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यूसीसी पर अमित शाह के बयान को शिवसेना का समर्थन, तेलंगाना में समान नागरिक संहिता लागू करने की माँग

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यूसीसी पर अमित शाह के बयान को शिवसेना का समर्थन, तेलंगाना में समान नागरिक संहिता लागू करने की माँग

सारांश

अमित शाह के यूपी में यूसीसी लागू करने के वादे के बाद शिवसेना की तेलंगाना इकाई मैदान में आ गई है। अध्यक्ष सिंकारू शिवाजी ने 'एक राष्ट्र, एक कानून' की माँग करते हुए CM रेवंत रेड्डी से सहयोग माँगा — यह संकेत है कि यूसीसी का एजेंडा अब दक्षिण भारत में भी राजनीतिक गति पकड़ रहा है।

मुख्य बातें

शिवसेना तेलंगाना इकाई ने गृह मंत्री अमित शाह के यूसीसी संबंधी बयान का 1 नवंबर 2026 को स्वागत किया।
शाह ने घोषणा की थी कि उत्तर प्रदेश में BJP की तीसरी सरकार बनने पर यूसीसी लागू की जाएगी।
शिवसेना तेलंगाना अध्यक्ष सिंकारू शिवाजी ने 'एक राष्ट्र, एक कानून' की माँग रखी।
CM रेवंत रेड्डी से आग्रह किया गया कि वे केंद्र की यूसीसी पहल में सहयोग करें।
शिवाजी ने कहा कि हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, जैन समुदायों के अलग-अलग तलाक व नागरिक कानून की जगह एकीकृत कानूनी ढाँचा होना चाहिए।

शिवसेना की तेलंगाना इकाई ने 1 नवंबर 2026 को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान का खुलकर स्वागत किया और माँग की कि यूसीसी न केवल तेलंगाना, बल्कि पूरे देश में लागू की जाए। यह प्रतिक्रिया शाह की उस घोषणा के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार तीसरी बार सत्ता में आने पर वहाँ यूसीसी प्रभावी ढंग से लागू की जाएगी।

शिवसेना नेता का बयान

शिवसेना की तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष सिंकारू शिवाजी ने कहा, 'केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक सकारात्मक बयान दिया है कि अगर उत्तर प्रदेश में उनकी सरकार तीसरी बार सत्ता में आती है, तो समान नागरिक संहिता को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। हम इस बयान का स्वागत करते हैं। यूसीसी को पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए।' शिवाजी ने जोर देकर कहा कि देश में वास्तविक समानता, समान अधिकार और लैंगिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए यूसीसी अनिवार्य है।

तेलंगाना में यूसीसी लागू करने की अपील

शिवसेना नेता ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से आग्रह किया कि वे केंद्र सरकार की इस पहल का स्वागत करें और राज्य में यूसीसी लागू करने में सहयोग दें। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को किसी संकीर्ण राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, सभी राज्यों में यूसीसी लागू होने से भारत का लोकतांत्रिक ढाँचा, एकता और विकास और अधिक सुदृढ़ होगा।

'एक राष्ट्र, एक कानून' की माँग

सिंकारू शिवाजी ने 'एक राष्ट्र, एक कानून' का आह्वान करते हुए कहा, 'भारत में एक ऐसी समान कानूनी व्यवस्था होनी चाहिए जो लैंगिक समानता और सभी के लिए समान अधिकारों को सुनिश्चित करे और जिसमें एक समान न्यायिक व्यवस्था हो।' उन्होंने कहा कि विभिन्न धार्मिक समुदायों — हिंदुओं, मुसलमानों, ईसाइयों, जैनियों — के लिए तलाक और नागरिक मामलों से जुड़े अलग-अलग कानूनों की जगह एकीकृत कानूनी ढाँचा होना चाहिए।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि यूसीसी का मुद्दा भारतीय राजनीति में दशकों से विमर्श का केंद्र रहा है। उत्तराखंड ने पहले ही यूसीसी लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं, जिसके बाद अन्य BJP-शासित राज्यों में भी इसे लेकर चर्चाएँ तेज हो गई हैं। शाह का बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ शुरू हो रही हैं। शिवसेना की यह माँग दर्शाती है कि NDA के घटक दल इस एजेंडे को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष-शासित राज्य, विशेष रूप से तेलंगाना, इस पहल पर क्या रुख अपनाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके निहितार्थ व्यापक हैं — यह NDA के दक्षिण भारतीय सहयोगियों द्वारा यूसीसी एजेंडे को उन राज्यों तक ले जाने का प्रयास है जहाँ विपक्ष मजबूत है। ध्यान देने योग्य है कि उत्तराखंड में यूसीसी की प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी क्रियान्वयन की जटिलताएँ सामने आई हैं, जो दर्शाती हैं कि घोषणा और अमल के बीच की खाई गहरी है। रेवंत रेड्डी सरकार से 'सहयोग' की अपील राजनीतिक दबाव की रणनीति भी हो सकती है, क्योंकि तेलंगाना में कांग्रेस सरकार यूसीसी पर अलग रुख रखती है। मुख्यधारा की कवरेज इस बात को नजरअंदाज कर रही है कि यूसीसी के 'लैंगिक न्याय' के तर्क और उसके राजनीतिक उपयोग के बीच का अंतर्विरोध अभी भी अनसुलझा है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह ने यूसीसी पर क्या बयान दिया है?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की है कि उत्तर प्रदेश में BJP की सरकार तीसरी बार सत्ता में आने पर राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) प्रभावी ढंग से लागू की जाएगी। इस बयान के बाद NDA के कई सहयोगी दल इसके समर्थन में आ गए हैं।
शिवसेना तेलंगाना इकाई ने यूसीसी पर क्या माँग की है?
शिवसेना की तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष सिंकारू शिवाजी ने माँग की है कि यूसीसी केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित न रहकर तेलंगाना सहित पूरे देश में लागू की जाए। उन्होंने 'एक राष्ट्र, एक कानून' का आह्वान करते हुए तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से इस पहल में सहयोग देने की अपील की है।
यूसीसी क्या है और यह क्यों विवादास्पद है?
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) एक ऐसा कानूनी ढाँचा है जो सभी नागरिकों पर — चाहे उनका धर्म कोई भी हो — विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में एक समान कानून लागू करता है। यह इसलिए विवादास्पद है क्योंकि वर्तमान में विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू हैं, और आलोचकों का कहना है कि यूसीसी धार्मिक अल्पसंख्यकों की पहचान को प्रभावित कर सकता है।
क्या किसी राज्य ने अब तक यूसीसी लागू किया है?
उत्तराखंड यूसीसी लागू करने की दिशा में कदम उठाने वाला पहला भारतीय राज्य बना है। इसके बाद से अन्य BJP-शासित राज्यों में भी इसे लेकर चर्चाएँ तेज हो गई हैं, जबकि विपक्ष-शासित राज्यों ने इस मुद्दे पर अलग रुख अपनाया है।
तेलंगाना सरकार का यूसीसी पर क्या रुख है?
शिवसेना तेलंगाना इकाई के अनुसार, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से आग्रह किया गया है कि वे केंद्र की यूसीसी पहल का स्वागत करें और सहयोग दें। हालाँकि, तेलंगाना में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार ने इस माँग पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
राष्ट्र प्रेस
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