प्रयागराज SRN अस्पताल विवाद: डॉक्टरों ने शुक्रवार सुबह 8 बजे से 24 घंटे की हड़ताल का ऐलान किया
सारांश
मुख्य बातें
प्रयागराज के स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल (SRN) में डॉक्टरों और वकीलों के बीच हुई मारपीट के बाद उपजे विवाद ने 21 मई 2026 को बड़ा रूप ले लिया, जब इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन ने शुक्रवार सुबह 8 बजे से 24 घंटे की हड़ताल का ऐलान कर दिया। डॉक्टरों का आरोप है कि पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए केवल उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की, जबकि वकीलों के विरुद्ध कोई मुकदमा नहीं लिखा गया।
मुख्य घटनाक्रम
SRN अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों और मरीज पक्ष से जुड़े लोगों के बीच मारपीट और हंगामे की घटना हुई। इसके बाद पुलिस ने डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की, लेकिन डॉक्टरों की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत पर अब तक कोई मुकदमा नहीं लिखा गया है। इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन की आपात बैठक के बाद डॉक्टरों ने हड़ताल का निर्णय लिया।
डॉक्टरों की माँगें और चेतावनी
डॉ. एके मिश्रा ने कहा कि जब किसी घटना में दोनों पक्ष शामिल हों तो दोनों की शिकायत दर्ज होनी चाहिए और निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। उनके अनुसार, प्रशासन केवल आश्वासन दे रहा है, लेकिन ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि यदि शुक्रवार सुबह 8 बजे तक उनकी शिकायत दर्ज नहीं हुई तो 24 घंटे की हड़ताल शुरू हो जाएगी।
हड़ताल का दायरा और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
डॉ. कमल सिंह ने बताया कि इस हड़ताल में सरकारी और निजी — दोनों अस्पतालों के डॉक्टर शामिल रहेंगे। इसके साथ ही डायग्नोस्टिक सेंटर भी बंद रहने की आशंका है, जिससे प्रयागराज में स्वास्थ्य सेवाएँ बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब शहर में पहले से ही चिकित्सा व्यवस्था पर दबाव है।
प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
डॉक्टर संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो यह आंदोलन उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी फैल सकता है। संगठनों का कहना है कि किसी भी पक्ष पर दबाव में कार्रवाई नहीं होनी चाहिए और दोषियों को बचाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि माँगें पूरी नहीं हुईं तो 24 घंटे की हड़ताल को अनिश्चितकालीन आंदोलन में बदलने का भी संकेत दिया गया है।
प्रशासन की स्थिति
अब तक प्रशासन की ओर से केवल आश्वासन दिए गए हैं। डॉक्टरों की शिकायत पर मुकदमा दर्ज न होना इस पूरे विवाद का केंद्रबिंदु बना हुआ है। गौरतलब है कि अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर भी बार-बार उठता रहा है, और यह घटना उसी व्यापक चिंता का हिस्सा है। आने वाले घंटों में प्रशासन की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि हड़ताल होती है या टलती है।