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सोनिया गांधी वोटर लिस्ट विवाद: राउज एवेन्यू कोर्ट में 25 जुलाई को होगी अंतिम सुनवाई

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सोनिया गांधी वोटर लिस्ट विवाद: राउज एवेन्यू कोर्ट में 25 जुलाई को होगी अंतिम सुनवाई

सारांश

सोनिया गांधी के खिलाफ 1980 की मतदाता सूची में कथित जालसाजी का मामला अब अंतिम पड़ाव पर है — राउज एवेन्यू कोर्ट में 25 जुलाई को फैसलाकुन सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता का दावा है कि नागरिकता मिलने से तीन साल पहले नाम दर्ज था; सोनिया गांधी ने आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।

मुख्य बातें

राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोनिया गांधी के खिलाफ वोटर लिस्ट विवाद पर 25 जुलाई को अंतिम सुनवाई तय की।
याचिका में दावा — सोनिया गांधी को 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता मिली, जबकि नाम 1980 की मतदाता सूची में पहले से दर्ज था।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने 9 दिसंबर 2025 को याचिका की जाँच पर सहमति जताते हुए दिल्ली पुलिस और सोनिया गांधी को नोटिस जारी किया था।
सोनिया गांधी ने आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित और निराधार बताया; कहा — नागरिकता व मतदाता सूची विवाद क्रमशः केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में हैं।
मजिस्ट्रेट कोर्ट पहले एफआईआर की मांग खारिज कर चुकी है, अनुच्छेद 329 का हवाला देते हुए।

नई दिल्ली में राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी के खिलाफ दाखिल पुनरीक्षण याचिका पर अंतिम सुनवाई की तारीख 25 जुलाई तय की है। यह याचिका कथित तौर पर भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से पहले वर्ष 1980 की मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से जुड़े जालसाजी के आरोपों पर आधारित है। 4 जुलाई को हुई सुनवाई में सोनिया गांधी के वकील ने अदालत में अपनी लिखित दलीलें प्रस्तुत कीं।

याचिका में क्या है दावा

अधिवक्ता विकास त्रिपाठी की ओर से दाखिल पुनरीक्षण याचिका में दावा किया गया है कि सोनिया गांधी ने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता हासिल की, जबकि उनका नाम नई दिल्ली की 1980 की मतदाता सूची में पहले से दर्ज था। याचिका में तीन प्रमुख प्रश्न उठाए गए हैं — पहला, नागरिकता से तीन वर्ष पूर्व मतदाता सूची में नाम किस आधार पर शामिल किया गया; दूसरा, 1982 में नाम क्यों हटाया गया; और तीसरा, नाम दर्ज कराने के लिए कौन-से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए तथा क्या कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ।

कोर्ट की पृष्ठभूमि और पूर्व आदेश

9 दिसंबर 2025 को राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) विशाल गोगने ने पुनरीक्षण याचिका की जाँच करने पर सहमति जताई और सोनिया गांधी तथा दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। गौरतलब है कि इससे पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली शिकायत यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि संविधान के अनुच्छेद 329 के तहत चुनावी मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप सीमित है।

सोनिया गांधी का पक्ष

पुनरीक्षण याचिका का विरोध करते हुए सोनिया गांधी ने अदालत में कहा है कि उनके विरुद्ध लगाए गए आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित, निराधार तथा भ्रामक तथ्यों पर आधारित हैं। उनके जवाब में यह भी कहा गया है कि नागरिकता से संबंधित प्रश्न केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जबकि मतदाता सूची विवाद भारत के चुनाव आयोग के अंतर्गत आते हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जालसाजी या धोखाधड़ी के आरोपों को प्रमाणित करने के लिए कोई विश्वसनीय दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया और इस कार्यवाही को कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया।

आगे क्या होगा

अब 25 जुलाई को अंतिम सुनवाई निर्धारित है, जिसमें दोनों पक्षों की लिखित दलीलें रिकॉर्ड पर हैं। अदालत का फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि पुनरीक्षण याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं और क्या मामले को आगे की जाँच के लिए भेजा जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी ओर विशेष न्यायाधीश ने याचिका की जाँच योग्य मानकर नोटिस जारी किया। असली प्रश्न यह है कि क्या पुनरीक्षण याचिका में वे ठोस दस्तावेजी साक्ष्य हैं जो 1980 की प्रविष्टि को विधिक रूप से चुनौती दे सकें — अब तक सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं आया। यह मामला चुनावी कानून और नागरिकता अधिकार क्षेत्र की सीमाओं पर एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल बन सकता है, चाहे फैसला किसी भी दिशा में जाए।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनिया गांधी के खिलाफ वोटर लिस्ट विवाद का मामला क्या है?
यह मामला एक पुनरीक्षण याचिका पर आधारित है, जिसमें दावा किया गया है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 की नई दिल्ली मतदाता सूची में तब दर्ज था, जबकि उन्होंने भारतीय नागरिकता 30 अप्रैल 1983 को प्राप्त की। याचिकाकर्ता का आरोप है कि नाम दर्ज कराने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ।
राउज एवेन्यू कोर्ट में अगली सुनवाई कब होगी?
अदालत ने 25 जुलाई को अंतिम सुनवाई की तारीख तय की है। 4 जुलाई की सुनवाई में सोनिया गांधी के वकील ने लिखित दलीलें दाखिल कीं, जिसके बाद यह तारीख निर्धारित हुई।
इस मामले में विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने क्या आदेश दिया था?
9 दिसंबर 2025 को विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने पुनरीक्षण याचिका की जाँच करने पर सहमति जताई और सोनिया गांधी तथा दिल्ली पुलिस दोनों को नोटिस जारी किए। इससे पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट एफआईआर की मांग खारिज कर चुकी थी।
सोनिया गांधी ने इन आरोपों पर क्या कहा है?
सोनिया गांधी ने आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित, निराधार और भ्रामक तथ्यों पर आधारित बताया है। उनका कहना है कि नागरिकता और मतदाता सूची विवाद क्रमशः केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में हैं, और जालसाजी साबित करने के लिए कोई विश्वसनीय दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं किया गया।
अनुच्छेद 329 इस मामले में क्यों प्रासंगिक है?
संविधान का अनुच्छेद 329 चुनाव याचिकाओं के अलावा चुनावी मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप को सीमित करता है। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इसी आधार पर एफआईआर की मांग वाली शिकायत खारिज की थी, यह कहते हुए कि इस तरह की जाँच संवैधानिक अधिकारियों के क्षेत्र में अनुचित अतिक्रमण होगी।
राष्ट्र प्रेस
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