सीतापुर में कांग्रेस कार्यालय पर प्रशासन का कब्जा, इलाहाबाद हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के सीतापुर में शहर कांग्रेस कमेटी कार्यालय को 22 अगस्त को जिला प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय से राहत न मिलने के बाद कांग्रेस पदाधिकारियों को यह कार्यालय खाली करना पड़ा, और नोटिस की समयावधि समाप्त होते ही प्रशासनिक टीम ने कार्यालय को सील कर दिया।
मुख्य घटनाक्रम
एसडीएम सदर जनार्दन प्रसाद, ईओ नगर पालिका विकास कुमार, तहसीलदार सदर अजीत जायसवाल और लेखपाल अंजनी कुमार की संयुक्त प्रशासनिक टीम शनिवार को सीतापुर के ऐतिहासिक घंटाघर क्षेत्र स्थित कार्यालय पहुँची। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कार्यालय को सील किया गया। एसडीएम जनार्दन प्रसाद ने बताया कि कार्यालय पूरी तरह खाली मिला और वहाँ कोई सामान नहीं था।
नजूल भूमि विवाद की पृष्ठभूमि
यह कार्यालय नजूल भूमि पर बना हुआ था, जो सरकारी स्वामित्व की भूमि होती है। नगर पालिका ने कांग्रेस पदाधिकारियों को पहले 15 दिन में आपत्ति दर्ज करने का नोटिस जारी किया था। आपत्ति के दौरान कोई अहम दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं किए जा सके, जिसके बाद कार्यालय खाली करने का औपचारिक नोटिस दिया गया।
हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत
नोटिस अवधि के दौरान कांग्रेस पदाधिकारी इलाहाबाद उच्च न्यायालय पहुँचे और स्थगन की माँग की, परंतु अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। न्यायालय से राहत न मिलने के बाद नोटिस की समयसीमा पूरी होते ही नगर पालिका ने कार्रवाई करते हुए कार्यालय पर कब्जा ले लिया।
प्रशासन की स्थिति
एसडीएम जनार्दन प्रसाद ने स्पष्ट किया कि यह संपत्ति नजूल की है और नियमानुसार नोटिस जारी कर उचित प्रक्रिया का पालन किया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस समर्थक हाईकोर्ट भी गए, लेकिन वहाँ से राहत नहीं मिली, इसलिए नोटिस की समयावधि पूरी होने पर कब्जा लिया गया। फिलहाल, कार्यालय प्रशासन के नियंत्रण में है और आगे की कार्रवाई प्रक्रिया के तहत होगी।