जगन्नाथ मंदिर के लिए 'समर्पण' डिजिटल हुंडी लॉन्च, रथ यात्रा से पहले CM मांझी की बड़ी पहल
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने बुधवार, 15 जुलाई 2026 को पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर के भक्तों के लिए 'समर्पण' नामक सुरक्षित डिजिटल हुंडी प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया, जो विश्वभर के श्रद्धालुओं को घर बैठे ऑनलाइन दान करने की सुविधा देता है। यह लॉन्च पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के कार्यालय में वार्षिक रथ यात्रा की पूर्व संध्या पर किया गया।
समर्पण प्लेटफॉर्म क्या है
यह डिजिटल हुंडी प्लेटफॉर्म राज्य के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत ओडिशा कंप्यूटर एप्लीकेशन सेंटर (OCAC) और SJTA द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म SJTA के आधिकारिक पोर्टल से एकीकृत है, जिससे भक्त पूर्ण सुरक्षा और पारदर्शिता के साथ दान कर सकते हैं। इसके अंतर्गत एक समर्पित वेब पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन दोनों विकसित किए गए हैं।
मुख्यमंत्री का वक्तव्य
इस अवसर पर मुख्यमंत्री मांझी ने कहा, 'डिजिटल हुंडी-समर्पण मात्र एक प्रौद्योगिकी-आधारित सुधार नहीं है — यह एक पवित्र और पारदर्शी सेतु है जो विश्वभर में लाखों जगन्नाथ भक्तों की भक्ति और समर्पण को श्री जगन्नाथ मंदिर से जोड़ता है।' उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल भगवान जगन्नाथ की समृद्ध परंपराओं को संरक्षित करने और मंदिर के समग्र विकास को गति देने में मील का पत्थर साबित होगी।
आम भक्तों पर असर
इस प्रणाली के माध्यम से भारत और विदेश में रहने वाले लाखों जगन्नाथ भक्त अब अपने घरों से आराम से दान दे सकेंगे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस प्लेटफॉर्म से प्राप्त दान का उपयोग श्री जगन्नाथ मंदिर के विकास और रखरखाव के लिए किया जाएगा। यह प्रणाली सरल, पारदर्शी और उपयोगकर्ता के अनुकूल बताई गई है।
रथ यात्रा और व्यापक संदर्भ
यह ऐतिहासिक पहल ऐसे समय में आई है जब पुरी रथ यात्रा — जो विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है — गुरुवार, 16 जुलाई से प्रारंभ होने वाली थी। गौरतलब है कि डिजिटल माध्यमों से मंदिर दान को जोड़ने की यह कोशिश ओडिशा सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत धार्मिक पर्यटन और श्रद्धालु सेवाओं को तकनीक से जोड़ा जा रहा है।
आगे की राह
राज्य सरकार के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में विकसित यह प्लेटफॉर्म अब सक्रिय है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था से मंदिर की आय में वृद्धि के साथ-साथ दान प्रक्रिया में जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। आने वाले समय में इस मॉडल को ओडिशा के अन्य प्रमुख मंदिरों तक विस्तारित किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।