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श्रावणी मेला 2026: सुल्तानगंज में 4,000-5,000 पुलिसकर्मी तैनात होंगे, ड्रोन-CCTV से होगी निगरानी

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श्रावणी मेला 2026: सुल्तानगंज में 4,000-5,000 पुलिसकर्मी तैनात होंगे, ड्रोन-CCTV से होगी निगरानी

सारांश

श्रावणी मेला 2026 के लिए सुल्तानगंज प्रशासन ने पिछले साल से 50% अधिक पुलिस बल — 4,000 से 5,000 कर्मी — तैनात करने का प्रस्ताव रखा है। ड्रोन निगरानी, CCTV, घुड़सवार दस्ते और विशेष ट्रैफिक योजना के साथ यह अब तक की सबसे बड़ी सुरक्षा तैयारी है।

मुख्य बातें

श्रावणी मेला 2026 के लिए सुल्तानगंज में 4,000 से 5,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती का प्रस्ताव; पिछले वर्ष की तुलना में 50% अधिक बल।
ड्रोन से हवाई निगरानी, सीसीटीवी नेटवर्क, पैदल गश्ती, बाइक पेट्रोलिंग और घुड़सवार दस्ते तैनात रहेंगे।
गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए कुछ स्थानों पर मिट्टी का स्तर ऊंचा किया जा रहा है।
हाईवे बाबा चौक पर पार्किंग बनेगी; कृष्णगढ़ चौक तक छोटे वाहनों से श्रद्धालुओं को पहुँचाया जाएगा।
पिछले वर्ष महिला श्रद्धालुओं के गिरने की घटना के बाद सभी जोखिम स्थल चिन्हित; अजगैबीनाथ मंदिर के संकरे प्रवेश द्वार सुधारे जाएंगे।
पुलिस बल एक महीने से अधिक मेला क्षेत्र में तैनात रहेगा; आवास और महिला पुलिसकर्मियों की सुविधाओं की व्यवस्था भी सुनिश्चित।

सुल्तानगंज में आयोजित होने वाले श्रावणी मेला 2026 के लिए प्रशासन ने अब तक की सबसे व्यापक सुरक्षा योजना तैयार की है, जिसके तहत 4,000 से 5,000 पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की तैनाती का प्रस्ताव किया गया है। भागलपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) प्रमोद कुमार यादव ने 1 जुलाई 2026 को बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार सुरक्षा बल में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी। भीड़ प्रबंधन, ट्रैफिक नियंत्रण, पार्किंग और गंगा के बढ़ते जलस्तर को ध्यान में रखते हुए विस्तृत सुरक्षा खाका तैयार किया गया है।

मुख्य सुरक्षा इंतजाम

एसएसपी प्रमोद कुमार यादव ने बताया कि मेले के दौरान ड्रोन के माध्यम से हवाई निगरानी की जाएगी और सीसीटीवी कैमरों का व्यापक नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा पैदल गश्ती दल, बाइक पेट्रोलिंग और घुड़सवार दस्ते भी तैनात रहेंगे। अजगैबीनाथ मंदिर परिसर में संकरे प्रवेश द्वारों को चौड़ा करने और भीड़ की आवाजाही सुगम बनाने के लिए रेलिंग लगाने, अवरोध हटाने व रास्तों को समतल करने का कार्य किया जाएगा।

पिछले वर्ष की घटनाओं से सबक

निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि पिछले वर्ष एक स्थान पर बने पाए में फंसकर एक-दो महिला श्रद्धालु गिर गई थीं, जिससे उन्हें चोट लगी थी। यादव ने बताया कि ऐसे सभी जोखिम वाले स्थानों को चिन्हित कर लिया गया है और इस बार पहले से ही आवश्यक सुधार कार्य पूरे किए जाएंगे। जिला पदाधिकारी के साथ मिलकर मेला क्षेत्र का तीन से चार बार संयुक्त निरीक्षण किया जा चुका है, जिसमें घाटों की सीढ़ियों, पानी की गहराई और ढलान का आकलन शामिल है।

गंगा जलस्तर और बाढ़ की तैयारी

एसएसपी ने बताया कि मेले की शुरुआत के लगभग एक सप्ताह बाद गंगा का जलस्तर बढ़ने लगता है, जिससे आसपास के कई क्षेत्रों में पानी प्रवेश कर जाता है। इसी को देखते हुए कुछ स्थानों पर मिट्टी का स्तर ऊंचा किया जा रहा है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में मानसून की शुरुआत हो चुकी है और नदियों का जलस्तर पहले से ही बढ़ रहा है।

ट्रैफिक और पार्किंग व्यवस्था

ट्रैफिक नियंत्रण के लिए हाईवे स्थित बाबा चौक के पास पार्किंग स्थल बनाया जाएगा। वहाँ से श्रद्धालुओं को तिपहिया और छोटे वाहनों के माध्यम से कृष्णगढ़ चौक तक पहुँचाया जाएगा। विशेष रूप से सोमवारी और उससे एक दिन पहले, जब भीड़ सबसे अधिक होती है, वाहनों को पहले ही रोककर आगे छोटे वाहनों से श्रद्धालुओं को भेजा जाएगा। सड़क किनारे दुकानदारों के लिए येलो लाइन निर्धारित की जाएगी ताकि सड़क अधिकतम खुली रहे।

रेलवे स्टेशन और अंधेरे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान

यादव ने बताया कि रेलवे स्टेशन के आसपास कुछ ऐसे इलाके हैं जहाँ अंधेरा रहता है और छिनैती की घटनाएं होती रही हैं। इन स्थानों के लिए अलग सुरक्षा योजना तैयार की गई है और जिला प्रशासन से अतिरिक्त लाइटिंग की व्यवस्था का अनुरोध किया गया है। पुलिस बल और अधिकारी मेले के दौरान एक महीने से अधिक समय तक वहीं तैनात रहेंगे, जिनके लिए आवास, महिला पुलिसकर्मियों के शौचालय और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। प्रशासन का लक्ष्य है कि बैद्यनाथ धाम के लिए जल लेकर जाने वाले प्रत्येक कांवड़िए की यात्रा सुरक्षित और सुगम हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

और भगदड़ व डूबने की घटनाएं इस मेले का एक दुखद इतिहास रही हैं। पिछले वर्ष महिला श्रद्धालुओं के घायल होने की घटना के बाद इस बार 50% अधिक पुलिस बल की माँग सकारात्मक कदम है, लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी। गंगा के जलस्तर के साथ भीड़ का प्रबंधन और रेलवे स्टेशन के आसपास छिनैती रोकना — ये दोनों चुनौतियाँ संख्या से नहीं, बल्कि समन्वय और तैयारी की गुणवत्ता से तय होंगी।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रावणी मेला 2026 में सुल्तानगंज में कितने पुलिसकर्मी तैनात होंगे?
भागलपुर के एसएसपी प्रमोद कुमार यादव के अनुसार, श्रावणी मेला 2026 के दौरान सुल्तानगंज में लगभग 4,000 से 5,000 पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की तैनाती का प्रस्ताव है। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 50% अधिक है, हालांकि अंतिम संख्या का आकलन अभी जारी है।
श्रावणी मेला 2026 में सुरक्षा के लिए कौन-कौन सी तकनीक का उपयोग होगा?
मेले के दौरान ड्रोन से हवाई निगरानी और सीसीटीवी कैमरों का व्यापक नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा पैदल गश्ती, बाइक पेट्रोलिंग और घुड़सवार दस्ते भी तैनात रहेंगे।
सुल्तानगंज में ट्रैफिक और पार्किंग की क्या व्यवस्था होगी?
हाईवे स्थित बाबा चौक के पास पार्किंग स्थल बनाया जाएगा, जहाँ से श्रद्धालुओं को तिपहिया और छोटे वाहनों से कृष्णगढ़ चौक तक पहुँचाया जाएगा। सोमवारी और उससे पहले वाले दिन जब भीड़ अधिक होती है, वाहनों को पहले ही रोककर आगे छोटे वाहनों से भेजा जाएगा।
गंगा के बढ़ते जलस्तर से मेले पर क्या असर पड़ सकता है और प्रशासन क्या तैयारी कर रहा है?
एसएसपी के अनुसार, मेले की शुरुआत के लगभग एक सप्ताह बाद गंगा का जलस्तर बढ़ने लगता है और आसपास के क्षेत्रों में पानी प्रवेश कर जाता है। इससे निपटने के लिए कुछ स्थानों पर मिट्टी का स्तर ऊंचा किया जा रहा है और घाटों की सीढ़ियों व पानी की गहराई का पहले से आकलन किया गया है।
अजगैबीनाथ मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
अजगैबीनाथ मंदिर के संकरे प्रवेश द्वारों को सुधारा जाएगा और भीड़ प्रबंधन के लिए रेलिंग लगाई जाएगी। पिछले वर्ष जिन स्थानों पर महिला श्रद्धालु गिरकर घायल हुई थीं, उन सभी जोखिम वाले स्थानों को चिन्हित कर पहले से सुधार कार्य किए जाएंगे।
राष्ट्र प्रेस
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