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दिवाली पर राघव चड्ढा की अपील: स्थानीय कारीगरों से खरीदें, कुम्हार परिवार संग बनाए मिट्टी के दीए

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दिवाली पर राघव चड्ढा की अपील: स्थानीय कारीगरों से खरीदें, कुम्हार परिवार संग बनाए मिट्टी के दीए

सारांश

BJP सांसद राघव चड्ढा ने दिवाली पर एक कुम्हार परिवार के साथ मिट्टी के दीए बनाकर स्थानीय खरीदारी की अपील की — यह इशारा है उस बड़े सवाल की तरफ कि क्या भावनात्मक संदेशों से परे कारीगरों की आमदनी वाकई बदलेगी।

मुख्य बातें

BJP सांसद राघव चड्ढा ने 4 नवंबर 2026 को दिवाली के अवसर पर स्थानीय कारीगरों और पारंपरिक शिल्प को समर्थन देने की अपील की।
चड्ढा ने एक कुम्हार परिवार के साथ मिट्टी के दीए बनाने में हाथ बँटाया और परिवार की आजीविका की चुनौतियाँ समझीं।
उन्होंने कारीगरों को बेहतर कीमत, अधिक मुनाफे और उचित पारिश्रमिक के लिए संसद में आवाज उठाने का आश्वासन दिया।
इंस्टाग्राम पर साझा वीडियो में चड्ढा ने लिखा: 'आपकी छोटी सी खरीदारी, किसी की पूरी दिवाली।' नागरिकों से अपील की कि स्थानीय बाजारों से खरीदारी करें, क्योंकि छोटी-सी खरीद से किसी परिवार की पूरी दिवाली रोशन हो सकती है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद राघव चड्ढा ने 4 नवंबर 2026 को दिवाली के अवसर पर नागरिकों से स्थानीय बाजारों, पारंपरिक कारीगरों और छोटे व्यवसायों को प्राथमिकता देने की अपील की। चड्ढा ने एक कुम्हार परिवार से मुलाकात कर उनके शिल्प कौशल और आजीविका की चुनौतियों को उजागर किया। उन्होंने कारीगरों के लिए बेहतर पारिश्रमिक और बाजार पहुँच सुनिश्चित करने का आश्वासन भी दिया।

कुम्हार परिवार से मुलाकात और मिट्टी के दीए

दिवाली की खरीदारी के दौरान राघव चड्ढा को एक स्थानीय बाजार में एक युवक ने अपने घर आमंत्रित किया। वहाँ पहुँचने पर उन्होंने पूरे परिवार को मिट्टी के बर्तन, पारंपरिक दीये और सजावटी सामान तैयार करते हुए पाया। चड्ढा ने स्वयं कुम्हार परिवार के साथ मिट्टी के दीए बनाने में हाथ बँटाया और इस कला की पीढ़ियों पुरानी परंपरा को करीब से समझा।

सांसद का संदेश और सोशल मीडिया पोस्ट

चड्ढा ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वे कुम्हार परिवार के साथ दीए बनाते और कारीगरों से उनकी कमाई, मिट्टी के स्रोत तथा शिल्प-प्रक्रिया के बारे में बातचीत करते दिखे। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा: 'आपकी छोटी सी खरीदारी, किसी की पूरी दिवाली।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि हस्तनिर्मित उत्पाद महज कच्चे माल से कहीं अधिक हैं — वे किसी परिवार की मेहनत, परंपरा और आस्था का प्रतीक हैं।

कारीगरों को दिया आश्वासन

चड्ढा ने कारीगरों से सीधी बातचीत में कहा: 'मैं आपकी आवाज बुलंद करूंगा और आपके काम को बढ़ावा देने के लिए प्रयास करूंगा ताकि आपको अपने हाथों से की गई मेहनत का बेहतर मुआवजा मिल सके।' उन्होंने बेहतर कीमतें, अधिक मुनाफा और उचित पारिश्रमिक दिलाने के प्रयासों का वादा किया। यह आश्वासन ऐसे समय में आया है जब पारंपरिक कुम्हार और दीए बनाने वाले कारीगर चीनी उत्पादों की सस्ती प्रतिस्पर्धा और घटती माँग की चुनौती का सामना कर रहे हैं।

आम जनता से अपील

सांसद ने नागरिकों को इस त्योहारी मौसम में स्थानीय खरीदारी को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके शब्दों में: 'इस दिवाली, अपने स्थानीय बाजारों से थोड़ी ज्यादा खरीदारी करें। हर छोटी दुकान के पीछे एक परिवार है जो बेहतर त्योहारी मौसम की उम्मीद कर रहा है। जो खरीदारी हमारे लिए छोटी-मोटी हो सकती है, वह पूरे परिवार में खुशियां ला सकती है।' गौरतलब है कि 'वोकल फॉर लोकल' की मुहिम के बावजूद देशभर में बड़े पैमाने पर चीनी और सस्ते आयातित दीये-झालर बिकते हैं, जिससे स्थानीय कारीगरों की आमदनी प्रभावित होती है।

व्यापक संदर्भ

दिवाली के मौसम में स्थानीय शिल्प को बढ़ावा देना एक ऐसी पहल है जिसे विभिन्न दलों के नेता समय-समय पर उठाते रहे हैं। चड्ढा की यह अपील इस बड़ी प्रवृत्ति का हिस्सा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि केवल भावनात्मक अपील से परे, कारीगरों को सरकारी खरीद नीति, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर प्राथमिकता और वित्तीय सहायता की दीर्घकालिक जरूरत है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि सांसद अपने संसदीय प्रयासों में इन मुद्दों को किस हद तक ठोस रूप देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'वोकल फॉर लोकल' की मुहिम बरसों से चल रही है और स्थानीय कुम्हारों की आमदनी में कोई बड़ा संरचनात्मक बदलाव नहीं आया है। असली सवाल यह है कि क्या सांसद इस भावना को संसद में ठोस नीतिगत माँग — जैसे सरकारी दिवाली खरीद में कुम्हारों को आरक्षण या ई-कॉमर्स पर हस्तशिल्प को प्राथमिकता — में बदलेंगे। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और जमीनी नीति-परिवर्तन के बीच की खाई को पाटना ही इस अपील की असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राघव चड्ढा ने दिवाली पर क्या अपील की?
BJP सांसद राघव चड्ढा ने दिवाली 2026 पर नागरिकों से स्थानीय बाजारों, पारंपरिक कारीगरों और छोटे व्यवसायों से खरीदारी को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता की छोटी-सी खरीद एक कारीगर परिवार की पूरी दिवाली रोशन कर सकती है।
राघव चड्ढा और कुम्हार परिवार की मुलाकात कैसे हुई?
दिवाली की खरीदारी के दौरान एक स्थानीय बाजार में एक युवक ने चड्ढा को अपने घर आमंत्रित किया, जहाँ पूरा परिवार मिट्टी के दीए, बर्तन और सजावटी सामान बना रहा था। चड्ढा ने परिवार के साथ मिलकर दीए बनाए और उनसे आमदनी व शिल्प की चुनौतियों पर चर्चा की।
चड्ढा ने कारीगरों को क्या आश्वासन दिया?
चड्ढा ने कारीगरों से वादा किया कि वे उनकी चिंताओं को संसद में उठाएंगे और बेहतर कीमतें, अधिक मुनाफा तथा उनकी मेहनत के लिए उचित पारिश्रमिक सुनिश्चित करने के प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि वे कारीगरों की आवाज बुलंद करेंगे।
स्थानीय दीए और हस्तशिल्प खरीदना क्यों जरूरी है?
पारंपरिक कुम्हार और कारीगर परिवार चीनी उत्पादों की सस्ती प्रतिस्पर्धा और घटती माँग के कारण आर्थिक दबाव में हैं। स्थानीय खरीदारी सीधे इन परिवारों की आजीविका को सहारा देती है और पीढ़ियों पुरानी शिल्प परंपरा को जीवित रखती है।
चड्ढा ने इस अपील को कहाँ साझा किया?
उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वे कुम्हार परिवार के साथ दीए बनाते और उनसे बातचीत करते दिखे। पोस्ट के साथ उन्होंने लिखा: 'आपकी छोटी सी खरीदारी, किसी की पूरी दिवाली।'
राष्ट्र प्रेस
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