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सलमान खुर्शीद का बयान: आतंकवादी को मजहब से जोड़ना धर्म और खुद दोनों के साथ अन्याय

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सलमान खुर्शीद का बयान: आतंकवादी को मजहब से जोड़ना धर्म और खुद दोनों के साथ अन्याय

सारांश

कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने साफ कहा — आतंकवाद का किसी धर्म से कोई रिश्ता नहीं, और जो इसे जोड़ता है वह न धर्म समझता है, न आतंकवाद। उमर खालिद की जमानत, अल्पसंख्यक राजनीति और वंदे मातरम विवाद पर भी उनका बयान चर्चा में है।

मुख्य बातें

सलमान खुर्शीद ने 1 सितंबर को नई दिल्ली में कहा कि आतंकवादी को किसी मजहब से जोड़ना धर्म और स्वयं दोनों के साथ अन्याय है।
उन्होंने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम को 'आज नहीं तो कल' जमानत मिलेगी; मामला अब सर्वोच्च न्यायालय की बड़ी पीठ के सामने है।
राहुल गांधी का हवाला देते हुए खुर्शीद ने कहा कि कांग्रेस अल्पसंख्यक मुद्दों पर बोलने से नहीं हिचकती।
वंदे मातरम पर उन्होंने कहा कि परंपरागत रूप से दो पद गाने की रीत सर्वसमावेशी थी, उसमें बदलाव की ज़रूरत नहीं थी।
खुर्शीद के बयानों से आगामी चुनावों से पहले कांग्रेस के वैचारिक रुख के और मुखर होने के संकेत मिलते हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने मंगलवार, 1 सितंबर को नई दिल्ली में आतंकवाद और धर्म के संबंध पर एक स्पष्ट और तीखा बयान दिया, जिससे सियासी हलकों में नई बहस छिड़ने की संभावना है। उन्होंने कहा कि किसी आतंकवादी को किसी मजहब से जोड़ना न केवल उस धर्म के साथ, बल्कि स्वयं के साथ भी घोर अन्याय है।

आतंकवाद और मजहब पर खुर्शीद का रुख

सलमान खुर्शीद ने कहा, 'यह बात तो बहुत साफ है कि आतंकवाद का किसी मजहब या किसी धर्म से कोई ताल्लुक नहीं है। जो समझता है कि धर्म का ताल्लुक आतंकवाद से है, वह न तो धर्म को समझता है और न ही आतंकवाद को।' उन्होंने आगे जोड़ा कि आतंकवादी कभी धार्मिक हो ही नहीं सकता — वह सिर्फ आतंकवादी होता है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में सांप्रदायिक पहचान और आतंकवाद के बीच संबंध को लेकर राजनीतिक विमर्श लगातार तेज हो रहा है। गौरतलब है कि इस तरह के वक्तव्य अक्सर विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच तीखी नोकझोंक की वजह बनते हैं।

उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता से जब उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई टलने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि निचली अदालतों में बहस जारी है। उन्होंने याद दिलाया कि सर्वोच्च न्यायालय की एक पीठ ने पहले यह निर्देश दिया था कि 6 वर्ष पूरे होने पर जमानत पर विचार किया जाएगा। बाद में एक अन्य पीठ ने उस निर्देश पर सवाल उठाया और मामला अब बड़ी पीठ के समक्ष है। खुर्शीद ने कहा, 'आज नहीं तो कल, उन्हें जमानत मिल ही जाएगी।'

अल्पसंख्यक मुद्दों और कांग्रेस की रणनीति पर बयान

उत्तर प्रदेश चुनाव में कांग्रेस-समाजवादी पार्टी (सपा) गठबंधन द्वारा अल्पसंख्यक मुद्दों से दूरी बनाने के सवाल पर खुर्शीद ने कहा कि वे सपा की नीतियों पर टिप्पणी नहीं कर सकते। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) में किसी वर्ग को लेकर कोई झिझक नहीं है। उनके अनुसार, पार्टी दलितों, महिलाओं, पिछड़े वर्गों और मुसलमानों सहित हर उस तबके की बात करती है जिसे समाज में न्याय नहीं मिला।

उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का हवाला देते हुए कहा कि राहुल गांधी ने खुद कहा है — 'अल्पसंख्यक-अल्पसंख्यक क्यों कहते हैं, अगर मुसलमान की बात करनी है तो सीधे मुसलमान कहिए।' खुर्शीद ने यह भी कहा कि यदि किसी मुस्लिम महिला मतदाता को राहुल गांधी तक अपनी बात पहुँचानी हो, तो वे इसमें मदद करने को तैयार हैं।

वंदे मातरम विवाद पर खुर्शीद की सफाई

राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को लेकर उठे विवाद पर कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी दृष्टि में कोई विवाद है ही नहीं। उन्होंने कहा कि आधिकारिक समारोहों में सभी पद गाए जाने चाहिए, लेकिन परंपरागत रूप से केवल दो पद गाए जाते रहे हैं ताकि कोई यह न समझे कि यह किसी विशेष वर्ग के लिए है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह परंपरा इतने वर्षों से चली आ रही थी, तो उसमें बदलाव की आवश्यकता क्यों पड़ी।

आगे की राजनीतिक संभावनाएँ

खुर्शीद के इन बयानों से स्पष्ट है कि कांग्रेस आतंकवाद, न्यायिक प्रक्रिया और अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अपनी वैचारिक स्थिति को और मुखर करने की तैयारी में है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र यह बयानबाज़ी और तेज हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राजनीतिक समय-चयन पर सवाल उठना स्वाभाविक है — जब उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएँ न्यायालय में विचाराधीन हों, तब कांग्रेस का यह स्वर विपक्षी एकजुटता की रणनीति का हिस्सा भी पढ़ा जा सकता है। 'आतंकवाद का कोई मजहब नहीं' — यह वाक्य जितना नैतिक है, उतना ही राजनीतिक भी, और भारतीय जनता पार्टी (BJP) इसे अपने चुनावी आख्यान के विरुद्ध चुनौती के रूप में पेश करेगी। वंदे मातरम पर खुर्शीद का 'परंपरा में बदलाव क्यों' वाला तर्क कांग्रेस की उस पुरानी स्थिति को दोहराता है जो दशकों से विवाद का केंद्र रही है — पर इस बार संदर्भ अधिक ध्रुवीकृत है।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सलमान खुर्शीद ने आतंकवाद और धर्म पर क्या कहा?
सलमान खुर्शीद ने कहा कि आतंकवाद का किसी मजहब या धर्म से कोई संबंध नहीं है, और जो ऐसा मानता है वह न धर्म को समझता है, न आतंकवाद को। उनके अनुसार आतंकवादी को किसी धर्म से जोड़ना खुद और उस धर्म दोनों के साथ अन्याय है।
उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका पर खुर्शीद ने क्या कहा?
खुर्शीद ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय की एक पीठ ने 6 वर्ष पूरे होने पर जमानत पर विचार का निर्देश दिया था, लेकिन दूसरी पीठ ने उस पर प्रश्न उठाया और अब बड़ी पीठ सुनवाई करेगी। उन्होंने कहा कि 'आज नहीं तो कल, उन्हें जमानत मिल ही जाएगी।'
कांग्रेस की अल्पसंख्यक नीति पर खुर्शीद का क्या रुख है?
खुर्शीद ने कहा कि कांग्रेस में किसी वर्ग को लेकर कोई झिझक नहीं है और पार्टी दलितों, महिलाओं, पिछड़ों और मुसलमानों सहित हर कमज़ोर तबके की बात करती है। उन्होंने राहुल गांधी का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी 'अल्पसंख्यक' की जगह सीधे 'मुसलमान' कहने में संकोच नहीं करती।
वंदे मातरम विवाद पर कांग्रेस नेता का क्या कहना है?
सलमान खुर्शीद ने कहा कि उनकी नज़र में कोई विवाद है ही नहीं। परंपरागत रूप से आधिकारिक समारोहों में केवल दो पद गाए जाते रहे हैं ताकि यह सर्वसमावेशी रहे, और उन्होंने सवाल उठाया कि इतने वर्षों की इस परंपरा में बदलाव की क्या आवश्यकता थी।
सलमान खुर्शीद के ये बयान राजनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण हैं?
ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब आतंकवाद, न्यायिक प्रक्रिया और अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे चुनावी विमर्श के केंद्र में हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के वक्तव्य सत्तारूढ़ दल को विपक्ष पर हमले का अवसर देते हैं, जबकि कांग्रेस इसे अपनी वैचारिक स्पष्टता बताती है।
राष्ट्र प्रेस
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