1 नवंबर 2026
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साउथ बुलेट ट्रेन कॉरिडोर: बेंगलुरु से चेन्नई 73 मिनट, हैदराबाद 2 घंटे 10 मिनट — वैष्णव का बड़ा ऐलान

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साउथ बुलेट ट्रेन कॉरिडोर: बेंगलुरु से चेन्नई 73 मिनट, हैदराबाद 2 घंटे 10 मिनट — वैष्णव का बड़ा ऐलान

सारांश

कर्नाटक राज्योत्सव पर रेल मंत्री वैष्णव ने बड़ा दांव खेला — PM मोदी की मंजूरी प्राप्त 'साउथ बुलेट ट्रेन कॉरिडोर' बेंगलुरु को चेन्नई से 73 मिनट और हैदराबाद से 130 मिनट में जोड़ेगा। साथ में वंदे भारत स्लीपर और मंगलुरु कनेक्टिविटी की भी सौगात, दक्षिण भारत के बुनियादी ढाँचे में नया अध्याय।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 'साउथ बुलेट ट्रेन कॉरिडोर' को मंजूरी दी; बेंगलुरु को हैदराबाद , अमरावती और चेन्नई से जोड़ेगा।
बेंगलुरु-चेन्नई का सफर 73 मिनट और बेंगलुरु-हैदराबाद का सफर 2 घंटे 10 मिनट में पूरा होने की उम्मीद।
कुल 4,000 किलोमीटर के बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को स्वीकृति; 3,000 किलोमीटर अतिरिक्त कॉरिडोर की घोषणा शीघ्र होगी।
बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर सेवा 1 नवंबर 2026 को लॉन्च; उत्तरी कर्नाटक से होकर गुजरेगी।
बेंगलुरु-मंगलुरु वंदे भारत सेवा कुछ हफ्तों में शुरू होगी, विद्युतीकरण व परीक्षण कार्य अंतिम चरण में।
रूट को केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी , एच.
सोमन्ना के साथ मिलकर अंतिम रूप दिया गया।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 1 नवंबर 2026 को कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर बेंगलुरु में घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'साउथ बुलेट ट्रेन कॉरिडोर' को मंजूरी दे दी है, जो बेंगलुरु को हैदराबाद, अमरावती और चेन्नई से जोड़ेगा। इस कॉरिडोर के चालू होने पर बेंगलुरु-चेन्नई के बीच का सफर मात्र 73 मिनट और बेंगलुरु-हैदराबाद का सफर लगभग 2 घंटे 10 मिनट में पूरा होने की उम्मीद है।

कॉरिडोर की मुख्य घोषणाएँ

वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री ने कुल 4,000 किलोमीटर के बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को स्वीकृति दी है और आने वाले दिनों में 3,000 किलोमीटर के अतिरिक्त कॉरिडोर की भी घोषणा की जाएगी। उन्होंने कहा, 'बेंगलुरु और चेन्नई अब एक ही शहर की तरह हो जाएंगे। इस कनेक्टिविटी से दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों के बीच आर्थिक एकीकरण और मजबूत होगा।' इसी क्रम में, प्रस्तावित बेंगलुरु-पुणे बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के कर्नाटक के उत्तरी हिस्सों से होकर गुजरने की भी संभावना जताई गई।

वंदे भारत और नई रेल सेवाएँ

इसी समारोह में वैष्णव ने बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर सेवा को हरी झंडी दिखाई। यह ट्रेन बेंगलुरु से चलकर आंध्र प्रदेश के गुंतकल से गुजरेगी, फिर रायचूर, यादगीर और कलबुर्गी के रास्ते कर्नाटक में वापस प्रवेश करेगी और महाराष्ट्र की ओर बढ़ेगी। मंत्री ने बताया कि इस रूट को केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, एच. डी. कुमारस्वामी और वी. सोमन्ना के साथ विस्तृत चर्चा के बाद अंतिम रूप दिया गया है।

इसके अलावा, एक और वंदे भारत स्लीपर सेवा बेंगलुरु को उत्तरी कर्नाटक से जोड़ेगी, जो हुबली की ओर जाएगी और वहाँ से पुणे तथा मुंबई तक का सफर तय करेगी।

मंगलुरु कनेक्टिविटी पर जोर

तटीय कर्नाटक की कनेक्टिविटी की माँग को संबोधित करते हुए वैष्णव ने बताया कि बेंगलुरु-मंगलुरु रूट पर विद्युतीकरण और परीक्षण का कार्य आने वाले कुछ हफ्तों में पूरा हो जाएगा, जिसके बाद मंगलुरु-बेंगलुरु वंदे भारत ट्रेन सेवा शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने कहा, 'यह पूरे क्षेत्र को बेहतरीन और उच्च-स्तरीय कनेक्टिविटी से जोड़ेगी।'

आम आदमी और मध्यम वर्ग पर फोकस

वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री के निर्देश के अनुसार आधुनिक रेल सेवाएँ शुरू करते समय समाज के सबसे गरीब तबके, युवाओं और महिलाओं को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने कहा, 'इसी को ध्यान में रखते हुए नमो भारत, अमृत भारत और वंदे भारत — तीन अलग-अलग श्रेणियों की ट्रेनें चलाई जा रही हैं।' गौरतलब है कि यह नई स्लीपर सेवा देश की टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप राजधानी बेंगलुरु को आर्थिक राजधानी मुंबई से सीधे जोड़ेगी।

राजनीतिक माहौल और आगे की राह

घोषणा के बाद मंच पर उपस्थित केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी खड़े हुए और वैष्णव को बधाई दी; सभी नेताओं ने एक साथ हाथ मिलाकर 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के नारे लगाए। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत में बुनियादी ढाँचे के विकास पर केंद्र सरकार का विशेष ध्यान देखा जा रहा है। कॉरिडोर के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और निर्माण समयसीमा की घोषणा आने वाले महीनों में अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भारत में बुलेट ट्रेन परियोजनाओं का इतिहास घोषणाओं और ज़मीनी हकीकत के बीच चौड़ी खाई का रहा है — मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर इसका प्रमाण है जो एक दशक बाद भी अधूरा है। 4,000 किलोमीटर के नेटवर्क के लिए भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और वित्त पोषण की चुनौतियाँ अभी भी अनुत्तरित हैं। राज्योत्सव पर की गई यह घोषणा राजनीतिक दृष्टि से सुविचारित है, लेकिन DPR, निर्माण समयसीमा और फंडिंग मॉडल के बिना इसे केवल नीतिगत इरादे के रूप में देखा जाना उचित होगा।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साउथ बुलेट ट्रेन कॉरिडोर क्या है और यह किन शहरों को जोड़ेगा?
साउथ बुलेट ट्रेन कॉरिडोर वह प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल परियोजना है जिसे PM मोदी ने मंजूरी दी है। यह बेंगलुरु को हैदराबाद, अमरावती और चेन्नई से जोड़ेगा और दक्षिण भारत के प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच यात्रा समय में भारी कमी लाएगा।
बुलेट ट्रेन से बेंगलुरु से चेन्नई और हैदराबाद पहुँचने में कितना समय लगेगा?
रेल मंत्री वैष्णव के अनुसार, बेंगलुरु से चेन्नई का सफर मात्र 73 मिनट और बेंगलुरु से हैदराबाद का सफर लगभग 2 घंटे 10 मिनट में पूरा होने की उम्मीद है। ये अनुमानित आँकड़े प्रस्तावित हाई-स्पीड कॉरिडोर पर आधारित हैं।
बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर सेवा का रूट क्या है?
यह ट्रेन बेंगलुरु से चलकर आंध्र प्रदेश के गुंतकल से गुजरेगी, फिर रायचूर, यादगीर और कलबुर्गी के रास्ते वापस कर्नाटक में प्रवेश करके महाराष्ट्र की ओर जाएगी। यह रूट उत्तरी कर्नाटक के उन इलाकों को कवर करेगा जहाँ पहले पर्याप्त रेल कनेक्टिविटी नहीं थी।
बेंगलुरु-मंगलुरु वंदे भारत ट्रेन कब शुरू होगी?
रेल मंत्री वैष्णव ने बताया कि बेंगलुरु-मंगलुरु रूट पर विद्युतीकरण और परीक्षण का कार्य आने वाले कुछ हफ्तों में पूरा हो जाएगा, जिसके बाद वंदे भारत सेवा शुरू की जाएगी। सटीक तारीख की घोषणा अभी नहीं की गई है।
देशभर में कितने किलोमीटर के बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को मंजूरी मिली है?
वैष्णव के अनुसार, PM मोदी ने अब तक 4,000 किलोमीटर के बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को मंजूरी दी है और आने वाले दिनों में 3,000 किलोमीटर के अतिरिक्त कॉरिडोर की घोषणा की जाएगी। यह 'विकसित भारत' के लक्ष्य के तहत देश के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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