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सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल को लिखा पत्र, 'संसद चलो' मार्च के लिए माँगी छुट्टी; डॉक्टरों ने बताई हालत

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सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल को लिखा पत्र, 'संसद चलो' मार्च के लिए माँगी छुट्टी; डॉक्टरों ने बताई हालत

सारांश

तीन हफ्तों की भूख हड़ताल के बाद सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने 'संसद चलो' मार्च के लिए छुट्टी माँगी है। डॉक्टरों ने हालत स्थिर बताई, लेकिन लंबे उपवास के कारण निगरानी जारी रखने की बात कही।

मुख्य बातें

सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई को सफदरजंग अस्पताल प्रशासन को पत्र लिखकर 'संसद चलो' मार्च में भाग लेने के लिए अस्थायी छुट्टी माँगी।
वांगचुक तीन हफ्तों की भूख हड़ताल के बाद 18 जुलाई को अस्पताल में भर्ती हुए थे।
मनीषा बैस ठाकुर (सफदरजंग) और डॉ.
अक्षय कुमार (एम्स) ने हालत स्थिर और ब्लड पैरामीटर सामान्य बताए।
डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि लंबे उपवास के कारण स्वास्थ्य जटिलताओं की आशंका बनी है और सतत निगरानी अनिवार्य है।
एम्स और सफदरजंग के डॉक्टरों की संयुक्त टीम उनका उपचार कर रही है।
दिल्ली पुलिस ने 'संसद चलो' मार्च को देखते हुए संसद भवन के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी है।

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई को सफदरजंग अस्पताल प्रशासन को पत्र लिखकर 'संसद चलो' मार्च में भाग लेने के लिए अस्थायी छुट्टी देने का अनुरोध किया है। अस्पताल में भर्ती वांगचुक ने कहा कि उनके स्वास्थ्य पैरामीटर सामान्य हैं, जबकि डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि लंबी भूख हड़ताल के कारण उन्हें सतत निगरानी की आवश्यकता बनी हुई है।

वांगचुक का पत्र: क्या कहा उन्होंने

वांगचुक ने अपने पत्र में लिखा, 'मैं अब अच्छा महसूस कर रहा हूँ। मेरी सेहत के पैरामीटर भी बिल्कुल सामान्य हैं, इसलिए मैं सभी से अनुरोध करता हूँ कि मुझे अस्पताल से छुट्टी दी जाए — भले ही कुछ समय के लिए — ताकि मैं संसद चलो मार्च में हिस्सा ले सकूँ।' उन्होंने इस आग्रह पर अस्पताल प्रशासन के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

डॉक्टरों ने क्या बताई स्थिति

सफदरजंग अस्पताल में मेडिसिन विभाग की प्रमुख डॉ. प्रो. मनीषा बैस ठाकुर ने पत्रकारों को बताया कि वांगचुक पिछले दो दिनों से उनकी देखरेख में हैं। उन्होंने कहा कि सुबह की जाँच में हालत पूरी तरह स्थिर पाई गई और सभी ब्लड टेस्ट के परिणाम सामान्य हैं। हालाँकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि चूँकि वांगचुक लंबे समय से भूख हड़ताल पर थे, इसलिए स्वास्थ्य जटिलताओं की आशंका पूरी तरह टली नहीं है और सतत निगरानी अनिवार्य है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. अक्षय कुमार ने भी पुष्टि की कि वांगचुक की स्थिति फिलहाल स्थिर है। उन्होंने बताया, 'उनके ब्लड पैरामीटर और हीमोग्लोबिन नॉर्मल रेंज में हैं। लेकिन लंबे उपवास के बाद स्वास्थ्य जोखिम बना रहता है, इसलिए हम निरंतर निगरानी जारी रखेंगे।' उन्होंने यह भी बताया कि इलाज के लिए एम्स और सफदरजंग के डॉक्टरों की एक संयुक्त टीम गठित की गई है।

पृष्ठभूमि: तीन हफ्तों की भूख हड़ताल

वांगचुक पिछले तीन हफ्तों से भूख हड़ताल पर थे। 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल में उपचार के लिए ले गई। उनके स्वास्थ्य को लेकर देशभर में बड़ी संख्या में समर्थकों ने चिंता व्यक्त की थी। यह ऐसे समय में आया है जब लद्दाख के अधिकारों और राज्य का दर्जा दिलाने की माँग को लेकर आंदोलन तेज़ हो रहा है।

मार्च और सुरक्षा व्यवस्था

इस बीच, 'संसद चलो' मार्च में भाग लेने के लिए प्रदर्शनकारी संसद भवन की ओर रवाना हो चुके हैं। दिल्ली पुलिस ने मार्च को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। वांगचुक की अस्पताल से छुट्टी मिलने या न मिलने पर अंतिम निर्णय चिकित्सा टीम के मूल्यांकन पर निर्भर करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

छोड़ दो' वाला पत्र — दोनों के बीच की यह खींचतान बताती है कि आंदोलन की राजनीतिक ज़रूरत और चिकित्सीय सलाह अभी आमने-सामने हैं। मुख्यधारा की कवरेज इस तथ्य को अक्सर नज़रअंदाज़ करती है कि लंबी भूख हड़ताल के बाद अचानक सार्वजनिक गतिविधि में लौटना स्वास्थ्य के लिहाज़ से गंभीर जोखिम हो सकता है — और यह जिम्मेदारी केवल अस्पताल की नहीं, आंदोलन के नेतृत्व की भी है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल को पत्र क्यों लिखा?
वांगचुक ने अस्पताल प्रशासन से 'संसद चलो' मार्च में भाग लेने के लिए अस्थायी छुट्टी देने का अनुरोध किया। उन्होंने पत्र में कहा कि उनके स्वास्थ्य पैरामीटर सामान्य हैं और वे मार्च में शामिल होना चाहते हैं।
सोनम वांगचुक की अभी क्या स्वास्थ्य स्थिति है?
डॉक्टरों के अनुसार वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर है और ब्लड टेस्ट के परिणाम सामान्य हैं। हालाँकि, तीन हफ्तों की भूख हड़ताल के कारण स्वास्थ्य जटिलताओं की आशंका बनी है और सतत निगरानी जारी है।
सोनम वांगचुक अस्पताल में कब से भर्ती हैं?
वांगचुक को 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस सफदरजंग अस्पताल लेकर गई थी। वे तीन हफ्तों से भूख हड़ताल पर थे, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए भर्ती कराया गया।
वांगचुक का इलाज कौन कर रहा है?
सफदरजंग अस्पताल और एम्स के डॉक्टरों की एक संयुक्त टीम वांगचुक की देखरेख कर रही है। टीम में मेडिसिन विभाग की प्रमुख डॉ. प्रो. मनीषा बैस ठाकुर और एम्स के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. अक्षय कुमार शामिल हैं।
'संसद चलो' मार्च क्या है और इसकी सुरक्षा व्यवस्था कैसी है?
'संसद चलो' मार्च संसद भवन की ओर आयोजित एक प्रदर्शन है जिसमें प्रदर्शनकारी रवाना हो चुके हैं। दिल्ली पुलिस ने इस मार्च को देखते हुए संसद भवन के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
राष्ट्र प्रेस
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