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सोनम वांगचुक को बिना बातचीत उठा ले गई पुलिस — सपा नेता जाहिद बेग का आरोप

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सोनम वांगचुक को बिना बातचीत उठा ले गई पुलिस — सपा नेता जाहिद बेग का आरोप

सारांश

जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को बिना बातचीत अस्पताल ले जाने पर सपा नेता जाहिद बेग ने प्रशासन को घेरा। डिंपल यादव के बाद अब बेग का धरना स्थल पर पहुँचना दर्शाता है कि विपक्ष इस आंदोलन को राजनीतिक समर्थन देने में कोई संकोच नहीं कर रहा।

मुख्य बातें

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को 19 जुलाई को जंतर-मंतर धरना स्थल से पुलिस सफदरजंग अस्पताल ले गई।
सपा नेता जाहिद बेग ने आरोप लगाया कि पुलिस बिना किसी पूर्व बातचीत के वांगचुक को उठा ले गई।
बेग ने कहा कि सरकार की ओर से अब तक धरनास्थल पर संवाद के लिए कोई नहीं आया।
इससे पहले लोकसभा सांसद डिंपल यादव भी जंतर-मंतर पहुँचकर सीजेपी की माँगों का समर्थन कर चुकी हैं।
विपक्षी दलों ने प्रशासन की कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताया है।

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को नई दिल्ली के जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल से अचानक सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता जाहिद बेग रविवार, 19 जुलाई को विरोध स्थल पर पहुँचे और प्रशासन की कार्रवाई पर कड़े सवाल उठाए। उनका आरोप है कि पुलिस बिना किसी पूर्व संवाद के वांगचुक को उठा ले गई, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।

जाहिद बेग ने क्या कहा

जाहिद बेग ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह मुद्दा किसी एक दल की राजनीति नहीं, बल्कि देश के युवाओं और छात्रों से सीधे जुड़ा है। उन्होंने कहा, 'बड़ी संख्या में लोग धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से न बातचीत हुई, न हालचाल लेने कोई आया।' उन्होंने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी इस आंदोलन में छात्रों और युवाओं की आवाज़ के साथ पूरी तरह खड़ी है।

पुलिस कार्रवाई पर सवाल

सपा नेता ने आरोप लगाया कि जिस तरह से वांगचुक को धरना स्थल से उठाया गया, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिहाज़ से चिंताजनक है। उनके अनुसार, किसी भी आंदोलन या प्रदर्शन के संदर्भ में सरकार और प्रशासन को संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। बेग ने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज़ सुनना और संवाद करना अनिवार्य है।

सपा का लगातार समर्थन

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी पिछले कई दिनों से खुलकर सोनम वांगचुक के विरोध प्रदर्शन का समर्थन कर रही है। इससे पहले गुरुवार को लोकसभा सांसद डिंपल यादव भी जंतर-मंतर पहुँची थीं और सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) की माँगों का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा था।

व्यापक राजनीतिक प्रतिक्रिया

वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने की खबर सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार से जवाब माँगा है। सोनम वांगचुक को देशभर में व्यापक जन-समर्थन मिल रहा है, और ऐसे में प्रशासन की इस कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब लद्दाख से जुड़ी माँगों को लेकर आंदोलन पहले से ही राष्ट्रीय ध्यान खींच रहा था।

आगे क्या

फिलहाल सरकार की ओर से आंदोलनकारियों से संवाद की कोई आधिकारिक पहल सामने नहीं आई है। विपक्षी दलों का दबाव बढ़ने के साथ यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इससे वांगचुक की मूल माँगें — जो लद्दाख की संवैधानिक स्थिति और जनजातीय अधिकारों से जुड़ी हैं — पृष्ठभूमि में न चली जाएँ, यह ध्यान रखना ज़रूरी है। मुख्यधारा की कवरेज राजनीतिक बयानबाज़ी पर केंद्रित है, जबकि असली सवाल यह है कि सरकार ने अब तक बातचीत से परहेज़ क्यों किया।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से क्यों ले जाया गया?
कथित तौर पर पुलिस 19 जुलाई को जंतर-मंतर धरना स्थल से सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल ले गई। सपा नेता जाहिद बेग के अनुसार यह कार्रवाई बिना किसी पूर्व बातचीत के की गई; प्रशासन की ओर से आधिकारिक कारण अभी स्पष्ट नहीं किया गया है।
जाहिद बेग ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
समाजवादी पार्टी के नेता जाहिद बेग ने आरोप लगाया कि सरकार ने धरनास्थल पर बैठे आंदोलनकारियों से न बातचीत की और न हालचाल लिया। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिहाज़ से चिंताजनक बताया।
समाजवादी पार्टी सोनम वांगचुक के आंदोलन में क्यों शामिल हो रही है?
सपा का कहना है कि यह मुद्दा देश के युवाओं और छात्रों से जुड़ा है, इसलिए पार्टी इसे राजनीतिक नहीं बल्कि जन-आंदोलन मानती है। लोकसभा सांसद डिंपल यादव पहले ही जंतर-मंतर पहुँचकर सीजेपी की माँगों का समर्थन कर चुकी हैं।
सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) की माँगें क्या हैं?
स्रोत सामग्री में सीजेपी की विस्तृत माँगों का उल्लेख नहीं है, लेकिन यह आंदोलन सोनम वांगचुक के नेतृत्व में लद्दाख से जुड़े मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहा है और इसे विपक्षी दलों का समर्थन मिल रहा है।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से आंदोलनकारियों से संवाद की कोई आधिकारिक पहल सामने नहीं आई है। विपक्ष का दबाव बढ़ने और सोनम वांगचुक को देशव्यापी समर्थन मिलने के मद्देनज़र सरकार के अगले कदम पर सबकी नज़र है।
राष्ट्र प्रेस
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