सबरीमाला मामला: सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की पीठ ने इंडियन लॉयर्स एसोसिएशन से पूछा — धार्मिक मुद्दों में दखल क्यों?
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय की 9 जजों की संविधान पीठ ने 5 मई 2026 को सबरीमाला मंदिर मामले की सुनवाई के दौरान मूल याचिकाकर्ता संस्था इंडियन लॉयर्स एसोसिएशन से कड़े सवाल किए। पीठ ने पूछा कि क्या याचिकाकर्ता देश के मुख्य पुजारी हैं, जो इस प्रकार के संवेदनशील धार्मिक मुद्दे को लेकर अदालत का दरवाज़ा खटखटाने पहुँचे हैं। अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह की जनहित याचिका कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग प्रतीत होती है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर लगी पारंपरिक रोक को चुनौती देने से जुड़ा है। इंडियन लॉयर्स एसोसिएशन ने सर्वप्रथम वर्ष 2006 में इस प्रतिबंध को चुनौती दी थी। इसके बाद 2018 में सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संविधान पीठ ने 4:1 के बहुमत से सभी आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दे दी थी। उस फैसले के विरुद्ध दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर अब 9 जजों की बड़ी पीठ सुनवाई कर रही है।
अदालत की तीखी टिप्पणियाँ
संविधान पीठ की सदस्य जस्टिस बीवी नागरत्ना ने सख्त लहजे में कहा कि आजकल जनहित याचिकाएँ (PIL)