शायना एनसी के नाम पर ₹4.90 लाख की साइबर ठगी: गावदेवी पुलिस ने अंतरराज्यीय कार्रवाई में ₹3.15 लाख वापस दिलाए
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में शिवसेना की राष्ट्रीय सचिव एवं प्रवक्ता शायना एनसी के मोबाइल फोन को हैक कर उनके नाम पर ₹4.90 लाख की साइबर ठगी करने के मामले में गावदेवी पुलिस थाने ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। तीन महीने से अधिक समय तक लगातार पुलिस का अनुसरण करने के बाद शायना एनसी के प्रयासों से पुलिस ने महाराष्ट्र और बिहार में अंतरराज्यीय कार्रवाई करते हुए पीड़ितों को ₹3.15 लाख वापस दिलाए हैं।
ठगी का तरीका
16 जुलाई को साइबर अपराधियों ने शायना एनसी का मोबाइल हैक कर उनकी कॉन्टैक्ट लिस्ट में मौजूद लोगों को उन्हीं के नाम से फ़र्जी संदेश भेजे। इन संदेशों में 'इमरजेंसी' का हवाला देकर ₹49,000 की माँग की गई और दो घंटे में रकम वापस करने का झूठा वादा किया गया। झाँसे में आकर 9 लोगों ने मात्र कुछ घंटों में कुल ₹4.90 लाख ठगों के खाते में स्थानांतरित कर दिए।
पुलिस की अंतरराज्यीय कार्रवाई
मोबाइल हैक का पता चलते ही शायना एनसी ने गावदेवी पुलिस थाने में तत्काल शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद उन्होंने तीन महीने से अधिक समय तक वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक प्रशांत मोहिते, वरिष्ठ निरीक्षक प्रवीणकुमार साळुंखे और उपनिरीक्षक वीरेंद्र सिंह खंडाडे से लगातार संपर्क बनाए रखा।
उपनिरीक्षक वीरेंद्र सिंह खंडाडे की टीम ने जाँच के दौरान सबसे पहले महाराष्ट्र के भंडारा जिले में कार्रवाई की और वहाँ से ₹1.68 लाख नकद बरामद किए। इसके बाद बिहार में की गई छापेमारी में ₹98,000 जब्त किए गए।
पीड़ितों को कैसे मिले पैसे
पीड़ितों में से एक पंकज जैन ने ठगी की जानकारी मिलते ही समय रहते अपने बैंक को सूचित किया, जिससे उनके ₹49,000 बैंक ने फ्रीज़ कर दिए और बाद में वापस कर दिए। इस तरह महाराष्ट्र और बिहार से बरामद रकम और बैंक द्वारा वापस की गई राशि को मिलाकर कुल ₹3.15 लाख पीड़ितों को लौटाए गए हैं। पुलिस के अनुसार शेष ₹67,000 आरोपी नकद निकाल चुके हैं और उन्हें वसूलने के प्रयास जारी हैं।
शायना एनसी की नागरिकों से अपील
शायना एनसी ने नागरिकों से आग्रह किया है कि किसी परिचित के नाम से पैसे माँगने का संदेश आए तो पहले उन्हें सीधे फोन कर पुष्टि करें। उन्होंने अनजान लिंक पर क्लिक न करने की सलाह दी और कहा कि ठगी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएँ — तत्काल शिकायत से पैसा फ्रीज़ होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि यह मामला सोशल इंजीनियरिंग आधारित मोबाइल हैकिंग और 'इमरजेंसी फंड' धोखाधड़ी की बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करता है, जहाँ प्रतिष्ठित सार्वजनिक हस्तियों की पहचान का दुरुपयोग किया जाता है। गावदेवी पुलिस की अंतरराज्यीय कार्रवाई इस बात का उदाहरण है कि समय पर शिकायत और सतत फॉलोअप से साइबर ठगी में आंशिक वसूली संभव है। शेष राशि की बरामदगी के लिए जाँच जारी है।