सहारनपुर PNB नकली नोटकांड: NIA ने नीतू को दबोचा, अब तक 5 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 22 सितंबर 2026 को सहारनपुर के पंजाब नेशनल बैंक (PNB) करेंसी चेस्ट से ₹7.29 करोड़ के नकली नोट बरामद होने के मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान नीतू के रूप में हुई है, जो उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के थाना भगवानपुर क्षेत्र के गांव कुंजा बहादुरपुर का मूल निवासी है।
मुख्य घटनाक्रम
अधिकारियों के अनुसार, नीतू इस नकली करेंसी साजिश में पहले गिरफ्तार हो चुके मुख्य आरोपी आदेश चौधरी और अन्य प्रमुख आरोपियों का करीबी सहयोगी था। वह सहारनपुर, उत्तर प्रदेश स्थित पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट के माध्यम से नकली भारतीय नोटों के सर्कुलेशन की साजिश में सीधे तौर पर शामिल बताया जा रहा है।
यह मामला तब सामने आया जब 29 अगस्त 2026 को सहारनपुर के सदर बाजार पुलिस स्टेशन को PNB की करेंसी चेस्ट में ₹7.29 करोड़ के नकली भारतीय नोट मिले। जांच में बैंक के तीन कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई, जिन्हें बाद में बैंक प्रबंधन ने निलंबित कर दिया।
पिछली गिरफ्तारियाँ
NIA ने इससे पहले इस मामले में क्रमिक कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। एफआईआर में नामजद आरोपी अमित कुमार को 7 सितंबर को, मुख्य आरोपी आदेश चौधरी और मुकेश कुमार को 15 सितंबर को, और राजेंद्र को 20 सितंबर को हिरासत में लिया गया था। नीतू की गिरफ्तारी के साथ अब इस कांड में कुल 5 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।
प्रारंभ में यह मुकदमा 29 अगस्त को सहारनपुर के सदर बाजार थाने में तीन आरोपियों के खिलाफ दर्ज किया गया था। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े नकली करेंसी मामलों की संवेदनशीलता को देखते हुए NIA ने यह जांच अपने हाथ में ले ली।
जांच की स्थिति
NIA के अनुसार, पूरे षड्यंत्र की जड़ तक पहुँचने और शेष सह-आरोपियों तथा संदिग्धों की पहचान व गिरफ्तारी के लिए जांच अभी जारी है। यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि साजिश में बैंक कर्मचारियों की कथित भूमिका बताई जा रही है, जो देश की वित्तीय प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है।
आम जनता और बैंकिंग तंत्र पर असर
किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक की करेंसी चेस्ट से इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट बरामद होना एक असाधारण घटना है। गौरतलब है कि करेंसी चेस्ट भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की ओर से करेंसी के वितरण का माध्यम होती हैं, और इनकी सुरक्षा में सेंध से वित्तीय तंत्र की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगे चलकर करेंसी चेस्ट की निगरानी प्रणाली को और सख्त किए जाने की संभावना है।
जांच एजेंसियों के सामने अब यह पता लगाना प्रमुख चुनौती है कि नकली नोट कहाँ तैयार किए गए और इस नेटवर्क की भौगोलिक पहुँच कितनी है।