दक्षिण तटीय रेलवे जोन गठित: चंद्रबाबू नायडू बोले, आंध्र प्रदेश का दशकों पुराना सपना साकार

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दक्षिण तटीय रेलवे जोन गठित: चंद्रबाबू नायडू बोले, आंध्र प्रदेश का दशकों पुराना सपना साकार

सारांश

दशकों की प्रतीक्षा के बाद आंध्र प्रदेश को मिला अपना रेलवे जोन — विशाखापत्तनम बनेगा दक्षिण तटीय रेलवे जोन का मुख्यालय। 1 जून 2026 से परिचालन शुरू होगा। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इसे राज्य के लोगों का सपना साकार होना बताया और PM मोदी व रेल मंत्री वैष्णव का आभार जताया।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने दक्षिण तटीय रेलवे जोन के गठन के लिए राजपत्र अधिसूचना जारी की; विशाखापत्तनम होगा मुख्यालय।
नए जोन का आधिकारिक परिचालन 1 जून 2026 से शुरू होगा; अरिलोवा में स्थायी कार्यालय भवन को भी मंजूरी।
वाल्टेयर डिवीजन के पुनर्गठन के तहत पलासा-इच्छपुरम , दुव्वाडा-विजयनगरम और बोब्बिली-सालूर खंड विशाखापत्तनम डिवीजन में मिलाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने प्रधानमंत्री मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार जताया।
कृषि मंत्री किंजरापु अचन्नाइडु ने इसे उत्तर आंध्र प्रदेश के लोगों की ऐतिहासिक जीत बताया।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार, 5 मई 2026 को केंद्र सरकार द्वारा दक्षिण तटीय रेलवे जोन के गठन के लिए जारी राजपत्र अधिसूचना का स्वागत किया और कहा कि आंध्र प्रदेश के लोगों का लंबे समय से संजोया सपना अब पूरा हो गया है। विशाखापत्तनम को मुख्यालय बनाकर स्थापित इस नए जोन का आधिकारिक परिचालन 1 जून 2026 से शुरू होगा।

राजपत्र अधिसूचना की मुख्य बातें

रेलवे मंत्रालय द्वारा जारी इस अधिसूचना के तहत विशाखापत्तनम को नवगठित दक्षिण तटीय रेलवे जोन का मुख्यालय बनाया गया है। मुख्यमंत्री नायडू ने अपने आधिकारिक पोस्ट में लिखा कि यह अधिसूचना अत्यंत प्रसन्नता का विषय है और राज्य के लोगों की वर्षों की माँग को पूरा करती है। अरिलोवा में स्थायी कार्यालय भवन के निर्माण को भी हरी झंडी मिल गई है, जबकि अस्थायी कार्यालय 1 जून 2026 से कार्य प्रारंभ करने के लिए तैयार बताया जा रहा है।

वाल्टेयर डिवीजन का पुनर्गठन और नए क्षेत्र

वाल्टेयर डिवीजन के पुनर्गठन के तहत पलासा-इच्छपुरम, दुव्वाडा-विजयनगरम और बोब्बिली-सालूर जैसे महत्वपूर्ण खंडों को विशाखापत्तनम डिवीजन में मिलाया जाएगा। नायडू के अनुसार, नवगठित विशाखापत्तनम डिवीजन और रायगड़ा डिवीजन के बीच समन्वय से रेल व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। इससे उत्तरी आंध्र प्रदेश के परिवहन परिदृश्य में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।

राज्य के औद्योगिक विकास पर असर

मुख्यमंत्री नायडू ने कहा कि इस नए जोन से राज्य के विकास, विशेष रूप से उत्तरी आंध्र प्रदेश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। यह ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश अपनी नई राजधानी अमरावती के निर्माण और आर्थिक पुनरुद्धार पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। गौरतलब है कि उत्तरांध्र क्षेत्र लंबे समय से बुनियादी ढाँचे की कमी से जूझता रहा है और यह रेलवे जोन उस खाई को पाटने में सहायक माना जा रहा है।

नेताओं की प्रतिक्रियाएँ और आभार

मुख्यमंत्री नायडू ने आंध्र प्रदेश के अनुरोध को स्वीकार करने और यह ऐतिहासिक राजपत्र जारी करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया। उत्तर आंध्र प्रदेश से आने वाले कृषि मंत्री किंजरापु अचन्नाइडु ने कहा कि एनडीए (NDA) गठबंधन सरकार के प्रयासों से दशकों पुराना सपना साकार हुआ है। उन्होंने इसे उत्तर आंध्र प्रदेश के लोगों की जीत बताया।

अचन्नाइडु ने यह भी कहा कि पिछली सरकार ने इस माँग पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन मुख्यमंत्री नायडू के मार्गदर्शन में NDA सरकार ने केंद्र के साथ समन्वय स्थापित कर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। उन्होंने इस मामले में नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू के अथक प्रयासों की विशेष सराहना की और पिछड़े क्षेत्रों के विकास में सहयोग के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया।

आगे की राह

नए जोन के 1 जून 2026 से परिचालन शुरू होने के साथ, उत्तरांध्र क्षेत्र में रेल संपर्क और प्रशासनिक दक्षता बेहतर होने की उम्मीद है। स्थायी कार्यालय भवन के निर्माण की स्वीकृति के बाद अब सभी की नज़रें इस बात पर होंगी कि नया जोन उत्तरी आंध्र प्रदेश के औद्योगिक और कृषि विकास में कितनी तेज़ी से बदलाव ला पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — नए जोन की प्रशासनिक संरचना, बजट आवंटन और वास्तविक ट्रेन सेवाओं में सुधार कितनी जल्दी ज़मीन पर दिखता है। यह ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश अमरावती पुनर्निर्माण और निवेश आकर्षण में जुटा है, और रेल संपर्क उस बड़े आर्थिक एजेंडे का एक अहम हिस्सा है। गौरतलब है कि रेलवे जोन की माँग दशकों पुरानी थी और कई सरकारों के दौर में लंबित रही — इसलिए NDA की यह उपलब्धि राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। अब देखना यह होगा कि 1 जून की समयसीमा और स्थायी कार्यालय का निर्माण वादे के अनुरूप आगे बढ़ता है या नहीं।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दक्षिण तटीय रेलवे जोन क्या है और इसका मुख्यालय कहाँ होगा?
दक्षिण तटीय रेलवे जोन भारत का एक नवगठित रेलवे प्रशासनिक क्षेत्र है, जिसका मुख्यालय विशाखापत्तनम में होगा। केंद्र सरकार ने 5 मई 2026 को इसके गठन के लिए राजपत्र अधिसूचना जारी की और 1 जून 2026 से इसका आधिकारिक परिचालन शुरू होगा।
नए रेलवे जोन का परिचालन कब से शुरू होगा?
दक्षिण तटीय रेलवे जोन का आधिकारिक परिचालन 1 जून 2026 से शुरू होगा। अरिलोवा में स्थायी कार्यालय भवन के निर्माण को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि अस्थायी कार्यालय 1 जून से काम शुरू करने के लिए तैयार बताया जा रहा है।
वाल्टेयर डिवीजन के पुनर्गठन से कौन-से क्षेत्र प्रभावित होंगे?
वाल्टेयर डिवीजन के पुनर्गठन के तहत पलासा-इच्छपुरम, दुव्वाडा-विजयनगरम और बोब्बिली-सालूर जैसे प्रमुख खंडों को विशाखापत्तनम डिवीजन में मिलाया जाएगा। इससे उत्तरी आंध्र प्रदेश के परिवहन परिदृश्य में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।
चंद्रबाबू नायडू ने इस अधिसूचना पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि यह आंध्र प्रदेश के लोगों का लंबे समय से संजोया सपना पूरा होना है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह जोन उत्तरी आंध्र प्रदेश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
इस रेलवे जोन से उत्तरी आंध्र प्रदेश को क्या फायदा होगा?
नए जोन से उत्तरी आंध्र प्रदेश में बेहतर रेल संपर्क, प्रशासनिक दक्षता और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विशाखापत्तनम और रायगड़ा डिवीजन के बीच समन्वय से रेल व्यवस्था सुदृढ़ होगी और पिछड़े क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियाँ तेज़ होंगी।
राष्ट्र प्रेस
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