महाकाल मंदिर के कपाट विधिवत खोले गए। कपाट खुलते ही मंत्रोच्चार के साथ जलाभिषेक किया गया और भगवान महाकाल को दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से स्नान कराया गया। इसके पश्चात हरि ओम का जल अर्पित किया गया और राम नाम लिखे बेलपत्रों से बाबा का विशेष श्रृंगार किया गया।
दिव्य शृंगार और भस्म आरती संपन्न होने के बाद जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
भस्म आरती की परंपरा
जानकारी के अनुसार, प्राचीन काल में बाबा महाकाल को श्मशान की राख से भस्म आरती की जाती थी, किंतु अब कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से विशेष रूप से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। यह परिवर्तन परंपरा और शुद्धता दोनों का समन्वय है। भस्म आरती में भाग लेने के लिए पुरुषों को पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है।
विशिष्ट अतिथि
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के पुत्र तोशेंद्र देव साय ने परिवार के एक सदस्य के साथ इस भस्म आरती में सहभागिता की। उन्होंने प्रातःकालीन इस पवित्र अनुष्ठान में शामिल होकर बाबा महाकाल का आशीर्वाद ग्रहण किया।
सुरक्षा व्यवस्था
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पुलिस बल तैनात किया गया। व्यवस्था सुचारू रखने के लिए प्रशासन ने विशेष प्रबंध किए थे। गौरतलब है कि बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है और यहाँ सामान्य श्रद्धालुओं के साथ-साथ著名 हस्तियाँ भी दर्शन के लिए आती हैं।
आगे का कार्यक्रम
आषाढ़ माह के शेष पखवाड़े में भी मंदिर में विशेष अनुष्ठान और आरतियाँ आयोजित होती रहेंगी। श्रद्धालुओं की यह आस्था की धारा सावन माह आते-आते और अधिक प्रबल होने की संभावना है, जब महाकाल मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ता है।