ओमप्रकाश राजभर के सपा-तोड़ दावे पर पलटवार: 'पागल की दवा नहीं होती' — सपा सांसद अवधेश प्रसाद
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 18 जून 2025 को नई गर्माहट आई, जब सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) में टूट के दावे किए। सपा नेताओं ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा, 'अगर कोई पागल हो जाए तो उसकी दवा नहीं है।'
मुख्य घटनाक्रम
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने राजभर के दावों पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'अगर पागल की दवा किसी के पास है तो वह जनता के पास है। पागलपन की बात कोई करता है तो उसके लिए न कोई लगाम है और न कोई इलाज है।' यह टिप्पणी स्पष्ट रूप से राजभर के उस दावे के जवाब में थी जिसमें उन्होंने सपा में आंतरिक दरार का संकेत दिया था।
राजभर की राजनीतिक मंशा पर सवाल
सपा सांसद नीरज कुशवाहा मौर्य ने कहा कि राजभर को अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता सता रही है। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि ओम प्रकाश राजभर, जो पहले समाजवादी पार्टी से चुने गए थे, अब अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित हैं। आने वाले समय में, जिस सीट से वे अभी विधायक हैं, वहाँ उन्हें बड़ी हार का सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए वे ऐसे बेबुनियाद बयान दे रहे हैं।'
कुशवाहा मौर्य ने यह भी कहा कि राजभर ने जिस पत्र का हवाला दिया, उसे सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करना चाहिए था। उन्होंने जोड़ा, 'इन सभी बातों का कोई मतलब नहीं है। इन लोगों को कोई गंभीरता से भी नहीं लेता।'
भाजपा की 'पीडीए काट' रणनीति का आरोप
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने इस पूरे घटनाक्रम को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सुनियोजित रणनीति करार दिया। उन्होंने कहा, 'हर सुबह ओपी राजभर ट्वीट करते हैं और शाम को केशव प्रसाद मौर्य ट्वीट करते हैं। आप इसके पीछे की रणनीति समझ सकते हैं। भाजपा ने पीडीए की काट के लिए पीडीए समुदाय के नेताओं को आगे किया है — पहले राजभर, फिर मौर्य, और जल्द ही निषाद सामने आ सकते हैं, उसके बाद अनुप्रिया पटेल।'
वर्मा ने आरोप लगाया, 'भाजपा का कोई ठाकुर, ब्राह्मण या ऊँची जाति का नेता ऐसे बयान नहीं देगा, क्योंकि वे जानते हैं कि पिछड़ों को पिछड़ों से लड़ाओ और राज करो।' यह टिप्पणी सपा की 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) राजनीति को कमज़ोर करने की कथित कोशिशों पर केंद्रित थी।
सपा में टूट के दावों पर कानूनी पहलू
आशुतोष वर्मा ने स्पष्ट किया कि सपा के 37 सांसदों को तोड़ने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी कम से कम 25 सांसदों की ज़रूरत होगी। उन्होंने केशव प्रसाद मौर्य को संबोधित करते हुए कहा, 'आप खुद वरिष्ठ नेता होते हुए मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल नहीं कर पाए और मंत्री बनकर रह गए। आप हमारे पीडीए परिवार के सदस्य हैं — भाजपा की चालों में न आएं।'
सपा का पलटवार: 'भाजपा के 50 विधायक हमारे संपर्क में'
वर्मा ने दावा किया कि दारा सिंह चौहान, धर्मसिंह सैनी, स्वामी प्रसाद मौर्य और ओमप्रकाश राजभर — ये सभी भाजपा के कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और बाद में सपा में आए थे। उन्होंने कहा, '2022 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सरकार रहते 15 विधायक सपा में आए थे और हमने सभी का स्वागत किया था। भाजपा के कम से कम 50 विधायक समाजवादी पार्टी के संपर्क में हैं — उन्हें बचाएं।' गौरतलब है कि यह दावा सत्यापन योग्य नहीं है और सपा की ओर से किया गया राजनीतिक बयान है।
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की आहट के बीच यह वाकयुद्ध पिछड़े वर्गों की राजनीति को लेकर तेज़ होती प्रतिस्पर्धा का संकेत है।