सीएम मोहन यादव: सनातन संस्कृति में न्याय के मूल, जबलपुर में मुख्य न्यायाधीश कोगजे का अभिनंदन
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 30 अक्टूबर 2026 को जबलपुर में कहा कि भारत की न्याय परंपरा केवल संवैधानिक ढाँचे तक सीमित नहीं है, बल्कि सनातन संस्कृति, साहित्य और सामाजिक जीवन में न्याय के आदर्श सदियों से गहराई से रचे-बसे हैं। वे महाधिवक्ता कार्यालय द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे, जिसमें स्वयं उनका तथा मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे का स्वागत किया गया।
न्याय का सांस्कृतिक आधार
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की कालजयी कहानी 'पंच परमेश्वर' से लेकर 'मदर इंडिया' जैसी फिल्मों तक — भारतीय समाज हमेशा से न्याय, नैतिकता और कर्तव्य को सर्वोच्च मानता आया है। उन्होंने कहा कि यह केवल साहित्यिक उदाहरण नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि न्याय की भावना भारतीय जनमानस में स्वाभाविक रूप से समाई हुई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आपातकाल जैसे कठिन दौर में भी न्यायपालिका की भूमिका और उसके ऐतिहासिक फैसले देश के लोकतांत्रिक इतिहास में मील के पत्थर बने रहे। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब पड़ोसी देशों — नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान — में राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल बनी हुई है।
पुराने कानूनों की समाप्ति और नई व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने औपनिवेशिक काल के पुराने कानूनों को हटाकर समयानुकूल नए कानून लागू किए हैं। उन्होंने जानकारी दी कि मध्य प्रदेश सरकार ने भी राज्य स्तर पर 900 से अधिक अनुपयोगी कानून समाप्त किए हैं, जिनकी वर्तमान परिस्थितियों में कोई प्रासंगिकता नहीं रह गई थी।
उन्होंने कहा कि शासन व्यवस्था को नागरिक-अनुकूल और समयानुकूल बनाने की दिशा में यह एक ठोस कदम है। गौरतलब है कि न्यायिक सुधारों की इस श्रृंखला का उद्देश्य लंबित मामलों का बोझ कम करना और त्वरित न्याय सुनिश्चित करना है।
बार और बेंच के बीच संबंध
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे ने समारोह में कहा कि बार और बेंच न्याय प्रशासन के दो अनिवार्य स्तंभ हैं। उनके अनुसार, दोनों की भूमिकाएँ अलग-अलग हैं, लेकिन अंतिम लक्ष्य एक ही है — संविधान की रक्षा, नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा और बिना भय या पक्षपात के निष्पक्ष न्याय।
न्यायमूर्ति कोगजे ने कहा कि बार और बेंच के बीच संबंध आपसी सम्मान, संस्थागत स्वतंत्रता और विधि के शासन के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने महाधिवक्ता प्रशांत सिंह की भूमिका की सराहना की और महाधिवक्ता कार्यालय को एक 'विश्वविद्यालय' की संज्ञा दी, जहाँ अधिवक्ता व्यापक अनुभव और व्यावसायिक दक्षता अर्जित करते हैं।
लोकतंत्र और न्यायपालिका की भूमिका
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि जबलपुर केवल संस्कारधानी नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की उपस्थिति के कारण 'न्यायधानी' भी है। उन्होंने कहा कि न्याय के प्रति प्रतिबद्धता और संवैधानिक मूल्यों का सम्मान ही लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव है।
महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कहा कि न्यायपालिका और विधायिका के समन्वय से ही प्रत्येक नागरिक को सहज, त्वरित और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है। न्यायमूर्ति विवेक रुसिया ने जबलपुर में अपने वकालत के अनुभव साझा करते हुए इस पेशे की पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही परंपरा का उल्लेख किया।
समारोह में उपस्थित प्रमुख जन
अभिनंदन समारोह में न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह, राज्यसभा सदस्य सुमित्रा वाल्मीकि, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, सांसद आशीष दुबे, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल सहित बड़ी संख्या में न्यायाधीश, अधिवक्ता और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। समारोह में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष मृगेन्द्र सिंह, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शशांक शेखर सिंह, सीनियर एडवोकेट काउंसिल के अध्यक्ष मोहन शर्मा और जिला बार एसोसिएशन जबलपुर के अध्यक्ष मनीष मिश्रा का भी अभिनंदन किया गया।
मुख्यमंत्री यादव ने न्यायमूर्ति कोगजे को न्यायधानी जबलपुर में उनके आगमन पर शुभकामनाएँ दीं और विश्वास जताया कि उनके कार्यकाल में प्रदेश में और उत्कृष्ट न्याय परंपरा स्थापित होगी।