22 अगस्त 2026
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सीतापुर में कांग्रेस कार्यालय पर प्रशासन का कब्जा, इलाहाबाद हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

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सीतापुर में कांग्रेस कार्यालय पर प्रशासन का कब्जा, इलाहाबाद हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

सारांश

सीतापुर में नजूल भूमि पर दशकों से चले आ रहे कांग्रेस कार्यालय को प्रशासन ने सील कर दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत न मिलने और दस्तावेज़ी कमज़ोरी के चलते कांग्रेस पदाधिकारियों को कार्यालय खाली करना पड़ा — घंटाघर क्षेत्र की यह ऐतिहासिक इमारत अब प्रशासन के नियंत्रण में है।

मुख्य बातें

सीतापुर के घंटाघर क्षेत्र में स्थित शहर कांग्रेस कमेटी कार्यालय पर 22 अगस्त को जिला प्रशासन ने कब्जा लिया।
कार्यालय नजूल भूमि पर बना था; नगर पालिका के नोटिस की समयावधि समाप्त होने पर कार्रवाई हुई।
कांग्रेस पदाधिकारी इलाहाबाद उच्च न्यायालय गए, लेकिन अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
आपत्ति प्रक्रिया में कांग्रेस की ओर से कोई अहम दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
एसडीएम सदर जनार्दन प्रसाद के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने भारी पुलिस बल के साथ कार्यालय सील किया; परिसर खाली मिला।

उत्तर प्रदेश के सीतापुर में शहर कांग्रेस कमेटी कार्यालय को 22 अगस्त को जिला प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय से राहत न मिलने के बाद कांग्रेस पदाधिकारियों को यह कार्यालय खाली करना पड़ा, और नोटिस की समयावधि समाप्त होते ही प्रशासनिक टीम ने कार्यालय को सील कर दिया।

मुख्य घटनाक्रम

एसडीएम सदर जनार्दन प्रसाद, ईओ नगर पालिका विकास कुमार, तहसीलदार सदर अजीत जायसवाल और लेखपाल अंजनी कुमार की संयुक्त प्रशासनिक टीम शनिवार को सीतापुर के ऐतिहासिक घंटाघर क्षेत्र स्थित कार्यालय पहुँची। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कार्यालय को सील किया गया। एसडीएम जनार्दन प्रसाद ने बताया कि कार्यालय पूरी तरह खाली मिला और वहाँ कोई सामान नहीं था।

नजूल भूमि विवाद की पृष्ठभूमि

यह कार्यालय नजूल भूमि पर बना हुआ था, जो सरकारी स्वामित्व की भूमि होती है। नगर पालिका ने कांग्रेस पदाधिकारियों को पहले 15 दिन में आपत्ति दर्ज करने का नोटिस जारी किया था। आपत्ति के दौरान कोई अहम दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं किए जा सके, जिसके बाद कार्यालय खाली करने का औपचारिक नोटिस दिया गया।

हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

नोटिस अवधि के दौरान कांग्रेस पदाधिकारी इलाहाबाद उच्च न्यायालय पहुँचे और स्थगन की माँग की, परंतु अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। न्यायालय से राहत न मिलने के बाद नोटिस की समयसीमा पूरी होते ही नगर पालिका ने कार्रवाई करते हुए कार्यालय पर कब्जा ले लिया।

प्रशासन की स्थिति

एसडीएम जनार्दन प्रसाद ने स्पष्ट किया कि यह संपत्ति नजूल की है और नियमानुसार नोटिस जारी कर उचित प्रक्रिया का पालन किया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस समर्थक हाईकोर्ट भी गए, लेकिन वहाँ से राहत नहीं मिली, इसलिए नोटिस की समयावधि पूरी होने पर कब्जा लिया गया। फिलहाल, कार्यालय प्रशासन के नियंत्रण में है और आगे की कार्रवाई प्रक्रिया के तहत होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और विपक्षी दलों के कार्यालय इसकी ज़द में आते रहे हैं। सवाल यह है कि क्या दस्तावेज़ीकरण की कमी वाकई प्रशासनिक लापरवाही थी, या कांग्रेस संगठन की कमज़ोर होती जमीनी उपस्थिति का प्रतिबिंब। इलाहाबाद उच्च न्यायालय का याचिका खारिज करना प्रशासनिक प्रक्रिया की वैधता को रेखांकित करता है, लेकिन राजनीतिक विपक्ष के लिए यह संगठनात्मक संकट का संकेत भी है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीतापुर में कांग्रेस कार्यालय पर कब्जा क्यों लिया गया?
यह कार्यालय नजूल भूमि पर बना था, जो सरकारी स्वामित्व की होती है। नगर पालिका के नोटिस की समयावधि पूरी होने और इलाहाबाद उच्च न्यायालय से राहत न मिलने के बाद जिला प्रशासन ने 22 अगस्त को इसे अपने कब्जे में लिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कांग्रेस की याचिका क्यों खारिज की?
अदालत ने कांग्रेस पदाधिकारियों की स्थगन याचिका को खारिज कर दिया। आपत्ति प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस की ओर से कोई ठोस दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं किए जा सके, जिससे उनका कानूनी दावा कमज़ोर पड़ा।
नजूल भूमि क्या होती है और इसका विवाद से क्या संबंध है?
नजूल भूमि वह सरकारी ज़मीन होती है जो आमतौर पर ब्रिटिश काल से सरकार के पास है और जिस पर निजी या दलीय कब्जा अवैध माना जाता है। सीतापुर में कांग्रेस कार्यालय ऐसी ही भूमि पर बना था, जिसे प्रशासन ने वापस लेने की कार्रवाई की।
कब्जे की कार्रवाई में कौन-कौन से अधिकारी शामिल थे?
एसडीएम सदर जनार्दन प्रसाद के नेतृत्व में ईओ नगर पालिका विकास कुमार, तहसीलदार सदर अजीत जायसवाल और लेखपाल अंजनी कुमार की टीम ने भारी पुलिस बल के साथ कार्रवाई की।
अब कांग्रेस कार्यालय का क्या होगा?
फिलहाल परिसर प्रशासन के नियंत्रण में है और इसे सील कर दिया गया है। आगे की कार्रवाई नजूल भूमि नियमों के तहत होगी; कांग्रेस के पास उच्चतर न्यायालय में अपील का विकल्प बचा है।
राष्ट्र प्रेस
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