भाजपा ने नक्सली हिंसा के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया, विपक्ष ने उठाए सवाल
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा ने नक्सली हिंसा के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया।
- महुआ मोइत्रा ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए।
- संजय सिंह ने जवानों के साथ न्याय का मुद्दा उठाया।
- नक्सली हिंसा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती है।
- संसद में यह बहस राजनीतिक तनाव को बढ़ा सकती है।
नई दिल्ली, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बजट सत्र के दौरान लोकसभा में नक्सली हिंसा पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गरमागरम बहस हुई।
भाजपा सांसद संबित पात्रा ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के एक बयान का हवाला देते हुए माओवाद को भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह इस आंदोलन को हल्के में लेती रही है।
पात्रा ने प्रसिद्ध लेखिका अरुंधति रॉय के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने माओवादी समूहों को 'बंदूक वाले गांधीवादी' कहा था। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी सोच खतरे को सही तरीके से समझने में बाधा उत्पन्न करती है।
उन्होंने 2 अप्रैल 2010 को छत्तीसगढ़ में हुए हमले की याद दिलाई, जिसमें 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे। यह एक दिन में भारतीय सुरक्षा बलों पर होने वाला सबसे बड़ा हमला था।
पात्रा ने कहा कि कांग्रेस ने देश के साथ अन्याय किया है और उनकी नीतियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा में कमी लाने का काम किया है।
विपक्ष की ओर से तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने सरकारी आंकड़ों का हवाला दिया, जिसमें बताया गया कि माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में किलेबंद पुलिस स्टेशनों की संख्या 2014 में 66 से बढ़कर दिसंबर 2025 तक 586 हो गई है।
उन्होंने सरकार के इस दावे पर सवाल उठाया कि हालात सामान्य हो रहे हैं। उन्होंने पूछा कि यदि शांति बहाल हो गई है, तो सुरक्षा व्यवस्था क्यों बढ़ाई जा रही है?
वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि जवानों के साथ न्याय नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ और आईपीएस अधिकारियों के बीच पदोन्नति में समानता की सिफारिश की गई थी, लेकिन सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया।