सोनिया गांधी के खिलाफ मतदाता सूची में नाम जोड़ने के मामले में अगली सुनवाई 18 अप्रैल को
सारांश
Key Takeaways
- सोनिया गांधी के खिलाफ जालसाजी के आरोप
- अगली सुनवाई 18 अप्रैल को
- याचिकाकर्ता ने जांच कराने की मांग की
- यह मामला 50 वर्ष पुराना है
- राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा
नई दिल्ली, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राउज एवेन्यू कोर्ट में सोनिया गांधी के खिलाफ संदिग्ध तरीके से मतदाता सूची में नाम जोड़ने के मामले की अगली सुनवाई अब 18 अप्रैल को निर्धारित की गई है। उन पर भारतीय नागरिकता प्राप्त किए बिना वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने का आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ता ने इस मामले की गहन जांच और मुकदमा दर्ज करने की याचना की है।
आज अदालत में वकील विकास त्रिपाठी द्वारा दायर रिवीजन पिटीशन पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के वकील ने अपनी तर्क प्रस्तुत कर दी, जबकि सोनिया गांधी की तरफ से दलीलें अधूरी रह गईं। अदालत ने आगामी सुनवाई के लिए 18 अप्रैल की तारीख तय की है।
सुनवाई के दौरान राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से कई सवाल पूछे। कोर्ट ने कहा कि यह मामला लगभग 50 वर्ष पुराना है और आप एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे हैं। जांच किस प्रकार से होगी, यह भी पूछा गया। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि आज आपने जो जानकारी दी है, वह केवल नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रियाओं तक सीमित है।
याचिकाकर्ता के वकील ने उत्तर देते हुए कहा कि यह एक विदेशी नागरिक द्वारा की गई गलत घोषणा का मामला है। उन्होंने अदालत को सूचित किया कि वे यह प्रमाणित करने का प्रयास कर रहे हैं कि सोनिया गांधी का नाम 1980 की मतदाता सूची में केवल जाली दस्तावेजों या धोखाधड़ी के द्वारा ही शामिल किया गया था। वकील ने कहा कि उन्होंने मतदाता सूची की सत्यापित प्रतियां मांगी थी और उन्हें उपलब्ध कराई गई हैं।
याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी ने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी, लेकिन उनका नाम 1980 की नई दिल्ली की मतदाता सूची में पहले से मौजूद था। याचिका के अनुसार 1982 में उनका नाम सूची से हटा दिया गया था। जब 1983 में नागरिकता मिली, तब यह सवाल उठाया गया कि 1980 में नाम जोड़ने के लिए कौन से दस्तावेज पेश किए गए थे और क्या जाली दस्तावेजों का उपयोग किया गया था।
पिछली सुनवाई में सोनिया गांधी की तरफ से जवाब देते हुए याचिका को तथ्यहीन, राजनीतिक रूप से प्रेरित और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया गया था। सितंबर 2025 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके बाद विकास त्रिपाठी ने रिवीजन पिटीशन दायर की।