SIR विवाद: सिंघवी बोले — 'न्यायाधीश संविधान के संरक्षक, मतदान अधिकार सबसे बड़ा मानवाधिकार'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने 5 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में वोटर लिस्ट से नाम हटाने के मुद्दे पर जस्टिस उज्जल भुइयां और पूर्व जस्टिस रोहिंटन नरीमन के वक्तव्यों का खुलकर समर्थन किया। साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग के अधिकारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के संबंध में अपने बयान पर भी सफाई दी।
जस्टिस नरीमन के बयान पर सिंघवी का समर्थन
सिंघवी ने पूर्व जस्टिस नरीमन की प्रशंसा करते हुए कहा, 'जस्टिस नरीमन सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज हैं। इससे पहले वे वरिष्ठ वकील थे। उनका नाम बड़े आदर से लिया जाता है। उन्हें निष्पक्षता के सिवा किसी तरह का पक्ष लेते नहीं देखा गया है।' उन्होंने आगे कहा, 'आम आदमी का सबसे बड़ा मानवाधिकार अगर कोई है, तो गणतंत्र में मतदान का अधिकार है।'
सिंघवी के अनुसार वोटर लिस्ट से नाम हटाया जाना एक गंभीर संवैधानिक प्रश्न है और जस्टिस नरीमन ने इसी पर आवाज़ उठाई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'उन्होंने सच कहा है। मैं उनकी इस बात का स्वागत करता हूं।'
जस्टिस उज्जल भुइयां के वक्तव्य का बचाव
जस्टिस उज्जल भुइयां द्वारा एक शैक्षणिक मंच पर दिए गए बयान का उल्लेख करते हुए सिंघवी ने कहा, 'जस्टिस उज्जल भुइयां विद्यार्थियों के स्थल पर बोल रहे थे। उन्होंने जो कहा है, उसमें कोई त्रुटि नहीं निकाल सकता।' उन्होंने जोड़ा, 'संवैधानिक संरक्षक का इससे ज्यादा महत्वपूर्ण कार्य क्या होगा? संविधान के संरक्षक यही न्यायाधीश हैं।'
सिंघवी ने यह भी कहा कि उन्हें विश्वास है कि 'इसी प्रकार के स्वतंत्र व्यक्तित्व से सुधार आएगा।' यह टिप्पणी न्यायपालिका की स्वायत्तता पर बढ़ती बहस के बीच आई है।
ज्ञानेश कुमार और कानूनी कार्रवाई पर सफाई
चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कथित कानूनी कार्रवाई के विरोध संबंधी अपने पिछले बयान पर सफाई देते हुए सिंघवी ने कहा, 'पूरा इंटरव्यू छपा है। मैंने कहा था कि कई लोग बिना वजह कानून का दरवाजा खटखटाते हैं, जबकि उन्हें कानून की सीमाएं पता होती हैं।'
उन्होंने आगे स्पष्ट किया, 'हर चीज का हल अदालत के दरवाजे पर नहीं होता। मेरा सिर्फ इतना कहना है कि सोच-समझकर कानून के पास जाना चाहिए।' यह बयान उन खबरों की पृष्ठभूमि में आया जिनमें कहा जा रहा था कि सिंघवी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कानूनी कदम उठाने का विरोध किया था।
व्यापक संदर्भ: SIR और मतदाता सूची विवाद
गौरतलब है कि हाल के महीनों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर बदलाव की रिपोर्टें सामने आई हैं, जिससे विपक्षी दलों में असंतोष है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में मनमाने ढंग से नामों को हटाया जा रहा है, जो मतदान के मौलिक अधिकार का हनन है।
यह ऐसे समय में आया है जब न्यायपालिका और चुनाव आयोग के बीच संबंधों पर राष्ट्रीय बहस तेज़ हुई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और अदालतों, दोनों में और उठ सकता है।