10 अगस्त 2026
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स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के नए दिशा-निर्देश जारी: धर्मेंद्र प्रधान ने कक्षा 12 तक सभी स्कूलों में SMC अनिवार्य की

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स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के नए दिशा-निर्देश जारी: धर्मेंद्र प्रधान ने कक्षा 12 तक सभी स्कूलों में SMC अनिवार्य की

सारांश

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के नए दिशा-निर्देश जारी कर कक्षा 12 तक सभी विद्यालयों में SMC अनिवार्य कर दी है। 75% सदस्य अभिभावक होंगे, प्रधानाचार्य सदस्य-सचिव बनेंगे और वित्तीय पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया है — यह NEP 2020 के जमीनी क्रियान्वयन की दिशा में एक ठोस कदम है।

मुख्य बातें

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 6 मई 2026 को SMC के नए दिशा-निर्देश जारी किए।
कक्षा 12 तक के सभी विद्यालयों में SMC का गठन अनिवार्य; यह विद्यालय प्रबंधन विकास समिति की जगह लेगी।
SMC के कुल सदस्यों का 75% अभिभावक होंगे; विद्यालय प्रधानाचार्य सदस्य-सचिव होंगे।
छात्र संख्या के आधार पर सदस्य संख्या: 100 तक — 12-15, 100-500 — 15-20, 500 से अधिक — 20-25।
चुनाव के दौरान कम से कम 50% अभिभावकों की उपस्थिति अनिवार्य; शैक्षणिक वर्ष के एक महीने के भीतर गठन सुनिश्चित करना होगा।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 6 मई 2026 को नई दिल्ली में स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए, जिनका उद्देश्य देशभर के विद्यालयों में सामुदायिक भागीदारी को सुदृढ़ करना और स्कूल प्रबंधन को अधिक प्रभावी व जवाबदेह बनाना है। इन दिशा-निर्देशों के तहत कक्षा 12 तक के सभी विद्यालयों में SMC का गठन अनिवार्य किया गया है। यह कदम विद्यालय प्रबंधन विकास समिति की जगह लेगा और स्थानीय स्तर पर निर्णय-प्रक्रिया को नई दिशा देगा।

SMC की मुख्य जिम्मेदारियाँ

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, SMC को विद्यालय की विकास योजना तैयार करने, शैक्षणिक गुणवत्ता की निगरानी करने, वित्तीय प्रबंधन और सामाजिक लेखा परीक्षण सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं के समन्वय से संसाधनों का उपयोग करना और नियमित बैठकें आयोजित कर पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया अपनाना भी इस समिति के दायरे में आएगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि इससे विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

समिति की संरचना और सदस्य संख्या

SMC में अभिभावक, स्थानीय प्राधिकरण के प्रतिनिधि, शिक्षक, शिक्षाविद् और विषय विशेषज्ञ, पूर्व विद्यार्थी, वंचित समूहों के प्रतिनिधि तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शामिल होंगे। विद्यालय के प्रधानाचार्य को समिति का सदस्य-सचिव बनाया गया है। सदस्य संख्या छात्र नामांकन के आधार पर तय होगी — 100 तक विद्यार्थियों वाले स्कूलों में 12 से 15 सदस्य, 100 से 500 छात्रों वाले स्कूलों में 15 से 20 सदस्य, और 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूलों में 20 से 25 सदस्य होंगे।

सदस्य चयन के मानदंड

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, SMC में शामिल कुल सदस्यों का 75 प्रतिशत अभिभावक होंगे, जबकि शेष 25 प्रतिशत अन्य श्रेणियों से चुने जाएंगे। इनमें एक-तिहाई स्थानीय निकाय के निर्वाचित सदस्य और एक-तिहाई विद्यालय के शिक्षक होंगे। गौरतलब है कि यह संरचना शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम की भावना के अनुरूप सामुदायिक स्वामित्व को प्राथमिकता देती है।

सदस्य-सचिव की प्रमुख जिम्मेदारियाँ

प्रधानाचार्य को सदस्य-सचिव के रूप में शैक्षणिक वर्ष के एक महीने के भीतर समिति का गठन सुनिश्चित करना होगा। वार्षिक आम बैठक आयोजित कर अभिभावकों के बीच चुनाव कराना और चुनाव के दौरान कम से कम 50 प्रतिशत अभिभावकों की उपस्थिति सुनिश्चित करना भी उनका दायित्व होगा। दिशा-निर्देशों में क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, वित्तीय पारदर्शिता और सामाजिक जवाबदेही पर विशेष बल दिया गया है।

आगे की राह

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को इन दिशा-निर्देशों को लागू करने का निर्देश दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के क्रियान्वयन को गति देने पर सरकार का विशेष ध्यान है। सरकार का मानना है कि इन प्रावधानों से स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया मजबूत होगी और शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाया जा सकेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती क्रियान्वयन की है — खासकर उन राज्यों में जहाँ RTE के तहत पहले से मौजूद समितियाँ भी महज़ औपचारिकता बनकर रह गई थीं। 75% अभिभावक प्रतिनिधित्व का प्रावधान सराहनीय है, पर ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में जहाँ साक्षरता दर कम है, वहाँ 50% उपस्थिति की अनिवार्यता व्यावहारिक बाधा बन सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब NEP 2020 के क्रियान्वयन की गति को लेकर राज्यों और केंद्र के बीच तनाव बना हुआ है। बिना प्रभावी निगरानी तंत्र और क्षमता निर्माण के, यह पहल भी पिछली समितियों की तरह कागज़ी खानापूर्ति तक सीमित रह सकती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) क्या है और यह क्यों बनाई जा रही है?
SMC एक सामुदायिक समिति है जो विद्यालय के विकास, शैक्षणिक गुणवत्ता और वित्तीय पारदर्शिता की निगरानी करती है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 6 मई 2026 को नए दिशा-निर्देश जारी कर इसे कक्षा 12 तक के सभी स्कूलों में अनिवार्य किया है, ताकि स्कूल प्रबंधन में जनभागीदारी बढ़े।
SMC में कौन-कौन सदस्य होंगे और उनका चयन कैसे होगा?
SMC में 75% सदस्य अभिभावक होंगे और शेष 25% में स्थानीय निकाय के निर्वाचित प्रतिनिधि, शिक्षक, शिक्षाविद्, पूर्व विद्यार्थी, वंचित समूहों के प्रतिनिधि और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शामिल होंगे। अभिभावक सदस्यों का चुनाव वार्षिक आम बैठक में कम से कम 50% अभिभावकों की उपस्थिति में होगा।
SMC की सदस्य संख्या कैसे तय होगी?
सदस्य संख्या विद्यालय में नामांकित छात्रों की संख्या पर निर्भर करेगी। 100 तक छात्रों वाले स्कूलों में 12-15, 100 से 500 छात्रों वाले स्कूलों में 15-20, और 500 से अधिक छात्रों वाले स्कूलों में 20-25 SMC सदस्य होंगे।
SMC का गठन कब तक करना अनिवार्य होगा?
प्रधानाचार्य को शैक्षणिक वर्ष शुरू होने के एक महीने के भीतर SMC का गठन सुनिश्चित करना होगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को इस निर्देश का पालन करने के लिए कहा है।
SMC पुरानी विद्यालय प्रबंधन विकास समिति से कैसे अलग है?
नए दिशा-निर्देशों के तहत SMC, विद्यालय प्रबंधन विकास समिति की जगह लेगी और इसमें अभिभावकों की भागीदारी अनिवार्य रूप से 75% सुनिश्चित की गई है। इसके अलावा वित्तीय पारदर्शिता, सामाजिक लेखा परीक्षण और क्षमता निर्माण पर नए सिरे से जोर दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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