3 नवंबर 2026
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अयोध्या: रामदल ट्रस्ट ने राम मंदिर के प्राचीन पेड़ों की रक्षा को लेकर गृह मंत्री अमित शाह को लिखा पत्र

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अयोध्या: रामदल ट्रस्ट ने राम मंदिर के प्राचीन पेड़ों की रक्षा को लेकर गृह मंत्री अमित शाह को लिखा पत्र

सारांश

अयोध्या के रामदल ट्रस्ट ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर राम मंदिर परिसर के प्राचीन पेड़ों की रक्षा की माँग की है। ट्रस्ट ने आरोप लगाया कि 2024 चुनाव से पहले PM मोदी और पूर्व राष्ट्रपति कोविंद द्वारा लगाए गए पारिजात और रुद्राक्ष के पवित्र वृक्ष उखाड़ दिए गए।

मुख्य बातें

रामदल ट्रस्ट के अध्यक्ष कल्कि राम ने 3 नवंबर 2026 को गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर राम जन्मभूमि परिसर के पेड़ों की सुरक्षा की माँग की।
5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लगाया गया पारिजात और 29 अगस्त 2021 को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा लगाया गया रुद्राक्ष का वृक्ष 2024 लोकसभा चुनाव से पहले उखाड़े जाने का आरोप।
मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास ने कथित तौर पर वृक्षों को हटाने की जानकारी ट्रस्ट को दी थी।
ट्रस्ट ने अपील की कि अमित शाह की अयोध्या यात्रा के दौरान कोई नया वृक्षारोपण कार्यक्रम न किया जाए।
ट्रस्ट की प्राथमिकता — नए पौधे लगाने से पहले परिसर के विद्यमान प्राचीन वृक्षों का संरक्षण सुनिश्चित हो।

अयोध्या स्थित रामदल ट्रस्ट ने राम जन्मभूमि परिसर में मौजूद प्राचीन एवं पवित्र पेड़ों के संरक्षण को लेकर गंभीर चिंता जताई है। ट्रस्ट ने 3 नवंबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर यह अपील की है कि यदि उनकी अयोध्या यात्रा के दौरान किसी वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन प्रस्तावित हो, तो उसे न किया जाए और परिसर के विद्यमान पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

ट्रस्ट ने क्या माँग की

रामदल ट्रस्ट के अध्यक्ष कल्कि राम ने इस पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा है कि गृह मंत्री अमित शाह के अयोध्या आगमन का वे हृदय से स्वागत करते हैं और उन्हें दर्शन-पूजन के लिए आमंत्रित करते हैं। हालाँकि उनका अनुरोध है कि यदि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा किसी वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा हो, तो कृपया वे उसमें सहभागी न हों।

कल्कि राम का कहना है कि नए पौधे रोपने से पहले परिसर में पहले से उपस्थित पुराने और पवित्र वृक्षों का संरक्षण प्राथमिकता होनी चाहिए।

पारिजात और रुद्राक्ष के वृक्षों को लेकर चिंता

कल्कि राम ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि 5 अगस्त 2020 को भूमि पूजन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में काशी से आए विद्वानों के साथ विधि-विधान पूर्वक पारिजात का दिव्य वृक्ष लगाया था। इसके बाद 29 अगस्त 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राम जन्मभूमि के दर्शन किए और रुद्राक्ष का पवित्र वृक्ष रोपित किया था।

ट्रस्ट अध्यक्ष के अनुसार ये दोनों पवित्र वृक्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पूर्व उखाड़कर फेंक दिए गए। उन्होंने बताया कि इस बात की जानकारी उन्हें राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास ने उसी समय दी थी।

धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व का पक्ष

कल्कि राम ने पत्र में यह भी व्यक्त किया कि इन वृक्षों के उखाड़े जाने के बाद से उन्हें आशंका है कि यह अशुभ संकेत हो सकता है। उनके अनुसार, इन वृक्षों को विधि-विधान के साथ देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तित्वों द्वारा लगाया गया था, जो इन्हें धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व देता है।

गौरतलब है कि राम जन्मभूमि परिसर के भूदृश्य और हरित विकास पर यह पहली बार नहीं है जब किसी धार्मिक संगठन ने सार्वजनिक रूप से चिंता जताई हो। परिसर के निर्माण और विस्तार कार्यों के दौरान पेड़-पौधों के प्रबंधन को लेकर समय-समय पर प्रश्न उठते रहे हैं।

आगे क्या होगा

रामदल ट्रस्ट ने गृह मंत्री से औपचारिक उत्तर की प्रतीक्षा की बात कही है। यह पत्र ऐसे समय में आया है जब अमित शाह की अयोध्या यात्रा प्रस्तावित बताई जा रही है। ट्रस्ट का कहना है कि वे इस विषय को राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष भी उठाने पर विचार कर रहे हैं, ताकि परिसर के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले वृक्षों का समुचित संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

यदि सत्यापित होता है, तो यह श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की प्रबंधन प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। यह ऐसे समय में भी महत्वपूर्ण है जब अयोध्या परिसर का निर्माण और विस्तार बड़े पैमाने पर जारी है, और पारिस्थितिकी एवं धरोहर संरक्षण की चिंताएँ पहले से ही उठ रही हैं। मुख्यधारा की कवरेज इस पत्र को एक स्थानीय धार्मिक विवाद की तरह देख सकती है, लेकिन इसमें निहित सवाल — राष्ट्रीय प्रतीक स्थलों पर निर्णय कौन और कैसे लेता है — कहीं बड़े हैं।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामदल ट्रस्ट ने अमित शाह को पत्र क्यों लिखा?
रामदल ट्रस्ट ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर अपील की है कि उनकी प्रस्तावित अयोध्या यात्रा के दौरान राम जन्मभूमि परिसर में कोई नया वृक्षारोपण कार्यक्रम न किया जाए। ट्रस्ट का कहना है कि पहले से मौजूद प्राचीन एवं पवित्र पेड़ों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
पारिजात और रुद्राक्ष के वृक्षों को लेकर क्या विवाद है?
रामदल ट्रस्ट के अध्यक्ष कल्कि राम के अनुसार, 2020 में PM मोदी द्वारा लगाया गया पारिजात और 2021 में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा लगाया गया रुद्राक्ष का वृक्ष — दोनों 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उखाड़ दिए गए। मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास ने कथित तौर पर इसकी जानकारी दी थी।
क्या राम मंदिर परिसर में पेड़ हटाए जाने की बात आधिकारिक रूप से पुष्टि हुई है?
अभी तक श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट या किसी सरकारी अधिकारी की ओर से इस विषय में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। रामदल ट्रस्ट ने यह जानकारी मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास के हवाले से दी है, जिसे 'कथित तौर पर' की श्रेणी में रखा जाना उचित है।
रामदल ट्रस्ट और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में क्या अंतर है?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट वह सरकार-निर्मित निकाय है जो राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन का संचालन करता है। रामदल ट्रस्ट एक अलग धार्मिक संगठन है जो अयोध्या में सक्रिय है और इस पत्र के माध्यम से परिसर के प्रबंधन संबंधी अपनी चिंताएँ सरकार तक पहुँचा रहा है।
अमित शाह की अयोध्या यात्रा का क्या कार्यक्रम है?
रामदल ट्रस्ट के अध्यक्ष कल्कि राम ने पत्र में उल्लेख किया है कि गृह मंत्री अमित शाह अयोध्या आ रहे हैं और राम जन्मभूमि के दर्शन कर सकते हैं। हालाँकि उनकी यात्रा की आधिकारिक तिथि या कार्यक्रम की विस्तृत पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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