राजनाथ सिंह ने लखनऊ में देश के पहले 'डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री मेडिसिन' का किया उद्घाटन
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 जुलाई 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लखनऊ के कमांड हॉस्पिटल में देश के पहले 'डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री मेडिसिन' की स्थापना के अवसर पर संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की पहचान केवल रणभूमि में पराक्रम से नहीं, बल्कि मानवीय सहायता और आपदा राहत में उसकी संवेदनशीलता से भी होती है।
क्यों हुई इस विभाग की स्थापना
रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारतीय सैनिक दुनिया के कुछ सबसे जटिल और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में तैनात रहते हैं — सियाचिन की बर्फीली ऊँचाइयों से लेकर रेगिस्तान की कड़ी धूप तक। इन परिस्थितियों में जवानों को संक्रामक रोग, अधिक ऊँचाई से जुड़ी बीमारियाँ, गर्मी और ठंड से होने वाली चोटें, थकान, पोषण संबंधी चुनौतियाँ तथा निर्जलीकरण जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि यह नया विभाग इन सभी परिचालन परिस्थितियों के लिए विशेष चिकित्सा प्रोटोकॉल विकसित करेगा।
आधुनिक युद्ध के नए खतरे और अनुसंधान की भूमिका
रक्षा मंत्री ने रेखांकित किया कि आज आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेज़ी से बदल रहा है। पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ रासायनिक, जैविक और रेडियोलॉजिकल खतरे भी निरंतर बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि 'डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री मेडिसिन' इन नए प्रकार के खतरों के अध्ययन में अनुसंधान और विकास का केंद्र बनेगा।
संयुक्त राष्ट्र मिशनों में भारत की भूमिका
राजनाथ सिंह ने बताया कि भारत संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशनों में सबसे बड़े सैन्य योगदानकर्ताओं में से एक है। जब भारतीय सैन्य चिकित्सक दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में जाते हैं, तो उन्हें वहाँ भी विविध चिकित्सीय चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हमारी सैन्य चिकित्सा की प्रतिष्ठा केवल हमारी सीमाओं तक सीमित नहीं है।
लखनऊ की ऐतिहासिक सैन्य विरासत
रक्षा मंत्री ने लखनऊ की ऐतिहासिक सैन्य परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कमांड हॉस्पिटल पहले से ही सेवा, शोध और अनुशासन का संगम रहा है। यहाँ के चिकित्सकों ने 'ऑपरेशन विजय' और कारगिल युद्ध के दौरान अदम्य साहस का परिचय दिया। उन्होंने कहा, 'आज का दिन हमारी सशस्त्र सेनाओं की मेडिकल सर्विस के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रहा है।'
सैनिकों के मनोबल और सुरक्षा व्यवस्था पर ज़ोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की संप्रभुता और प्रगति का मूल आधार उसकी सैन्य शक्ति और उस सैन्य शक्ति का मनोबल होता है। उनके अनुसार, मनोबल का सबसे बड़ा संरक्षक यह विश्वास है कि जब एक सैनिक मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर रहा है, तो उसके पीछे एक सुदृढ़ व्यवस्था खड़ी है जो हर आपात स्थिति में उसे संभालेगी। यह विभाग उसी प्रतिबद्धता का ठोस प्रमाण है।