'समाधान दीदी' AI चैटबॉट लॉन्च: 22 भाषाओं में शिकायत निवारण, जितेंद्र सिंह बोले — मालदीव-मॉरीशस ने दिखाई रुचि
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने नागरिकों की शिकायतों के त्वरित और प्रभावी समाधान के लिए 30 मई 2026 को नई दिल्ली में 'समाधान दीदी' नामक एआई-आधारित बहुभाषी चैटबॉट का शुभारंभ किया। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस पहल को सरकार की शिकायत निवारण प्रणाली को आम नागरिकों तक सुलभ बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया। यह चैटबॉट संविधान की सभी 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है।
समाधान दीदी: क्या है यह पहल
'समाधान दीदी' एक वॉयस-आधारित, बहुभाषी शिकायत पंजीकरण सहायक है, जिसमें एआई-आधारित स्मार्ट कैटेगराइजेशन की सुविधा दी गई है। नागरिक अपनी शिकायत आवाज़ या टेक्स्ट के ज़रिए विभिन्न भारतीय भाषाओं में दर्ज कर सकेंगे। चैटबॉट शिकायत का स्वतः विश्लेषण कर उसे संबंधित विभाग और श्रेणी में भेज देगा, जिससे नागरिकों को मंत्रालय या विभाग चुनने की जटिल प्रक्रिया से नहीं गुज़रना पड़ेगा।
भाषाई समावेश पर ज़ोर
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत भाषाई विविधता वाला देश है, इसलिए सरकारी सेवाओं और शिकायत निवारण प्लेटफ़ॉर्म को उन भाषाओं में उपलब्ध कराना ज़रूरी है जिनमें नागरिक सहज महसूस करते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार क्षेत्रीय और स्थानीय भाषाओं को भी इसमें शामिल करने की दिशा में काम कर रही है, जिससे व्यवस्था और अधिक समावेशी बनेगी।
शिकायतों की संख्या में ऐतिहासिक उछाल
डॉ. सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 से पहले जहाँ सालाना करीब 2 लाख शिकायतें दर्ज होती थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 25 से 30 लाख तक पहुँच गई है। उन्होंने इस बढ़ोतरी को लोगों के बढ़ते भरोसे, समयबद्ध कार्रवाई और बेहतर जवाबदेही का परिणाम बताया। गौरतलब है कि शिकायतों की संख्या में यह 15 गुना से अधिक की वृद्धि सरकारी पोर्टल की पहुँच और जागरूकता में आए बदलाव को भी दर्शाती है।
अंतरराष्ट्रीय रुचि: मालदीव, मॉरीशस और अफ्रीकी देश
डॉ. जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि मालदीव, मॉरीशस और अफ्रीका के कई देशों ने भारत की शिकायत निवारण प्रणाली में रुचि दिखाई है और इस मॉडल का अध्ययन करना चाहते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत की डिजिटल गवर्नेंस पहलें — जैसे UPI और CoWIN — पहले ही वैश्विक स्तर पर पहचान पा चुकी हैं। सरकार सोशल मीडिया के माध्यम से भी 'समाधान दीदी' का व्यापक प्रचार-प्रसार करेगी ताकि अधिक से अधिक नागरिक इसका लाभ उठा सकें।
आगे की राह
क्षेत्रीय और स्थानीय भाषाओं को शामिल करने की प्रक्रिया जारी है, जो इस प्लेटफ़ॉर्म की पहुँच को और व्यापक बनाएगी। यदि यह मॉडल अपेक्षाओं पर खरा उतरता है, तो भारत की डिजिटल गवर्नेंस की यह अगली कड़ी अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए द्वार खोल सकती है।