जयपुर में ईपीएफओ अधिकारी ₹1 लाख रिश्वत लेते गिरफ्तार, एसीबी ने रंगे हाथ पकड़ा
सारांश
मुख्य बातें
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बुधवार, 4 नवंबर 2026 को जयपुर में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के प्रवर्तन अधिकारी सोनू मौर्य को कथित तौर पर ₹1 लाख की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। एसीबी की जयपुर सिटी-4 इकाई ने ट्रैप ऑपरेशन के तहत यह कार्रवाई अंजाम दी।
मामले की पृष्ठभूमि
एसीबी महानिदेशक गोविंद गुप्ता के अनुसार, शिकायतकर्ता ने ब्यूरो को सूचित किया था कि आरोपी अधिकारी ने उसकी कंपनी के कर्मचारियों का भविष्य निधि (पीएफ) अंशदान जमा न होने के मामले में एफआईआर दर्ज करने से बचाने के बदले ₹2 लाख की माँग की थी। आरोप है कि आरोपी ने शिकायतकर्ता की कंपनी के बैंक खाते फ्रीज करने की धमकी भी दी थी।
शिकायत प्राप्त होने के बाद एसीबी ने आरोप का सत्यापन किया, जिसमें पुष्टि हुई कि अधिकारी ₹1 लाख की रिश्वत लेने पर सहमत हुआ था।
ट्रैप कार्रवाई और गिरफ्तारी
बुधवार को आरोपी सोनू मौर्य ने शिकायतकर्ता की कंपनी के चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) की उपस्थिति में ₹1 लाख की रिश्वत राशि स्वीकार कर ली। इसके तत्काल बाद एसीबी की टीम ने मौके पर पहुँचकर रकम बरामद की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
यह पूरी कार्रवाई एसीबी के उप महानिरीक्षक ओमप्रकाश मीणा के निर्देशन और जयपुर सिटी-4 इकाई के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार गुप्ता के नेतृत्व में संपन्न हुई।
जाँच की दिशा और कानूनी कार्रवाई
एसीबी ने आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। एसीबी की अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव और पुलिस महानिरीक्षक एस. परिमला के निर्देशन में आरोपी से पूछताछ जारी है।
ब्यूरो इस मामले में अन्य संभावित संलिप्त व्यक्तियों की भी जाँच कर रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि यह मामला महज एक अधिकारी तक सीमित नहीं हो सकता।
आम नागरिकों के लिए एसीबी की अपील
ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति को उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज होने की जानकारी मिलती है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत एसीबी से संपर्क कर अपना पक्ष रख सकता है। एसीबी तथ्यों और स्पष्टीकरण की जाँच के बाद ही आगे की कार्रवाई करती है।
ब्यूरो ने नागरिकों से 24 घंटे की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1064 या व्हाट्सएप हेल्पलाइन 94135-02834 पर भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कराने की अपील की है। यह मामला राजस्थान में सरकारी तंत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करने की एसीबी की जारी कोशिशों का हिस्सा है।