महाराष्ट्र में स्मार्ट मीटर कानूनी रूप से अनिवार्य, अफवाहें न फैलाएं: बिजली मंत्री मेघना साकोरे बोर्डीकर
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र में स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर उठे विवाद के बीच बिजली राज्य मंत्री मेघना साकोरे बोर्डीकर ने 3 जुलाई को राज्य विधानसभा में स्पष्ट किया कि इन मीटरों को लगाना केंद्रीय विद्युत अधिनियम 2003 और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (मीटर लगाने और संचालन के नियम) 2006 के तहत एक कानूनी बाध्यता है। उन्होंने सभी पक्षों से अपील की कि बिजली बिल बढ़ने को लेकर उपभोक्ताओं में बेवजह भ्रम और घबराहट न फैलाई जाए।
मुद्दा कैसे उठा
यह विषय भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक भीमराव तापकीर ने पुणे में बार-बार बिजली कटौती और स्मार्ट मीटर से जुड़ी जनशिकायतों के संदर्भ में 'ध्यान आकर्षण प्रस्ताव' के माध्यम से सदन के पटल पर रखा। इस पर विपक्ष और सत्ताधारी महायुति गठबंधन दोनों के विधायकों ने भाग लेते हुए सरकार को घेरा।
विपक्ष के आरोप
नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक चेतन तुपे ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद कई उपभोक्ताओं के बिजली बिल लगभग तीन गुना बढ़ गए हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इन मीटरों की सटीकता जाँचने के लिए कोई पारदर्शी तंत्र है या नहीं, और क्या उपभोक्ताओं को मीटर चुनने का अधिकार दिया जाएगा।
कांग्रेस विधायक नाना पटोले ने और तीखे तेवर अपनाते हुए आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर की स्थापना का काम एक बड़ी निजी कंपनी को सौंपा जा रहा है, जिसके कर्मचारी ही पूरा संचालन संभालते हैं — राज्य बिजली बोर्ड के अधिकारी नहीं। उनका कहना था कि शिकायत करने पर अधिकारी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। पटोले ने यह भी कहा कि विद्युत कानून कोई अपरिवर्तनीय दस्तावेज़ नहीं है और नागरिकों को आर्थिक शोषण से बचाने के लिए इसमें संशोधन किया जा सकता है।
शिवसेना विधायक नीलेश राणे ने चेतावनी दी कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर विवाद को लेकर तनाव इस कदर बढ़ गया है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों पर शारीरिक हमले का खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने सरकार से योजना के क्रियान्वयन को तत्काल रोकने की माँग की और दावा किया कि कम शिकायत दर्शाने वाले आँकड़े वास्तविकता से मेल नहीं खाते।
सरकार का जवाब
मंत्री मेघना साकोरे बोर्डीकर ने आँकड़ों के साथ विपक्ष के दावों का खंडन किया। उन्होंने बताया कि अकेले पुणे में जून 2026 तक लगभग 9.74 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। तेज़ चलने वाले मीटर या अधिक बिल आने से संबंधित 11,770 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से जाँच में केवल 4 शिकायतें ही सही पाई गईं। मंत्री ने कहा कि यह धारणा पूरी तरह निराधार है कि स्मार्ट मीटर स्वतः बिजली बिल बढ़ा देते हैं — बल्कि ये मीटर उपभोक्ताओं को दिन के कम व्यस्त समय में सस्ती दरों पर बिजली उपयोग करने का विकल्प देते हैं।
प्रीपेड और पोस्टपेड मीटर का अंतर
नाना पटोले ने सदन को याद दिलाया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहले आश्वासन दिया था कि स्मार्ट मीटर लगवाना वैकल्पिक होगा। इस पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री का वह आश्वासन विशेष रूप से प्रीपेड स्मार्ट मीटर के संदर्भ में था। वर्तमान में पूरे राज्य में जो मीटर लगाए जा रहे हैं, वे नियमित पोस्टपेड स्मार्ट मीटर हैं, जिन्हें सभी बिजली वितरण कंपनियों के लिए लगाना कानूनी रूप से बाध्यकारी है। मंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि उपभोक्ताओं की किसी भी उचित शिकायत का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
आगे क्या
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देशभर में स्मार्ट मीटर योजना की गति तेज़ हो रही है और कई राज्यों में उपभोक्ता संगठन बिलिंग पारदर्शिता की माँग कर रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार पर अब यह दबाव है कि वह मीटर सटीकता के लिए स्वतंत्र जाँच तंत्र स्थापित करे और उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराए, ताकि जनआक्रोश और राजनीतिक टकराव को टाला जा सके।