शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों को वाई-प्लस सुरक्षा, महाराष्ट्र इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के बाद बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र गृह विभाग ने 18 जून 2025 को शिवसेना (यूबीटी) से जुड़े छह सांसदों की सुरक्षा व्यवस्था को उन्नत करते हुए उन्हें वाई-प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करने के आदेश जारी किए। राज्य इंटेलिजेंस की एक विशेष रिपोर्ट में इन नेताओं को संभावित खतरे का संकेत दिए जाने के बाद यह कदम उठाया गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय की सतर्कता के मद्देनज़र महाराष्ट्र पुलिस ने तत्काल सुरक्षा समीक्षा की।
किन सांसदों की बढ़ाई गई सुरक्षा
जिन छह सांसदों को वाई-प्लस सुरक्षा दी गई है, उनमें संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टीकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय जाधव के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। गौरतलब है कि ये सभी नेता हाल के दिनों में पार्टी की महत्वपूर्ण बैठकों से अनुपस्थित रहे हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और अटकलें
बताया जा रहा है कि नई दिल्ली में आयोजित शिवसेना (यूबीटी) सांसदों की एक बैठक में ये छह नेता मौजूद नहीं थे, जिसके बाद यह अटकलें तेज हो गईं कि ये पार्टी से अलग होकर किसी अन्य गुट में शामिल हो सकते हैं या नया राजनीतिक समीकरण बना सकते हैं। हालाँकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अब तक किसी भी पक्ष ने नहीं की है। संजय राउत के एक बयान के बाद यह मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया, जिसके बाद गृह विभाग ने इंटेलिजेंस को तत्काल समीक्षा के निर्देश दिए।
वाई-प्लस सुरक्षा का मतलब क्या है
वाई-प्लस श्रेणी की सुरक्षा उन व्यक्तियों को दी जाती है जिन्हें उच्च स्तर का खतरा माना जाता है। महाराष्ट्र में इस सुरक्षा घेरे में कुल 11 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं — जिनमें 1 या 2 कमांडो (पीएसओ) और सशस्त्र पुलिसकर्मी शामिल होते हैं। ये सुरक्षाकर्मी संबंधित नेता के आवास, यात्रा और सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान 24 घंटे सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
इंटेलिजेंस कमिश्नर की भूमिका
इंटेलिजेंस कमिश्नर की सिफारिश पर राज्य गृह विभाग ने सुरक्षा अपग्रेड का आदेश जारी किया। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दोनों गुटों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है और पार्टी टूट के बाद से विधायी निष्ठा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
आगे क्या होगा
राजनीतिक हलकों में यह देखा जाएगा कि ये छह सांसद आने वाले दिनों में पार्टी की बैठकों में शामिल होते हैं या नहीं। सुरक्षा व्यवस्था की समय-सीमा और इसके नवीनीकरण का निर्णय राज्य इंटेलिजेंस की अगली समीक्षा रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।