जंतर-मंतर विरोध पर BJP विधायक बालमुकुंद आचार्य बोले — शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हक है, देशविरोधी गतिविधियाँ नहीं
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक बालमुकुंद आचार्य ने 19 जुलाई 2026 को जयपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए जंतर-मंतर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को वहाँ से हटाए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन करते हुए देशविरोधी गतिविधियों को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया।
आचार्य का बयान: अधिकार और सीमा
BJP विधायक बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि एक स्वतंत्र देश में प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने का अधिकार है और इस पर किसी को आपत्ति नहीं है। हालाँकि, उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रदर्शन के दौरान कुछ तत्वों ने देश के मूल्यों के विरुद्ध माहौल बनाने की कोशिश की। उनके अनुसार, इस तरह की घटनाएँ समय-समय पर होती रहती हैं और इन्हें किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
सोनम वांगचुक और धार्मिक आस्था का प्रश्न
आचार्य ने स्पष्ट किया कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के प्रदर्शन से किसी को कोई एतराज नहीं है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर कथित तौर पर देशविरोधी नारे लगाए गए और भगवान राम के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की गईं, जो पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। उन्होंने कहा, "राम-जानकी जी आस्था के केंद्र हैं — उनके बारे में इस तरह की बातें करना उचित नहीं है और इस पर नाराज़गी व्यक्त करना स्वाभाविक है।"
सपा सांसद नीरज मौर्य की अलग राय
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद नीरज मौर्य ने वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने को लेकर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक शांतिपूर्ण धरने पर बैठे और भूख हड़ताल कर रहे व्यक्ति के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह उचित नहीं लगता। सांसद मौर्य ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह वांगचुक से सीधे संवाद करे, क्योंकि बातचीत से ही समस्याओं का समाधान होता है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जो लोग आज सत्ता में हैं, वे स्वयं विपक्ष में रहते हुए ऐसे प्रदर्शनों का समर्थन करते थे।
संसद मानसून सत्र पर सपा सांसद का रुख
सपा सांसद नीरज मौर्य ने 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र पर कहा कि विपक्ष सदन में जनता की समस्याओं और आवाज़ को सकारात्मक रूप से उठाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार यदि जवाब न देना चाहे या सदन न चलाना चाहे तो यह उसकी इच्छा है, लेकिन जनप्रतिनिधियों को जनता की बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।
आगे क्या
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से आरंभ होने वाला है। गौरतलब है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग और वांगचुक को हटाए जाने का मुद्दा सत्र में भी गूँज सकता है। राजनीतिक दलों की परस्पर विरोधी प्रतिक्रियाएँ इस बात का संकेत देती हैं कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तीखा हो सकता है।