रक्षाबंधन पर रांची में जवानों संग रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, राखी बांधकर बढ़ाया सैनिकों का हौसला
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 28 अगस्त 2026 को रांची में रक्षाबंधन का पर्व भारतीय सेना के जवानों के साथ मनाया। उन्होंने जवानों को राखी बांधी, उनसे संवाद किया और इस भावपूर्ण अवसर पर राष्ट्र एवं उसके रक्षकों के बीच के अटूट बंधन को और प्रगाढ़ किया।
जवानों के साथ रक्षाबंधन का आत्मीय पल
रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक एक्स हैंडल पर इस कार्यक्रम की जानकारी साझा की गई। पोस्ट में कहा गया कि संजय सेठ ने जवानों को राखी बांधकर उनसे बातचीत की और उनके साथ आत्मीय पल बिताए, जिससे देश और उसके बहादुर रक्षकों के बीच विश्वास, स्नेह और कृतज्ञता के बंधन को नई ऊर्जा मिली।
स्वयं संजय सेठ ने भी एक्स पर इस अवसर की तस्वीरें और अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने लिखा कि रांची में भारतीय सेना के वीर जवानों के साथ समय बिताना उनके लिए सौभाग्य की बात रही और यह अवसर राष्ट्र की रक्षा में सदैव तत्पर सैनिकों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। उन्होंने जोड़ा, 'हमारे जवानों का समर्पण और साहस ही देश की सुरक्षा और शक्ति का आधार है।'
आंचल आश्रम के बच्चों संग भावुक पल
सेना के जवानों के साथ रक्षाबंधन मनाने के बाद संजय सेठ आंचल आश्रम पहुँचे, जहाँ उन्होंने उन बच्चों के साथ पर्व की खुशियाँ साझा कीं जिनके सिर पर माता-पिता का साया नहीं है।
इस अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने एक्स पर लिखा कि आंचल आश्रम के बच्चों से राखी बंधवाना उनके लिए अत्यंत भावुक और अविस्मरणीय क्षण रहा। उन्होंने कहा, 'रिश्ते केवल रक्त से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और संवेदनाओं से भी बनते हैं।' इस अवसर पर झारखंड विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष चंद्रकांत रायपत भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
सरकार की प्रतिक्रिया और संदेश
यह आयोजन केवल एक सांकेतिक समारोह नहीं था — यह केंद्र सरकार के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसमें नागरिक नेतृत्व और सशस्त्र बलों के बीच सामाजिक और भावनात्मक जुड़ाव को बढ़ावा दिया जाता है। रक्षा मंत्रालय ने इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय एकजुटता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया।
आगे क्या
रक्षाबंधन जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर सैन्य जवानों के साथ जनप्रतिनिधियों का यह जुड़ाव सशस्त्र बलों के मनोबल को ऊँचा रखने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जाता है। आंचल आश्रम जैसी संस्थाओं के साथ इस तरह के संवाद से समाज के वंचित वर्ग तक भी त्योहार की उष्मा पहुँचती है।