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सोनम वांगचुक के समर्थन में सपा सांसद: 'शांतिपूर्ण विरोध दबाना लोकतंत्र पर हमला'

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सोनम वांगचुक के समर्थन में सपा सांसद: 'शांतिपूर्ण विरोध दबाना लोकतंत्र पर हमला'

सारांश

संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले सपा सांसदों ने जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के समर्थन में मोर्चा खोला। राजीव राय, प्रिया सरोज और देवेश शाक्य ने सरकार पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया और कहा — शांतिपूर्ण विरोध दबाना संविधान की भावना के विरुद्ध है।

मुख्य बातें

समाजवादी पार्टी (सपा) ने 20 जुलाई को एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की मांगों और जंतर-मंतर प्रदर्शन का खुलकर समर्थन किया।
सपा सांसद राजीव राय ने सरकार से जवाबदेही की मांग करते हुए अन्ना हजारे आंदोलन से तुलना की।
सांसद प्रिया सरोज ने कहा — पार्टी पहले प्रदर्शन में शामिल होगी, फिर सदन में युवाओं की चिंताएँ उठाएगी।
सांसद देवेश शाक्य ने वांगचुक की हिरासत को लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताया।
सपा ने मानसून सत्र में इस मुद्दे को संसद के पटल पर उठाने की तैयारी की है।

समाजवादी पार्टी (सपा) ने 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन और पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की मांगों के पक्ष में खुलकर आवाज़ उठाई। पार्टी के कई सांसदों ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने का आरोप लगाया और कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन को दबाना संविधान की भावना के विरुद्ध है।

सांसदों की तीखी प्रतिक्रिया

सपा सांसद राजीव राय ने सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा, 'ये लोग अन्ना हजारे के साथ खड़े तो सोनम वांगचुक के साथ क्यों खड़े नहीं हो सकते हैं? अन्ना हजारे भी इसी तरह की मांग कर रहे थे। सोनम वांगचुक की कौन सी मांग नाजायज है? क्या इस लोकतांत्रिक देश में जवाबदेही तय नहीं होनी चाहिए?' राय ने यह भी कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह की सरकारों में जवाबदेही के तहत इस्तीफे होते थे, जबकि मौजूदा सरकार इससे बचती नज़र आती है।

सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने युवाओं के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए कहा, 'छात्र हमारा भविष्य हैं और छात्रों के साथ सरकार खिलवाड़ कर रही है। वह छात्रों को धोखा दे रही है। यह हमारा मुद्दा है।'

प्रिया सरोज की दो-टूक

सपा सांसद प्रिया सरोज ने कहा कि उनकी पार्टी पहले प्रदर्शन में शामिल होगी और उसके बाद सदन में युवाओं की चिंताओं को उठाएगी। उन्होंने कहा, 'हम युवा हैं — देश का भविष्य हैं। हम इन कानूनी प्रावधानों से नहीं डरते और न ही लाठीचार्ज से। हम एकजुट रहेंगे, शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन में शामिल होंगे और विधानसभा तक मार्च करेंगे।'

वांगचुक की हिरासत पर सवाल

सपा सांसद देवेश शाक्य ने कहा, 'अगर सरकार उनकी मांगें मान लेती है, तो हर कोई उनके साथ खड़ा होने को तैयार है।' उन्होंने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक को जिस तरह हिरासत में लिया गया, वह लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला है। शाक्य ने कहा कि जब विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण हो, तो उसे जारी रहने देना चाहिए।

आम जनता और युवाओं पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है और विपक्षी दल सरकार को घेरने की रणनीति बना रहे हैं। गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर चल रहे इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा और संविधान में आस्था रखने वाले नागरिक शामिल हैं। सपा के सांसदों ने स्पष्ट किया कि पार्टी इस आंदोलन के साथ पूरी तरह एकजुट है।

आगे क्या

मानसून सत्र में सपा इस मुद्दे को सदन के पटल पर उठाने की तैयारी में है। विपक्ष की एकजुटता और सोनम वांगचुक के व्यापक जनसमर्थन को देखते हुए यह मुद्दा संसदीय बहस का केंद्र बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या केवल सरकार-विरोधी बयानबाज़ी तक सीमित रहेगा। अन्ना हजारे की तुलना भावनात्मक रूप से प्रभावी है, पर यह भी याद रखना ज़रूरी है कि उस आंदोलन को विपक्ष ने शुरू में दूरी से देखा था। मुख्यधारा की कवरेज बयानों पर केंद्रित है — वांगचुक की माँगों की संवैधानिक वैधता और लद्दाख के नागरिकों पर उनके असर पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक कौन हैं और उनकी मांगें क्या हैं?
सोनम वांगचुक लद्दाख के पर्यावरण एक्टिविस्ट और इनोवेटर हैं, जो लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की माँग कर रहे हैं। उनकी हिरासत और जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन ने राष्ट्रीय राजनीतिक बहस को जन्म दिया है।
सपा ने सोनम वांगचुक के समर्थन में क्या कहा?
समाजवादी पार्टी के सांसदों राजीव राय, वीरेंद्र सिंह, प्रिया सरोज और देवेश शाक्य ने वांगचुक की मांगों को जायज़ बताया और सरकार पर शांतिपूर्ण विरोध दबाने का आरोप लगाया। पार्टी ने मानसून सत्र में यह मुद्दा सदन में उठाने की घोषणा की है।
जंतर-मंतर पर यह प्रदर्शन किस संदर्भ में हो रहा है?
यह प्रदर्शन संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुआ। इसमें युवाओं और नागरिकों की बड़ी भागीदारी रही, जो वांगचुक की माँगों के समर्थन में एकत्र हुए।
सपा ने सरकार की तुलना पिछली सरकारों से क्यों की?
सपा सांसद राजीव राय ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह की सरकारों में जवाबदेही के तहत इस्तीफे होते थे, जबकि मौजूदा सरकार जवाबदेही से बचती है। यह तुलना सरकार की जवाबदेही संस्कृति पर सवाल उठाने के लिए की गई।
मानसून सत्र में इस मुद्दे का क्या असर पड़ सकता है?
सपा सहित विपक्षी दल इस मुद्दे को संसद में उठाने की तैयारी में हैं, जिससे मानसून सत्र में इस पर तीखी बहस की संभावना है। वांगचुक के व्यापक जनसमर्थन को देखते हुए यह मुद्दा सत्र के प्रमुख विवादों में शामिल हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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