'सवुक्कु' शंकर की रिहाई का आदेश, तमिलनाडु सलाहकार बोर्ड ने नहीं पाए हिरासत के पर्याप्त आधार

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'सवुक्कु' शंकर की रिहाई का आदेश, तमिलनाडु सलाहकार बोर्ड ने नहीं पाए हिरासत के पर्याप्त आधार

सारांश

तीसरी बार — और हर बार बोर्ड या अदालत ने हिरासत को अपर्याप्त पाया। 'सवुक्कु' शंकर का मामला तमिलनाडु में प्रिवेंटिव डिटेंशन कानून के इस्तेमाल और डिजिटल पत्रकारों की कानूनी सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाता है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु सरकार ने 19 मई 2026 को यूट्यूबर-पत्रकार 'सवुक्कु' शंकर की तत्काल रिहाई का आदेश जारी किया।
राज्य सलाहकार बोर्ड ने तमिलनाडु प्रिवेंटिव डिटेंशन एक्ट, 1982 की धारा 10 के तहत सर्वसम्मति से पाया कि हिरासत जारी रखने के पर्याप्त आधार नहीं हैं।
यह तीसरी बार है जब शंकर की निरोधात्मक हिरासत रद्द की गई; पहली बार अगस्त 2024 में मद्रास उच्च न्यायालय ने खारिज किया था।
शंकर को 8 अप्रैल 2026 को आंध्र प्रदेश के ओंगोल से गिरफ्तार किया गया था; हत्या प्रयास मामले में मद्रास उच्च न्यायालय पहले ही जमानत दे चुका है।
रिहाई की शर्त — शंकर किसी अन्य मामले में हिरासत में या सजायाफ्ता न हों।

तमिलनाडु सरकार ने 19 मई 2026 को यूट्यूबर और पत्रकार ए. शंकर उर्फ 'सवुक्कु' शंकर की तत्काल रिहाई का आदेश जारी किया। राज्य सलाहकार बोर्ड ने तमिलनाडु प्रिवेंटिव डिटेंशन एक्ट, 1982 की धारा 10 के तहत समीक्षा के बाद सर्वसम्मति से पाया कि उनकी निरोधात्मक हिरासत जारी रखने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार मौजूद नहीं हैं।

सलाहकार बोर्ड की समीक्षा और आदेश

बोर्ड ने हिरासत में लेने वाली एजेंसी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की विस्तृत जाँच की और शंकर की मौखिक दलीलें भी सुनीं। सरकारी आदेश में स्पष्ट किया गया कि शंकर को तुरंत रिहा किया जाए, बशर्ते वह किसी अन्य मामले में हिरासत में न हों या किसी सजा के तहत कारावास में न हों। राज्य सरकार ने बोर्ड की सिफारिश स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया।

तीसरी बार रद्द हुई निरोधात्मक हिरासत

यह तीसरा अवसर है जब शंकर के विरुद्ध लगाई गई निरोधात्मक हिरासत रद्द की गई है। इससे पहले अगस्त 2024 में मद्रास उच्च न्यायालय ने उनकी पहली निरोधात्मक हिरासत को खारिज किया था। उसके तुरंत बाद थेनी जिले में एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में उन्हें पुनः हिरासत में ले लिया गया था।

ओंगोल गिरफ्तारी और हत्या प्रयास का मामला

हाल की घटनाओं के अनुसार, शंकर को 8 अप्रैल 2026 को आंध्र प्रदेश के ओंगोल से गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि चेन्नई लाए जाने के दौरान उन्होंने पुलिस एस्कॉर्ट टीम पर पथराव किया, जिसके बाद हत्या के प्रयास से संबंधित मामला दर्ज किया गया। पिछले सप्ताह मद्रास उच्च न्यायालय ने जाँच में हुई प्रगति को देखते हुए उन्हें इस मामले में जमानत दे दी थी।

राजनीतिक और सार्वजनिक प्रतिक्रिया

शंकर की बार-बार की गिरफ्तारी और हिरासत ने तमिलनाडु में प्रेस स्वतंत्रता और निरोधात्मक कानूनों के दुरुपयोग पर राजनीतिक बहस को हवा दी है। आलोचकों का कहना है कि प्रिवेंटिव डिटेंशन एक्ट का उपयोग असहमत आवाज़ों को दबाने के लिए किया जा रहा है, जबकि सरकार का पक्ष रहा है कि कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप थी।

आगे की राह

निरोधात्मक हिरासत रद्द होने के बाद शंकर की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। हालाँकि, उनके विरुद्ध दर्ज अन्य आपराधिक मामले अभी भी न्यायालय में विचाराधीन हो सकते हैं। यह मामला तमिलनाडु में डिजिटल पत्रकारों और यूट्यूबर्स की कानूनी सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'सवुक्कु' शंकर की रिहाई का आदेश क्यों जारी हुआ?
तमिलनाडु राज्य सलाहकार बोर्ड ने प्रिवेंटिव डिटेंशन एक्ट, 1982 की धारा 10 के तहत समीक्षा में सर्वसम्मति से पाया कि शंकर की निरोधात्मक हिरासत जारी रखने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार नहीं हैं। इसके बाद राज्य सरकार ने बोर्ड की सिफारिश स्वीकार करते हुए 19 मई 2026 को रिहाई का आदेश जारी किया।
यह कितनी बार हुआ है कि शंकर की निरोधात्मक हिरासत रद्द की गई?
यह तीसरी बार है। पहली बार अगस्त 2024 में मद्रास उच्च न्यायालय ने हिरासत खारिज की थी, दूसरी बार थेनी जिले के एनडीपीएस मामले के बाद हुई हिरासत रद्द हुई, और अब तीसरी बार राज्य सलाहकार बोर्ड ने हिरासत समाप्त करने की सिफारिश की है।
शंकर को सबसे हाल में कब और कहाँ गिरफ्तार किया गया था?
शंकर को 8 अप्रैल 2026 को आंध्र प्रदेश के ओंगोल से गिरफ्तार किया गया था। चेन्नई लाए जाने के दौरान पुलिस एस्कॉर्ट टीम पर पथराव के आरोप में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया, जिसमें मद्रास उच्च न्यायालय ने बाद में जमानत दे दी।
क्या रिहाई आदेश के बाद शंकर पूरी तरह स्वतंत्र हो जाएँगे?
रिहाई आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शंकर को तभी छोड़ा जाएगा जब वह किसी अन्य मामले में हिरासत में न हों या किसी सजा के तहत जेल में न हों। उनके विरुद्ध दर्ज अन्य आपराधिक मामले अभी भी न्यायालय में विचाराधीन हो सकते हैं।
तमिलनाडु प्रिवेंटिव डिटेंशन एक्ट, 1982 क्या है?
यह एक राज्य कानून है जो सरकार को सार्वजनिक व्यवस्था या राज्य सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के हिरासत में रखने का अधिकार देता है। इसकी धारा 10 के तहत राज्य सलाहकार बोर्ड हिरासत के आधारों की समीक्षा करता है और सरकार को सिफारिश देता है।
राष्ट्र प्रेस
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