महाकालेश्वर मंदिर में राम नाम के बेल पत्र से बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार, भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 16 जून 2026 को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष द्वितीया के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस विशेष आयोजन में भगवान महाकाल को राम नाम से अंकित बेल पत्रों से अलौकिक शृंगार कर भस्म अर्पित की गई, जिसके बाद मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
मुख्य घटनाक्रम
मंगलवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। मंदिर के पट खुलते ही पुजारियों ने मंत्रोच्चार के साथ भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न किया गया।
शृंगार के क्रम में त्रिशूल, त्रिपुंड, डमरू, भांग, चंदन और विशेष रूप से राम नाम से अंकित बेल पत्र अर्पित किए गए। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के पश्चात जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से भर उठा।
भस्म की विशेषता और परंपरा
जानकारी के अनुसार, पूर्व में महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। यह परिवर्तन परंपरा और पवित्रता दोनों को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुषों हेतु पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है — यह नियम मंदिर की गरिमा और धार्मिक मर्यादा को बनाए रखने के उद्देश्य से लागू है।
श्रद्धालुओं का सैलाब
बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु सोमवार देर रात से ही मंदिर के बाहर कतार में खड़े हो गए थे। देश-विदेश से आए आस्थावान भक्तों ने बाबा के दर्शन कर अपने को धन्य माना। गौरतलब है कि महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती देश ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलौकिकता के लिए प्रसिद्ध है।
सुरक्षा व्यवस्था
भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही और व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए।
यह आयोजन एक बार फिर इस बात का प्रमाण है कि महाकालेश्वर मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा की जीवंत अभिव्यक्ति भी है। आने वाले त्योहारों और विशेष तिथियों पर यहाँ श्रद्धालुओं की संख्या और भी बढ़ने की संभावना है।