रामगढ़ बंद कोयला खदान में जहरीली गैस से चार युवकों की मौत, अवैध उत्खनन के दौरान हादसा
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के रामगढ़ जिले में 13 जून को गिद्दी-रामगढ़ सीमावर्ती अरगड्डा वन क्षेत्र की एक बंद कोयला खदान में अवैध उत्खनन के दौरान जहरीली गैस के रिसाव से चार युवकों की मौत हो गई। मृतकों में दो युवक रामगढ़ और दो हजारीबाग जिले के निवासी थे।
हादसे का घटनाक्रम
अधिकारियों के अनुसार, खदान के भीतर सबसे पहले एक युवक जहरीली गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गया। उसे बचाने के लिए उसके तीन साथी एक-एक कर नीचे उतरे, लेकिन वे भी गैस के प्रभाव से बेहोश होकर गिर पड़े। इस तरह बचाव की कोशिश में उतरे युवक भी हादसे का शिकार बन गए।
मृतकों की पहचान
मारे गए युवकों की पहचान आशीष रजवार (25 वर्ष), किशोर रवानी (35 वर्ष), देवा कुमार बेदिया (25 वर्ष) और डब्लू बेदिया (30 वर्ष) के रूप में हुई है। देवा कुमार बेदिया और डब्लू बेदिया हजारीबाग जिले के सिरका अरगड्डा क्षेत्र के निवासी थे, जबकि आशीष रजवार और किशोर रवानी रामगढ़ के सिरका बुद्ध बाजार इलाके के रहने वाले थे।
बचाव अभियान
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और ग्रामीण मौके पर पहुँचे। इसके बाद सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) की नईसराय माइंस रेस्क्यू टीम को बुलाया गया। 14 सदस्यीय रेस्क्यू टीम ने अभियान चलाया, जिसमें 7 सदस्य सुरक्षा उपकरणों के साथ खदान के भीतर उतरे। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद चारों युवकों को बाहर निकाला गया और तत्काल अस्पताल पहुँचाया गया।
मौत का कारण और जाँच
चिकित्सकों ने दो युवकों को अस्पताल पहुँचते ही मृत घोषित कर दिया, जबकि दो अन्य ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जाँच में खदान के भीतर ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम और जहरीली गैसों का स्तर अधिक होने की बात सामने आई है। माना जा रहा है कि दम घुटने से चारों की मौत हुई, हालाँकि मौत के सटीक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया वीडियोग्राफी के बीच कराई जा रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगे की राह
पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र की बंद खदानों में गैस रिसाव का खतरा लंबे समय से बना हुआ है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने हादसे पर दुख जताते हुए प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया और मामले की जवाबदेही तय करने की माँग की। यह घटना एक बार फिर झारखंड में बंद और परित्यक्त खदानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।