13 जुलाई 2026
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ग्वालियर की 'शक्ति दीदी' पहल: 57 पेट्रोल पंपों पर 118 महिलाएं बनीं 'फ्यूल वर्कर', 2 जनवरी 2025 को हुई थी शुरुआत

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ग्वालियर की 'शक्ति दीदी' पहल: 57 पेट्रोल पंपों पर 118 महिलाएं बनीं 'फ्यूल वर्कर', 2 जनवरी 2025 को हुई थी शुरुआत

सारांश

'शक्ति दीदी' सिर्फ एक योजना नहीं — यह ग्वालियर प्रशासन का वह प्रयोग है जो पाँच महिलाओं से शुरू होकर 118 तक पहुँचा। परित्यक्ता और आर्थिक रूप से कमज़ोर महिलाओं को पेट्रोल पंप पर 'फ्यूल वर्कर' बनाकर यह पहल आत्मनिर्भरता की नई परिभाषा गढ़ रही है।

मुख्य बातें

ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने 28 मई 2026 को छह और महिलाओं को पेट्रोल पंपों पर 'फ्यूल वर्कर' नियुक्त किया।
'शक्ति दीदी' पहल अब 57 पेट्रोल पंपों पर 118 महिलाओं तक विस्तृत हो चुकी है।
यह पहल 2 जनवरी 2025 को मात्र पाँच महिलाओं के साथ शुरू हुई थी।
महिला एवं बाल विकास विभाग के ज़रिए परित्यक्ता, घरेलू समस्याग्रस्त और आर्थिक रूप से कमज़ोर महिलाओं की पहचान की गई।
सुरक्षा के लिए सभी पंपों को स्थानीय थानों से जोड़ा गया और व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए।
महिलाओं को अच्छा वेतन और साप्ताहिक अवकाश जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में महिला सशक्तिकरण की दिशा में शुरू की गई 'शक्ति दीदी' पहल एक मज़बूत मॉडल के रूप में उभर रही है। ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने हाल ही में छह और ज़रूरतमंद महिलाओं को जिले के पेट्रोल पंपों पर 'फ्यूल वर्कर' के रूप में नियुक्त किया, जिससे इस योजना से जुड़ी महिलाओं की कुल संख्या 118 हो गई है। यह पहल 2 जनवरी 2025 को मात्र पाँच महिलाओं के साथ शुरू हुई थी और अब 57 पेट्रोल पंपों तक विस्तृत हो चुकी है।

पहल की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

इस योजना की परिकल्पना उन महिलाओं को केंद्र में रखकर की गई जो परित्यक्ता हैं, घरेलू समस्याओं से जूझ रही हैं या आर्थिक रूप से कमज़ोर स्थिति में हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से ऐसी महिलाओं की पहचान की गई और उन्हें रोज़गार, सुरक्षा तथा सम्मानजनक कार्य वातावरण उपलब्ध कराया गया। गौरतलब है कि शुरुआत में पेट्रोल पंप मालिकों के मन में यह संशय था कि महिलाएं इस प्रकार के कार्य को संभाल पाएंगी या नहीं।

महिला कर्मचारी की आपबीती

योजना से जुड़ी एक महिला कर्मचारी ने बताया कि नौकरी पाने के लिए उन्हें कई बार प्रयास करने पड़े, लेकिन कहीं सफलता नहीं मिली। 'शक्ति दीदी' पहल के तहत रोज़गार मिलने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। उन्होंने कहा कि अब वह घर की ज़िम्मेदारियाँ बेहतर तरीके से निभाने के साथ-साथ अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा भी सुनिश्चित कर पा रही हैं। उनके पति सिक्योरिटी गार्ड हैं और पेट्रोल पंप पर उनकी नियुक्ति से परिवार को आर्थिक मज़बूती मिली है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था

कलेक्टर रुचिका चौहान के अनुसार पेट्रोल पंप संचालकों और वेंडरों की ओर से लगातार सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। महिलाओं के आने से पेट्रोल पंपों पर अनुशासन और कार्य-संस्कृति में भी सकारात्मक बदलाव देखा गया है। महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी पेट्रोल पंपों का स्थानीय थानों के साथ समन्वय कराया गया है और आपात स्थिति में त्वरित सहायता के लिए व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाए गए हैं।

आम जनता और महिलाओं पर असर

सभी 'शक्ति दीदी' कर्मचारियों को अच्छा वेतन और साप्ताहिक अवकाश जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। कलेक्टर चौहान का कहना है कि इस कार्य से महिलाओं को न केवल आर्थिक सहायता मिल रही है, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मविश्वास भी प्राप्त हो रहा है। यह पहल उन परिवारों के लिए एक मज़बूत सहयोग प्रणाली बन रही है जो दोहरी आय पर निर्भर हैं।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब महिला श्रम-बल भागीदारी दर को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है। ग्वालियर का यह प्रयोग अन्य जिलों के लिए एक संभावित मॉडल बन सकता है। 28 मई 2026 को हुई ताज़ा नियुक्तियों के साथ, प्रशासन का लक्ष्य इस पहल को और अधिक पेट्रोल पंपों तक विस्तारित करना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी दीर्घकालिकता है — क्या ये नियुक्तियाँ स्थायी हैं या परियोजना-आधारित? वेतन और कार्य-दशाओं का स्वतंत्र सत्यापन अभी सार्वजनिक नहीं है। यह मॉडल तभी दोहराने योग्य बनेगा जब इसमें पारदर्शी डेटा — आय स्तर, नौकरी की अवधि, सामाजिक सुरक्षा लाभ — जोड़े जाएं। अन्यथा यह एक प्रेरक कहानी तो है, पर नीतिगत मानक नहीं।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'शक्ति दीदी' पहल क्या है और यह कहाँ शुरू हुई?
'शक्ति दीदी' मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में कलेक्टर रुचिका चौहान द्वारा शुरू की गई एक महिला रोज़गार पहल है, जिसके तहत ज़रूरतमंद महिलाओं को पेट्रोल पंपों पर 'फ्यूल वर्कर' के रूप में नियुक्त किया जाता है। यह 2 जनवरी 2025 को पाँच महिलाओं के साथ शुरू हुई थी।
अब तक कितनी महिलाएं 'शक्ति दीदी' से जुड़ चुकी हैं?
28 मई 2026 तक ग्वालियर के 57 पेट्रोल पंपों पर कुल 118 महिलाएं 'शक्ति दीदी' के रूप में कार्यरत हैं। हाल ही में छह नई महिलाओं को इस पहल से जोड़ा गया है।
इस योजना के लिए महिलाओं का चयन कैसे होता है?
महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से उन महिलाओं की पहचान की जाती है जो परित्यक्ता हैं, घरेलू समस्याओं से जूझ रही हैं या आर्थिक रूप से कमज़ोर हैं। इन्हें प्राथमिकता के आधार पर योजना से जोड़ा जाता है।
महिला कर्मचारियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है?
सभी पेट्रोल पंपों को स्थानीय थानों के साथ समन्वित किया गया है और आपात स्थिति में त्वरित सहायता के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं। यह व्यवस्था प्रशासन ने महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए की है।
क्या 'शक्ति दीदी' पहल को अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकता है?
ग्वालियर प्रशासन के अनुसार पेट्रोल पंप संचालकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और महिलाओं ने अनुशासन व जिम्मेदारी से काम कर संशय दूर किए हैं। यह मॉडल अन्य जिलों के लिए संभावित प्रेरणा बन सकता है, हालांकि इसके व्यापक विस्तार की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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