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नीट विवाद: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सोनम वांगचुक बोले — 'लोकतंत्र की जीत, अब सुधारों की बारी'

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नीट विवाद: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सोनम वांगचुक बोले — 'लोकतंत्र की जीत, अब सुधारों की बारी'

सारांश

नीट-यूजी पेपर लीक विवाद में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को सोनम वांगचुक ने 'सड़क से निकले लोकतंत्र की जीत' बताया। प्रधान ने खुद जिम्मेदारी ली, CBI जाँच और दोबारा परीक्षा का ऐलान हुआ। अब असली सवाल यह है कि जवाबदेही के बाद सुधार कब आएँगे।

मुख्य बातें

सोनम वांगचुक ने 25 जुलाई को एक्स पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को 'लोकतंत्र की जीत' करार दिया।
नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताएँ सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने जाँच CBI को सौंपी और परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजन का निर्णय लिया।
अगले वर्ष से नीट परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में होगी।
जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में दस दिनों से अधिक समय से विरोध प्रदर्शन चल रहा था।
प्रधान ने इस्तीफे में कहा कि यह मामला व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार समर्थक सोनम वांगचुक ने 25 जुलाई को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इसे 'लोकतंत्र की जीत' करार दिया। वांगचुक ने इसे सड़कों से उठे जन-आंदोलन, शांति और दृढ़ता की सामूहिक जीत बताया। यह घटनाक्रम नई दिल्ली में उस समय सामने आया जब नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन चरम पर थे।

वांगचुक का बयान: सड़क से निकला लोकतंत्र

वांगचुक ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'यह लोकतंत्र की जीत है... सीधे सड़कों से निकले प्रत्यक्ष लोकतंत्र की जीत। यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है।' उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी), देश की 'जेन-जी' पीढ़ी और उन सभी नागरिकों को बधाई दी, जिन्होंने 'डर के माहौल से ऊपर उठकर देश के हर कोने से अपनी आवाज़ बुलंद की।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'अब जवाबदेही के बाद सुधारों की बारी है।'

यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब जंतर-मंतर पर सीजेपी के नेतृत्व में दस दिनों से अधिक समय से विरोध प्रदर्शन जारी था और छात्र समुदाय परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की माँग कर रहा था।

प्रधान का इस्तीफा: जिम्मेदारी और युवाओं का भविष्य

धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्तीफा सौंपते हुए एक्स पर विस्तृत संदेश जारी किया। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रसेवा मेरे जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।' प्रधान ने स्वीकार किया कि 3 मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताएँ सामने आई थीं।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंपी, परीक्षा रद्द की और दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया। साथ ही यह भी घोषणा की कि अगले वर्ष से नीट परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित होगी।

प्रधान का तर्क: व्यक्तिगत प्रतिष्ठा नहीं, युवाओं का भविष्य

प्रधान ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि यह मामला उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का है। उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि छात्रों का भविष्य कानूनी विवादों या राजनीतिक टकराव में उलझे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पिछले चार दशकों से वे छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं।

गौरतलब है कि प्रधान ने शुरुआत से ही इस पूरे मामले की जिम्मेदारी ली और कहा कि उनका उद्देश्य था कि 'परीक्षा माफिया' के कारण किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो।

नीट विवाद की पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी 2024 परीक्षा में कथित पेपर लीक और अंक-घोटाले को लेकर देशभर में छात्रों का आक्रोश उबल रहा था। सर्वोच्च न्यायालय में भी इस मामले से जुड़ी याचिकाएँ विचाराधीन हैं। यह नीट परीक्षा से जुड़ा पहला बड़ा राजनीतिक परिणाम है, जिसमें एक केंद्रीय मंत्री ने सीधे जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ा।

आगे क्या होगा

प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार किसे सौंपा जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। CBI की जाँच जारी है और नीट परीक्षा के पुनर्आयोजन की तिथि की घोषणा अपेक्षित है। वांगचुक समेत छात्र संगठनों की नज़र अब इस बात पर है कि सरकार शिक्षा प्रणाली में ठोस सुधार कब और कैसे लागू करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बजाय इसके कि पद पर बने रहें। लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है: क्या नीट को CBT मोड में ले जाना काफी है, या परीक्षा प्रशासन की पूरी संरचना — NTA से लेकर केंद्रों की निगरानी तक — को फिर से खड़ा करना होगा? वांगचुक की 'सुधारों की बारी' वाली माँग सही दिशा में है, लेकिन बिना संस्थागत जवाबदेही के एक मंत्री का जाना केवल प्रतीकात्मक राहत है। सर्वोच्च न्यायालय में लंबित याचिकाएँ और CBI जाँच यह तय करेंगी कि यह बदलाव वास्तविक है या महज़ राजनीतिक दबाव-प्रबंधन।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों दिया?
धर्मेंद्र प्रधान ने नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया। उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि देश के युवाओं का भविष्य राजनीतिक टकराव या कानूनी विवादों में उलझे।
सोनम वांगचुक ने इस्तीफे पर क्या कहा?
सोनम वांगचुक ने एक्स पर इसे 'सड़कों से निकले प्रत्यक्ष लोकतंत्र की जीत' बताया। उन्होंने कहा कि अब जवाबदेही के बाद शिक्षा सुधारों की बारी है।
नीट-यूजी परीक्षा में क्या अनियमितताएँ सामने आईं?
3 मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक और अंक-घोटाले के आरोप सामने आए। केंद्र सरकार ने जाँच CBI को सौंपी, परीक्षा रद्द की और दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया।
नीट परीक्षा में अब क्या बदलाव होगा?
सरकार ने घोषणा की है कि अगले वर्ष से नीट परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित होगी। यह पेपर-पेन आधारित परीक्षा की जगह लेगा, जिससे लीक की संभावना कम होने की उम्मीद है।
जंतर-मंतर पर कौन-सा आंदोलन चल रहा था?
जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में दस दिनों से अधिक समय से विरोध प्रदर्शन जारी था। यह आंदोलन नीट परीक्षा में पारदर्शिता और दोषियों पर कार्रवाई की माँग को लेकर था।
राष्ट्र प्रेस
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