रामगढ़ खदान हादसा: बाबूलाल मरांडी ने मृतकों के परिजनों से मिलकर न्यायिक जांच की मांग उठाई
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में रामगढ़ जिले के अरगड्डा वन क्षेत्र स्थित एक बंद कोयला खदान में 14 जून 2026 को जहरीली गैस की चपेट में आने से चार युवकों की मौत हो गई। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने रविवार को घटनास्थल पहुँचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और इस त्रासदी को प्रशासनिक विफलता का सीधा परिणाम बताया।
हादसे का घटनाक्रम
गिद्दी-रामगढ़ सीमावर्ती अरगड्डा वन क्षेत्र में स्थित एक बंद खदान में अवैध उत्खनन के दौरान यह दुर्घटना हुई। सबसे पहले एक युवक खदान के भीतर जहरीली गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गया। उसे बचाने के लिए उसके तीन साथी खदान में उतरे, लेकिन दम घुटने से चारों की मौत हो गई।
मृतकों की पहचान देवा कुमार बेदिया, डब्लू बेदिया, किशोर रवानी और आशीष रजवार के रूप में की गई है। प्रारंभिक जांच में खदान के भीतर ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम और जहरीली गैसों की मौजूदगी की पुष्टि हुई है।
मरांडी की मांगें और आरोप
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार से इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की माँग की। उन्होंने कहा कि गरीब और विस्थापित परिवारों के लोग मजबूरी में अपनी जान जोखिम में डालकर बंद खदानों में उतरते हैं।
मरांडी ने तर्क दिया कि बंद खदानों की सुरक्षा और घेराबंदी की जिम्मेदारी जिला प्रशासन और सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) की है, फिर भी क्षेत्र में बड़ी संख्या में अवैध सुरंगनुमा खदानें संचालित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियाँ स्थानीय तंत्र की जानकारी के बिना संभव नहीं हैं।
मरांडी ने दोषियों पर हत्या की धाराओं के तहत कार्रवाई की माँग करते हुए जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।
परिजनों की मांगें
मृतकों के परिजनों ने प्रत्येक मृतक के परिवार को ₹10 लाख मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की माँग रखी है। मरांडी ने इन माँगों का समर्थन करते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत और दीर्घकालिक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
व्यापक संदर्भ: अवैध खनन की समस्या
यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में अवैध कोयला खनन की घटनाएँ लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। गौरतलब है कि बंद खदानों में अवैध प्रवेश रोकने के लिए नियमों के बावजूद, आजीविका के अभाव में स्थानीय युवा इन जानलेवा खदानों में उतरने को मजबूर होते हैं। यह घटना प्रशासनिक निगरानी की खामियों और सामाजिक-आर्थिक दबावों की एक साथ परिणति है।
इस हादसे के बाद न्यायिक जांच और पीड़ित परिवारों को राहत के सवाल पर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार है।