शहजाद भट्टी नेटवर्क ध्वस्त: 14 राज्यों में 253 हिरासत में, 200 से अधिक गिरफ्तार — अमित शाह
सारांश
मुख्य बातें
सुरक्षा एजेंसियों ने 12 अगस्त 2026 को आईएसआई समर्थित आतंकी सिंडिकेट शहजाद भट्टी नेटवर्क (एसबीएन) के खिलाफ देशव्यापी बहु-राज्यीय अभियान चलाकर इस खतरनाक गुट को ध्वस्त कर दिया। 14 राज्यों में एक साथ चलाई गई इस कार्रवाई में 253 लोगों को हिरासत में लिया गया, 200 से अधिक गिरफ्तारियाँ हुईं और नेटवर्क के खिलाफ 80 से अधिक एफआईआर दर्ज की गई हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने इस ऑपरेशन की जानकारी एक्स पर साझा करते हुए इसे भारत की 'जीरो-टॉलरेंस' नीति का प्रत्यक्ष उदाहरण बताया।
ऑपरेशन का विवरण
स्वतंत्रता दिवस से पूर्व संभावित आतंकी गड़बड़ियों को रोकने के उद्देश्य से राज्य पुलिस बलों के साथ रियल-टाइम खुफिया जानकारी साझा करने वाली प्रणाली के ज़रिए यह समन्वित अभियान चलाया गया। राज्यवार आँकड़ों के अनुसार — उत्तर प्रदेश में 62, हरियाणा में 52, दिल्ली में 51, पंजाब में 44, राजस्थान में 15, महाराष्ट्र में 8, उत्तराखंड में 5, कर्नाटक, गुजरात और बिहार में 3-3 तथा तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और केरल में 2-2 लोगों को गिरफ्तार किया गया। दिल्ली और कर्नाटक में नई एफआईआर भी दर्ज की गई हैं।
अमित शाह का बयान
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'मोदी सरकार ने स्वतंत्रता दिवस से पहले आईएसआई समर्थित आतंकी समूह शहजाद भट्टी नेटवर्क को खत्म कर दिया और संगठन के 200 से ज्यादा सदस्यों को गिरफ्तार कर उसके खतरनाक हमलों के मंसूबों को नाकाम कर दिया।' शाह ने यह भी कहा कि '14 राज्यों में अलग-अलग जगह पर एक साथ ऑपरेशन चलाकर इस नेटवर्क को ध्वस्त किया, जो आतंकवाद के प्रति भारत की जीरो-टॉलरेंस नीति का एक बेहतरीन उदाहरण है।'
बरामद सामग्री और कानूनी कार्रवाई
अधिकारियों के अनुसार, एसबीएन के ठिकानों से भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री ज़ब्त की गई है, जिसमें आईईडी, पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री के निशान वाले ग्रेनेड, पिस्तौल, जिंदा कारतूस और जासूसी के लिए इस्तेमाल होने वाले सीसीटीवी कैमरे शामिल हैं। अमित शाह के अनुसार, इन बरामदगियों से नेटवर्क के सीधे सीमा-पार संबंध की पुष्टि होती है। दर्ज मामले यूएपीए, बीएनएस, आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत हैं।
शहजाद भट्टी नेटवर्क क्या है
शहजाद भट्टी नेटवर्क पाकिस्तान स्थित आईएसआई द्वारा वित्तपोषित और संचालित आतंकी सिंडिकेट है, जो भारत में ग्रेनेड, आईईडी और पेट्रोल बम हमलों तथा टारगेटेड किलिंग में कथित तौर पर शामिल रहा है। यह नेटवर्क स्थानीय सहयोगियों को धन देकर पुलिस, रक्षा प्रतिष्ठानों और धार्मिक स्थलों की रेकी करवाता था और जासूसी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाता था। गौरतलब है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव पहले से ऊँचा है।
आगे क्या होगा
जाँच एजेंसियाँ नेटवर्क की फंडिंग श्रृंखला और सीमा-पार संपर्कों की गहन पड़ताल कर रही हैं। यूएपीए के तहत दर्ज मामलों में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की संलिप्तता की भी संभावना जताई जा रही है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस ऑपरेशन की सफलता भविष्य में ऐसे नेटवर्क के खिलाफ रणनीति का आधार बन सकती है।