1 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बेरोजगारी दर 11 महीने के उच्चतम स्तर पर: जीतू पटवारी ने सरकार के विकास मॉडल को बताया 'कागजी'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बेरोजगारी दर 11 महीने के उच्चतम स्तर पर: जीतू पटवारी ने सरकार के विकास मॉडल को बताया 'कागजी'

सारांश

NSO के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार मई 2025 में बेरोज़गारी दर 11 महीने के उच्चतम स्तर 5.5% पर पहुँची। कांग्रेस के मध्य प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे सरकार के 'कागजी विकास मॉडल' की असलियत बताते हुए 2014 के 2 करोड़ रोज़गार के वादे की याद दिलाई।

मुख्य बातें

मई 2025 में देश की बेरोज़गारी दर बढ़कर 5.5 प्रतिशत हुई — 11 महीनों का सबसे ऊँचा स्तर।
लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट 55% से घटकर 54.4% पर आया; रोज़गार अनुपात 51.4% पर।
कांग्रेस के मध्य प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने NSO के आँकड़ों का हवाला देते हुए सरकार पर निशाना साधा।
BJP ने 2014 में हर साल 2 करोड़ रोज़गार देने का वादा किया था — पटवारी ने इसे याद दिलाया।
पटवारी के अनुसार, पेपर लीक और संविदा भर्ती युवाओं के स्थायी रोज़गार की संभावनाएँ घटा रहे हैं।

कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 16 जून 2025 को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश का विकास मॉडल जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। उन्होंने राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के ताज़ा आँकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सरकार केवल आँकड़ों की बाजीगरी में लगी है, जबकि युवा रोज़गार की तलाश में भटक रहे हैं।

NSO के आँकड़े क्या कहते हैं

पटवारी ने सोशल मीडिया पर साझा किए अपने बयान में कहा कि मई 2025 में देश की बेरोज़गारी दर बढ़कर 5.5 प्रतिशत हो गई, जो 11 महीनों का सबसे ऊँचा स्तर है। उनके अनुसार, NSO के आँकड़े सरकार के दावों की पोल खोलते हैं।

आँकड़ों के अनुसार, लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) भी 55 प्रतिशत से घटकर 54.4 प्रतिशत पर आ गया है। इसके साथ ही रोज़गार-जनसंख्या अनुपात गिरकर महज 51.4 प्रतिशत रह गया है। पटवारी ने कहा कि काम की तलाश करने वालों की संख्या में आई यह गिरावट दर्शाती है कि युवाओं का रोज़गार मिलने से भरोसा टूट चुका है।

2014 के चुनावी वादों पर सवाल

कांग्रेस के मध्य प्रदेश अध्यक्ष ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 2014 लोकसभा चुनाव से पहले किए गए वादों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि यह वही सरकार है जिसने हर साल 2 करोड़ रोज़गार देने का वादा बार-बार दोहराया, लेकिन आज की स्थिति इसके उलट है।

गौरतलब है कि रोज़गार सृजन का मुद्दा पिछले एक दशक से राजनीतिक बहस के केंद्र में रहा है, और विपक्ष इसे सत्ता पक्ष के खिलाफ एक प्रमुख हथियार के रूप में उठाता रहा है।

युवाओं की स्थिति पर चिंता

पटवारी ने कहा कि जब अर्थव्यवस्था में वृद्धि और रिकॉर्ड निवेश के दावे हो रहे हैं, तो युवाओं के लिए नौकरियाँ कहाँ हैं? उनके अनुसार, युवा डिग्रियाँ लेकर भटक रहे हैं, प्रतियोगी परीक्षाएँ पेपर लीक की भेंट चढ़ रही हैं और संविदा भर्ती स्थायी रोज़गार की जगह ले रही है।

उन्होंने कहा, 'सरकार की सबसे बड़ी विफलता महंगाई नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों की हत्या है।' आलोचकों का कहना है कि GDP वृद्धि के दावों और वास्तविक रोज़गार सृजन के बीच की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है।

आगे क्या

NSO के इन आँकड़ों के सार्वजनिक होने के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से रोज़गार नीति पर श्वेतपत्र जारी करने की माँग तेज कर दी है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में कई राज्यों में विधानसभा चुनावों की तैयारी चल रही है और रोज़गार एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो विपक्ष को एक ठोस तथ्यात्मक आधार देता है — केवल राजनीतिक आरोप नहीं। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या LFPR और बेरोज़गारी दर की यह गिरावट संरचनात्मक विफलता है या चक्रीय उतार-चढ़ाव — इसका जवाब बिना दीर्घकालिक श्रम बाज़ार सुधारों की समीक्षा के नहीं दिया जा सकता। GDP वृद्धि और रोज़गार सृजन के बीच की यह खाई 'जॉबलेस ग्रोथ' की बहस को फिर से केंद्र में लाती है, जो 2016 से भारतीय अर्थशास्त्रियों के बीच चर्चा का विषय रही है। संविदा भर्ती और पेपर लीक के मुद्दे केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि युवाओं के संस्थानों पर घटते भरोसे के संकेत हैं — जो किसी भी सरकार के लिए दीर्घकालिक राजनीतिक जोखिम है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मई 2025 में भारत की बेरोज़गारी दर कितनी रही?
NSO के आँकड़ों के अनुसार, मई 2025 में देश की बेरोज़गारी दर बढ़कर 5.5 प्रतिशत हो गई, जो 11 महीनों का सबसे ऊँचा स्तर है। इस दौरान काम की तलाश करने वालों की संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई।
लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट में क्या बदलाव आया?
NSO के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट 55 प्रतिशत से घटकर 54.4 प्रतिशत पर आ गया है। रोज़गार-जनसंख्या अनुपात भी गिरकर 51.4 प्रतिशत रह गया है।
जीतू पटवारी ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस के मध्य प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार का विकास मॉडल सिर्फ कागजी है और सरकार आँकड़ों की बाजीगरी में व्यस्त है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक, संविदा भर्ती और युवाओं में बढ़ती निराशा सरकार की सबसे बड़ी विफलता है।
BJP ने 2014 में रोज़गार को लेकर क्या वादा किया था?
2014 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP ने हर साल 2 करोड़ रोज़गार देने का वादा किया था, जिसे बाद में बार-बार दोहराया गया। पटवारी ने NSO के मौजूदा आँकड़ों के संदर्भ में इस वादे का उल्लेख करते हुए सरकार को घेरा।
NSO के इन आँकड़ों का राजनीतिक महत्व क्या है?
ये आँकड़े ऐसे समय में आए हैं जब कई राज्यों में चुनावी तैयारियाँ चल रही हैं और रोज़गार एक प्रमुख मुद्दा बन रहा है। विपक्षी दलों ने इन आँकड़ों के आधार पर सरकार से रोज़गार नीति पर श्वेतपत्र जारी करने की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले