सबरीमाला मामला: सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की पीठ ने इंडियन लॉयर्स एसोसिएशन से पूछा — धार्मिक मुद्दों में दखल क्यों?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सबरीमाला मामला: सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की पीठ ने इंडियन लॉयर्स एसोसिएशन से पूछा — धार्मिक मुद्दों में दखल क्यों?

सारांश

सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की पीठ ने सबरीमाला सुनवाई में इंडियन लॉयर्स एसोसिएशन को आड़े हाथों लिया — सवाल उठाया कि वकीलों का संगठन धार्मिक मामलों में क्यों दखल दे रहा है। जस्टिस नागरत्ना ने PIL को 'प्राइवेट, पैसा और पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन' करार दिया।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय की 9 जजों की संविधान पीठ ने 5 मई 2026 को सबरीमाला मामले में इंडियन लॉयर्स एसोसिएशन से याचिका के औचित्य पर सवाल किए।
जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि PIL अब 'प्राइवेट, पैसा और पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन' बनती जा रही है।
2018 में 5 जजों की पीठ ने 4:1 बहुमत से सभी आयु की महिलाओं को मंदिर प्रवेश की अनुमति दी थी; उसी फैसले की पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई जारी है।
याचिकाकर्ता के वकील रवि प्रकाश गुप्ता ने पुजारी के उस बयान पर सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि भगवान अयप्पा को युवा महिलाएँ पसंद नहीं।
अदालत ने यह भी पूछा कि क्या संस्था ने याचिका दाखिल करने के लिए कोई औपचारिक प्रस्ताव पारित किया था; वकील ने माना कि ऐसा कोई प्रस्ताव उनकी जानकारी में नहीं था।

सर्वोच्च न्यायालय की 9 जजों की संविधान पीठ ने 5 मई 2026 को सबरीमाला मंदिर मामले की सुनवाई के दौरान मूल याचिकाकर्ता संस्था इंडियन लॉयर्स एसोसिएशन से कड़े सवाल किए। पीठ ने पूछा कि क्या याचिकाकर्ता देश के मुख्य पुजारी हैं, जो इस प्रकार के संवेदनशील धार्मिक मुद्दे को लेकर अदालत का दरवाज़ा खटखटाने पहुँचे हैं। अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह की जनहित याचिका कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग प्रतीत होती है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर लगी पारंपरिक रोक को चुनौती देने से जुड़ा है। इंडियन लॉयर्स एसोसिएशन ने सर्वप्रथम वर्ष 2006 में इस प्रतिबंध को चुनौती दी थी। इसके बाद 2018 में सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संविधान पीठ ने 4:1 के बहुमत से सभी आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दे दी थी। उस फैसले के विरुद्ध दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर अब 9 जजों की बड़ी पीठ सुनवाई कर रही है।

अदालत की तीखी टिप्पणियाँ

संविधान पीठ की सदस्य जस्टिस बीवी नागरत्ना ने सख्त लहजे में कहा कि आजकल जनहित याचिकाएँ (PIL)

संपादकीय दृष्टिकोण

पैसा और पब्लिसिटी' वाली टिप्पणी उस बढ़ती चिंता को दर्शाती है जो न्यायपालिका के भीतर भी पनप रही है कि जनहित याचिकाएँ कभी-कभी संस्थागत एजेंडे या मीडिया दृश्यता के लिए इस्तेमाल हो रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सबरीमाला जैसे धार्मिक मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाएँ खुद विद्वानों और न्यायविदों के बीच बहस का विषय हैं। सवाल यह भी है कि क्या अदालत इस सुनवाई में PIL की स्थिरता पर फैसला करेगी या 2018 के फैसले की समीक्षा पर ध्यान केंद्रित रखेगी — यही इस मामले का असली मोड़ होगा।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सबरीमाला मामले में 9 जजों की पीठ क्यों बनाई गई है?
2018 में 5 जजों की पीठ के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाएँ दायर की गई थीं, जिनमें व्यापक संवैधानिक प्रश्न उठाए गए थे। इन जटिल धार्मिक और मौलिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों की सुनवाई के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने 9 जजों की बड़ी संविधान पीठ गठित की।
इंडियन लॉयर्स एसोसिएशन ने सबरीमाला में याचिका क्यों दाखिल की थी?
इस संस्था ने 2006 में सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर लगी पारंपरिक रोक को संवैधानिक चुनौती दी थी। 5 मई 2026 की सुनवाई में अदालत ने इस पर सवाल उठाया कि वकीलों का संगठन धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार किस आधार पर रखता है।
जस्टिस बीवी नागरत्ना ने PIL पर क्या टिप्पणी की?
जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि आजकल जनहित याचिकाएँ 'पब्लिक इंटरेस्ट' की बजाय 'प्राइवेट, पैसा और पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन' बनती जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संस्था को युवा और ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली वकीलों की मदद करनी चाहिए।
2018 का सबरीमाला फैसला क्या था?
2018 में सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संविधान पीठ ने 4:1 के बहुमत से फैसला सुनाया था कि सभी आयु वर्ग की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश का अधिकार है। इस फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर अब 9 जजों की बड़ी पीठ सुनवाई कर रही है।
याचिकाकर्ता के वकील ने पुजारी के बयान पर क्या कहा?
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील रवि प्रकाश गुप्ता ने पुजारी के उस बयान को भगवान का अपमान बताया जिसमें कहा गया था कि भगवान अयप्पा को युवा महिलाएँ पसंद नहीं। उन्होंने तर्क दिया कि उनकी मुवक्किल पहले एक महिला हैं और ऐसे बयान से उनकी पहचान को ठेस पहुँचती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 4 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले