19 सितंबर 2026
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दक्षिण बंगाल में RRTS नेटवर्क की माँग: समिक भट्टाचार्य ने मनोहर लाल को लिखा पत्र, 4 कॉरिडोर का प्रस्ताव

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दक्षिण बंगाल में RRTS नेटवर्क की माँग: समिक भट्टाचार्य ने मनोहर लाल को लिखा पत्र, 4 कॉरिडोर का प्रस्ताव

सारांश

राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने दक्षिण बंगाल में RRTS नेटवर्क की माँग उठाते हुए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखा है। कोलकाता को हब बनाते हुए 4 कॉरिडोर — कुल 604 किमी — का प्रस्ताव है, जो दिल्ली के नमो भारत मॉडल पर आधारित है।

मुख्य बातें

राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने 19 सितंबर 2026 को केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल को दक्षिण बंगाल में RRTS नेटवर्क स्थापित करने का अनुरोध करते हुए पत्र लिखा।
प्रस्ताव में कोलकाता के मैदान को केंद्रीय हब बनाते हुए 4 कॉरिडोर शामिल हैं — 135 किमी , 232 किमी , 102 किमी और 135 किमी ।
ट्रांजिट शोधकर्ता सौरदीप सरकार और आर्द्रि रॉय चौधरी की प्रारंभिक फिजिबिलिटी रिपोर्ट पत्र के साथ संलग्न की गई।
भूमि अधिग्रहण कम करने के लिए कॉरिडोर को मौजूदा हाईवे और रेलवे लाइनों के साथ बनाने का प्रस्ताव है।
NCRTC की तर्ज पर पश्चिम बंगाल रैपिड ट्रांजिट कॉर्पोरेशन (WBRTC) नाम से संयुक्त केंद्र-राज्य SPV बनाने की सिफारिश।
केंद्रीय मंत्रालय से विस्तृत फिजिबिलिटी स्टडी और पश्चिम बंगाल सरकार के साथ समन्वय का अनुरोध किया गया।

राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने 19 सितंबर 2026 को केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर दक्षिण बंगाल में रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) नेटवर्क स्थापित करने पर गंभीरता से विचार करने का अनुरोध किया है। इस पत्र के साथ उन्होंने दो ट्रांजिट शोधकर्ताओं द्वारा तैयार की गई एक प्रारंभिक फिजिबिलिटी रिपोर्ट भी संलग्न की है, जिसमें कोलकाता को केंद्र में रखते हुए चार प्रमुख कॉरिडोर की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।

मुख्य घटनाक्रम

भट्टाचार्य ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि पश्चिम बंगाल का शहरी विकास अब भी कोलकाता पर अत्यधिक केंद्रित है, जबकि दुर्गापुर, आसनसोल, खड़गपुर, कृष्णानगर और हल्दिया जैसे शहर बड़े औद्योगिक, शैक्षिक, बंदरगाह और पर्यटन केंद्रों के रूप में उभर चुके हैं। उनका कहना है कि इन शहरों के बीच आवाजाही अभी भी पारंपरिक रेल और सड़क मार्ग पर निर्भर है, जो भीड़भाड़ के कारण रोज़ाना की तेज़ और सुगम यात्रा के लिए नाकाफी साबित हो रही है।

उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) के नमो भारत कॉरिडोर का उदाहरण देते हुए कहा कि इसी तर्ज पर RRTS नेटवर्क बंगाल की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की खाई को पाट सकता है।

प्रस्तावित चार कॉरिडोर की रूपरेखा

ट्रांजिट शोधकर्ता सौरदीप सरकार और आर्द्रि रॉय चौधरी द्वारा तैयार फिजिबिलिटी रिपोर्ट में कोलकाता के मैदान को केंद्रीय हब बनाते हुए चार कॉरिडोर का प्रस्ताव है:

कॉरिडोर-1: कोलकाता से कल्याणी–कृष्णानगर–मायापुर तक, कुल लंबाई 135 किमी
कॉरिडोर-2: कोलकाता से बर्दवान–दुर्गापुर–आसनसोल तक, कुल लंबाई 232 किमी; इसमें आसनसोल मेट्रो भी शामिल।
कॉरिडोर-3: फल्टा–डायमंड हार्बर–हल्दिया तक, कुल 102 किमी; मैदान से बज-बज तक मेट्रो सेवा सहित।
कॉरिडोर-4: संतरागाछी–कोलाघाट–खड़गपुर–मेदिनीपुर तक, कुल 135 किमी

इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट में दुर्गापुर और आसनसोल के लिए अलग-अलग मेट्रो प्रणाली का भी प्रस्ताव किया गया है।

भूमि अधिग्रहण की चुनौती और SPV का सुझाव

रिपोर्ट में यह भी ध्यान दिया गया है कि प्रस्तावित कॉरिडोर को मौजूदा हाईवे और रेलवे लाइनों के साथ-साथ बनाया जाएगा, ताकि भूमि अधिग्रहण न्यूनतम रहे। साथ ही, NCRTC की तर्ज पर पश्चिम बंगाल रैपिड ट्रांजिट कॉर्पोरेशन (WBRTC) नाम से एक विशेष प्रयोजन वाहन (Special Purpose Vehicle) गठित करने की सिफारिश की गई है, जिसका स्वामित्व केंद्र और राज्य सरकार के बीच संयुक्त रूप से होगा।

सरकार से क्या माँग की गई

भट्टाचार्य ने केंद्रीय मंत्रालय से अनुरोध किया है कि इस प्रस्ताव की जाँच की जाए और यदि उपयुक्त पाया जाए, तो पश्चिम बंगाल सरकार के साथ समन्वय करते हुए इंजीनियरिंग, माँग पूर्वानुमान और वित्तीय विश्लेषण को समाहित करते हुए विस्तृत फिजिबिलिटी स्टडी कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ज़रूरत पड़ने पर वे रिपोर्ट के लेखकों के साथ बैठक आयोजित करने में सहयोग देने को तैयार हैं।

आगे क्या होगा

यह पत्र फिलहाल प्रस्ताव के स्तर पर है और केंद्रीय मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर की सफलता के बाद कई राज्य इसी तर्ज पर अपने क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क विकसित करने की दिशा में पहल कर रहे हैं। यदि केंद्र इस प्रस्ताव को स्वीकृति देता है, तो यह पश्चिम बंगाल में शहरी परिवहन का सबसे बड़ा विस्तार हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली बाधा राजनीतिक नहीं, संस्थागत है — पश्चिम बंगाल और केंद्र सरकार के बीच वित्तीय और प्रशासनिक सहयोग की परंपरा अब तक बेहद कमज़ोर रही है। RRTS जैसे बड़े बुनियादी ढाँचे के लिए राज्य की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है, और तृणमूल कांग्रेस सरकार का रुख अभी तक स्पष्ट नहीं है। दिल्ली-मेरठ RRTS ने यह साबित किया है कि मॉडल काम करता है, पर वहाँ केंद्र-राज्य समन्वय अपेक्षाकृत सहज था। बिना राज्य सरकार की सहमति और SPV में स्पष्ट हिस्सेदारी के, यह प्रस्ताव महज़ एक दस्तावेज़ बनकर रह सकता है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दक्षिण बंगाल RRTS नेटवर्क का प्रस्ताव क्या है?
राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने कोलकाता के मैदान को केंद्रीय हब बनाते हुए चार RRTS कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा है — कल्याणी-मायापुर (135 किमी), बर्दवान-आसनसोल (232 किमी), डायमंड हार्बर-हल्दिया (102 किमी) और खड़गपुर-मेदिनीपुर (135 किमी)। यह प्रस्ताव दिल्ली के नमो भारत कॉरिडोर मॉडल पर आधारित है।
समिक भट्टाचार्य ने मनोहर लाल से क्या माँग की है?
उन्होंने केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल से अनुरोध किया है कि प्रस्ताव की जाँच की जाए और पश्चिम बंगाल सरकार के साथ मिलकर इंजीनियरिंग, माँग पूर्वानुमान व वित्तीय विश्लेषण पर आधारित विस्तृत फिजिबिलिटी स्टडी कराई जाए।
WBRTC क्या है और इसे क्यों बनाने का सुझाव दिया गया है?
WBRTC यानी पश्चिम बंगाल रैपिड ट्रांजिट कॉर्पोरेशन एक प्रस्तावित विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) है, जिसका स्वामित्व केंद्र और राज्य सरकार के पास संयुक्त रूप से होगा। यह NCRTC की तरह ही परियोजना के क्रियान्वयन और संचालन की देखरेख करेगा।
इस प्रस्ताव में भूमि अधिग्रहण की समस्या कैसे सुलझाई गई है?
रिपोर्ट के अनुसार, कॉरिडोर को मौजूदा हाईवे और रेलवे लाइनों के साथ-साथ बनाया जाएगा ताकि भूमि अधिग्रहण न्यूनतम रहे। यह तरीका जमीन विवादों और लागत दोनों को घटाने में सहायक माना जाता है।
क्या केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अब तक केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह प्रस्ताव अभी प्रारंभिक फिजिबिलिटी रिपोर्ट के स्तर पर है और आगे की कार्यवाही मंत्रालय के विवेक पर निर्भर है।
राष्ट्र प्रेस
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