सोनम वांगचुक के समर्थन में सपा सांसद: 'शांतिपूर्ण विरोध दबाना लोकतंत्र पर हमला'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) ने 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन और पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की मांगों के पक्ष में खुलकर आवाज़ उठाई। पार्टी के कई सांसदों ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने का आरोप लगाया और कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन को दबाना संविधान की भावना के विरुद्ध है।
सांसदों की तीखी प्रतिक्रिया
सपा सांसद राजीव राय ने सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा, 'ये लोग अन्ना हजारे के साथ खड़े तो सोनम वांगचुक के साथ क्यों खड़े नहीं हो सकते हैं? अन्ना हजारे भी इसी तरह की मांग कर रहे थे। सोनम वांगचुक की कौन सी मांग नाजायज है? क्या इस लोकतांत्रिक देश में जवाबदेही तय नहीं होनी चाहिए?' राय ने यह भी कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह की सरकारों में जवाबदेही के तहत इस्तीफे होते थे, जबकि मौजूदा सरकार इससे बचती नज़र आती है।
सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने युवाओं के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए कहा, 'छात्र हमारा भविष्य हैं और छात्रों के साथ सरकार खिलवाड़ कर रही है। वह छात्रों को धोखा दे रही है। यह हमारा मुद्दा है।'
प्रिया सरोज की दो-टूक
सपा सांसद प्रिया सरोज ने कहा कि उनकी पार्टी पहले प्रदर्शन में शामिल होगी और उसके बाद सदन में युवाओं की चिंताओं को उठाएगी। उन्होंने कहा, 'हम युवा हैं — देश का भविष्य हैं। हम इन कानूनी प्रावधानों से नहीं डरते और न ही लाठीचार्ज से। हम एकजुट रहेंगे, शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन में शामिल होंगे और विधानसभा तक मार्च करेंगे।'
वांगचुक की हिरासत पर सवाल
सपा सांसद देवेश शाक्य ने कहा, 'अगर सरकार उनकी मांगें मान लेती है, तो हर कोई उनके साथ खड़ा होने को तैयार है।' उन्होंने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक को जिस तरह हिरासत में लिया गया, वह लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला है। शाक्य ने कहा कि जब विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण हो, तो उसे जारी रहने देना चाहिए।
आम जनता और युवाओं पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है और विपक्षी दल सरकार को घेरने की रणनीति बना रहे हैं। गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर चल रहे इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा और संविधान में आस्था रखने वाले नागरिक शामिल हैं। सपा के सांसदों ने स्पष्ट किया कि पार्टी इस आंदोलन के साथ पूरी तरह एकजुट है।
आगे क्या
मानसून सत्र में सपा इस मुद्दे को सदन के पटल पर उठाने की तैयारी में है। विपक्ष की एकजुटता और सोनम वांगचुक के व्यापक जनसमर्थन को देखते हुए यह मुद्दा संसदीय बहस का केंद्र बन सकता है।