यूसीसी विधेयक पर जीतू पटवारी का हमला: 'भ्रष्टाचार और बेरोज़गारी से ध्यान भटकाने की चाल'
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश विधानसभा में मोहन यादव सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश किए जाने के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 21 जुलाई को इस कदम की कड़ी आलोचना की। पटवारी ने इस विधेयक को भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोज़गारी जैसे ज़मीनी मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की राजनीतिक चाल करार दिया।
मुख्य आरोप: मुद्दों से पलायन
संवाददाताओं से बातचीत में पटवारी ने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार अपनी सारी सीमाएँ पार कर चुका है। उनके अनुसार, मध्य प्रदेश की जनता एक साथ महंगाई, बेरोज़गारी, किसानों की दुर्दशा और प्रशासनिक भ्रष्टाचार की मार झेल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार इन्हीं असुविधाजनक सवालों से बचने के लिए यूसीसी को राजनीतिक प्रोपेगेंडा के रूप में पेश कर रही है।
माफिया राज का आरोप
पटवारी ने दावा किया कि प्रदेश में कोई भी मंत्री ईमानदारी से काम करने का दावा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि शराब माफिया, रेत माफिया, शिक्षा माफिया और खनिज माफिया का बोलबाला है, और इनका प्रभाव सत्ता के सर्वोच्च स्तर तक दिखाई देता है। उनके अनुसार पूरी व्यवस्था इन्हीं माफिया के हित में संचालित होती नज़र आती है।
किसानों से वादाखिलाफी का आरोप
पटवारी ने BJP को उसकी 'मोदी गारंटी' की याद दिलाते हुए कहा कि चुनाव से पहले किसानों से गेहूँ ₹2,700 प्रति क्विंटल, धान ₹3,100 प्रति क्विंटल, सोयाबीन ₹6,000 प्रति क्विंटल और मूँगफली ₹6,200 प्रति क्विंटल पर खरीद का वादा किया गया था। उनका आरोप है कि आज तक किसानों को इन वादों के अनुरूप मूल्य नहीं मिला और सरकार ने उनसे मुँह मोड़ लिया है।
24 जुलाई को किसान आंदोलन का ऐलान
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने घोषणा की कि किसानों के अधिकारों और वादाखिलाफी के विरोध में 24 जुलाई को हरदा, होशंगाबाद और नरसिंहपुर में कांग्रेस व्यापक किसान आंदोलन चलाएगी। उन्होंने कहा कि किसानों की आवाज़ सड़क से सदन तक बुलंद की जाएगी।
श्वेत पत्र की माँग
पटवारी ने राज्य सरकार से माँग की कि वह मध्य प्रदेश की वर्तमान आर्थिक स्थिति, कृषि और किसानों की वास्तविक दशा, शिक्षा और रोज़गार की स्थिति, करोड़ों रुपये खर्च कर आयोजित इन्वेस्टर मीट के वास्तविक परिणामों तथा प्रदेश में फैले भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर एक श्वेत पत्र जारी करे। यह माँग ऐसे समय में आई है जब राज्य में यूसीसी को लेकर राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है।