सपा विधायक रागिनी सोनकर का योगी सरकार पर हमला: शिक्षा उपेक्षा और बुलडोजर राजनीति पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
जौनपुर में समाजवादी पार्टी (सपा) की विधायक रागिनी सोनकर ने 26 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पर कड़े आरोप लगाए — शिक्षा क्षेत्र में ठोस कार्य न होने और बुलडोजर-केंद्रित राजनीति को प्राथमिकता देने के। सोनकर ने कहा कि जैसे-जैसे चुनाव करीब आ रहे हैं, योगी आदित्यनाथ के 'माफिया को मिट्टी में मिला देने' जैसे बयान फिर सुनाई देने लगे हैं।
शिक्षा पर सरकार की नीति पर सवाल
सोनकर ने आरोप लगाया कि योगी सरकार के कार्यकाल में शिक्षा के क्षेत्र में कोई उल्लेखनीय काम नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि एक ओर प्राथमिक स्कूलों को बंद करने की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर पूर्व सरकार द्वारा स्थापित जौहर विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) से सीधे सवाल किया कि उसने अपने कार्यकाल में कितने विश्वविद्यालय स्थापित किए।
सोनकर ने कहा, 'शिक्षा के नाम पर कुछ नहीं दिखाई देता, जबकि बुलडोजर हर जगह दिखाई देता है।' उनका यह बयान योगी सरकार की उस नीति पर सीधा प्रहार है जिसे आलोचक 'बुलडोजर राजनीति' कहते हैं।
नकल माफिया पर सीएम के बयान पर पलटवार
एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि 'नकल माफिया मिट्टी में मिल जाएंगे, कोई रोक नहीं सकता।' इस पर सोनकर ने पलटवार करते हुए कहा कि ऐसे बयान चुनावी मौसम में ही क्यों आते हैं। उनके अनुसार, यह बयान 'पूरी तरह गलत और राजनीतिक' है।
दिल्ली हिंसा और गृह मंत्रालय की जवाबदेही
सोनकर ने 20 जुलाई को दिल्ली में हुई हिंसा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस दौरान बड़ी संख्या में बच्चों को पीटा गया और इसकी जवाबदेही गृह मंत्रालय की भी होनी चाहिए। यह टिप्पणी केंद्र सरकार की कानून-व्यवस्था नीति पर विपक्ष के बढ़ते दबाव का हिस्सा है।
सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक पर रुख
सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर सोनकर ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि विधेयक ठीक है और सदन में पूरा विपक्ष उपस्थित रहेगा तथा विस्तृत चर्चा होगी। उन्होंने जोर दिया कि विपक्ष का काम सार्थक बहस के ज़रिए चीजों को बेहतर बनाना है।
आगे क्या
सोनकर ने उम्मीद जताई कि सरकार बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी। उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को देखते हुए शिक्षा और कानून-व्यवस्था के मुद्दे विपक्ष के लिए केंद्रीय राजनीतिक हथियार बनते जा रहे हैं।