रविशंकर प्रसाद: '84 के जख्म और पंजाब में नशे की पीड़ा, न्याय बिना नहीं होगी भरपाई
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 4 नवंबर 2026 को चंडीगढ़ में 'जख्म 84 दे' शीर्षक से एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें 1984 के सिख विरोधी नरसंहार के पीड़ितों और उनके परिजनों की उपस्थिति में माहौल गहरे दुख और संकल्प से भरा रहा। सम्मेलन की शुरुआत 1984 में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति और न्याय की अनवरत लड़ाई के लिए एक विशेष अरदास से हुई।
प्रदर्शनी और आयोजन का आगाज़
सम्मेलन की चर्चा शुरू होने से पहले नवंबर 1984 की दर्दनाक घटनाओं को दर्शाने वाली तस्वीरों की एक विशेष प्रदर्शनी लगाई गई। इसका उद्घाटन पटना साहिब से सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता रविशंकर प्रसाद ने किया। पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और प्रदेश प्रभारी सतीश पूनिया भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
प्रदर्शनी में दिल्ली के त्रिलोकपुरी में जलाए गए घरों, कनॉट प्लेस में तबाह हुए प्रतिष्ठानों, विस्थापित परिवारों और बसों से सिखों को खींचे जाने जैसी घटनाओं की श्वेत-श्याम तस्वीरें प्रदर्शित की गईं, जिन्होंने उन भयावह यादों को फिर से ताज़ा कर दिया।
रविशंकर प्रसाद का संबोधन
उद्घाटन सत्र में रविशंकर प्रसाद ने पीड़ित परिवारों के साथ मंच साझा करते हुए गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'आज पंजाब की आत्मा पर दो गहरे दाग हैं — '84 के जख्म' और 'चिट्टे की पीड़ा'। बिना निष्पक्ष और ठोस न्याय के ये जख्म नहीं भर सकते।' प्रसाद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए पंजाब में कांग्रेस के राजनीतिक कार्यक्रमों के समय और उद्देश्य पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा, '1 नवंबर को कांग्रेस ने दिल्ली में रैली की और आज यहाँ राजनीतिक कार्यक्रम कर रही है। इन ताज़ा जख्मों पर नमक क्यों छिड़का जा रहा है?' प्रसाद ने 19 नवंबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के विवादित बयान — 'जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है' — का उल्लेख करते हुए इसे हजारों निर्दोष सिखों की हत्या को उचित ठहराने की कोशिश बताया।
ऐतिहासिक साक्ष्य और कांग्रेस पर आरोप
प्रसाद ने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री रहते हुए उन्होंने उस विवादित बयान का वीडियो साक्ष्य सार्वजनिक अभिलेखों में पुनः उपलब्ध कराने का काम किया था, जो पहले उनसे गायब हो गया था। उन्होंने राहुल गांधी से पूछा कि उनके पिता के इस बयान पर उनका क्या रुख है और परिवार ने देश से ईमानदारी से माफी क्यों नहीं माँगी।
कांग्रेस पर पिछले चार दशकों से मामले को दबाने का आरोप लगाते हुए प्रसाद ने कहा कि पार्टी का रवैया 'लटकाना, भटकाना और झटकाना' रहा है। उन्होंने कहा कि एक के बाद एक आयोग बनाए गए, लेकिन कांग्रेस शासनकाल में — यहाँ तक कि डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भी — आरोपियों को सज़ा दिलाने की इच्छाशक्ति नहीं दिखी।
मोदी सरकार और न्याय की दिशा में कदम
प्रसाद ने दावा किया कि नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया गया और न्यायमूर्ति ढींगरा की सिफारिशों को लागू किया गया, जिसके फलस्वरूप सज्जन कुमार जैसे आरोपियों को सज़ा मिल सकी। उन्होंने इस कानूनी लड़ाई में वरिष्ठ अधिवक्ता एच. एस. फूलका के प्रयासों की भी सराहना की। उनके अनुसार 3,500 निर्दोष लोगों की जान गई, फिर भी कांग्रेस केवल अपने नेताओं को बचाने में लगी रही।
ढिल्लों और भाजपा नेताओं का संकल्प
पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने पीड़ित परिवारों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा, 'जो समुदाय अपना अतीत भूल जाता है, वह अपना भविष्य भी भूल जाता है। हमने 1984 को न तो भुलाया है और न ही भुलाने देंगे।' उन्होंने राहुल गांधी की संगरूर रैली पर तंज कसते हुए कहा कि जिन्होंने जख्म दिए, उनसे न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर. पी. सिंह ने भी पीड़ितों के साथ पार्टी की प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि पूर्ण न्याय मिलने तक भाजपा पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी रहेगी। गौरतलब है कि यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ जब पंजाब में आगामी राजनीतिक सरगर्मियाँ तेज़ हो रही हैं और 1984 का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में है।