PLFS आंकड़े: एक साल में शून्य नई नौकरियाँ, शिवसेना (यूबीटी) ने '5 ट्रिलियन' दावे को बताया खोखला
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) ने 13 अगस्त 2026 को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के अपने मंत्रालय — सांख्यिकी मंत्रालय — द्वारा जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के आंकड़े सरकार के '5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था' और रोजगार सृजन के दावों की पोल खोलते हैं। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित संपादकीय के अनुसार, पिछले एक वर्ष में देश में रोजगार के अवसरों में न कोई बढ़ोतरी हुई और न कोई कमी — बाजार पूरी तरह ठहरा रहा।
PLFS के आंकड़े क्या कहते हैं
सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी PLFS रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा तिमाही में देश की बेरोजगारी दर 5.5 प्रतिशत है, जो एक वर्ष पूर्व 5.6 प्रतिशत थी — यानी अंतर मात्र 0.1 प्रतिशत अंक का। वेतनभोगी कर्मचारियों की हिस्सेदारी जून में 51.4 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष जून की 51.2 प्रतिशत से नाममात्र अधिक है। महिला श्रमिकों की भागीदारी 32 प्रतिशत से बढ़कर 32.7 प्रतिशत हुई है, जिसे मामूली सुधार माना जा रहा है। हालाँकि, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में लगातार गिरावट जारी रहने की बात भी रिपोर्ट में सामने आई है।
शिक्षित युवाओं का संकट
'सामना' के संपादकीय में रेखांकित किया गया कि भारत में स्नातक युवाओं की संख्या बढ़कर 6.30 करोड़ हो गई है — चार दशकों में यह संख्या 13 गुना बढ़ी है। किंतु इसी अवधि में बेरोजगार स्नातकों की संख्या 16 गुना बढ़ गई है। संपादकीय के अनुसार, वर्तमान में हर 10 स्नातक युवाओं में से 6 बेरोजगार हैं।
अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए संपादकीय में दावा किया गया कि बेरोजगार युवाओं में से हर तीन में से दो के पास डिग्री है — यानी शैक्षणिक योग्यता है, पर रोजगार नहीं। इसमें यह भी कहा गया कि नौकरी की तलाश कर रहे प्रत्येक 1,000 युवाओं में से केवल 12 को स्थायी रोजगार मिल पाता है।
सरकारी दावों से सीधा विरोधाभास
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि PLFS के ये आंकड़े केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया के उस दावे से सीधे टकराते हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार ने अपने 12 साल के कार्यकाल में हर साल 1.7 करोड़ नए रोजगार पैदा किए हैं। पार्टी का कहना है कि सरकार हर साल 2 करोड़ रोजगार सृजित करने के अपने चुनावी वादे को पूरा करने में नाकाम रही है।
शिवसेना (यूबीटी) ने यह भी कहा कि ये आंकड़े प्रयागराज में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा युवा बेरोजगारी पर उठाई गई चिंताओं को सही ठहराते हैं।
संपादकीय की तीखी टिप्पणी
'सामना' के संपादकीय में लिखा गया कि यह PLFS रिपोर्ट 'मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों का आईना है और इसे उसी के एक मंत्रालय ने दिखाया है।' संपादकीय में केंद्रीय गृह मंत्री के उस कथित सुझाव पर भी कटाक्ष किया गया, जिसमें रोजगार न मिलने पर पकौड़े तलने की बात कही गई थी, और प्रधानमंत्री की युवाओं को संबोधित 'हैलो फ्रेंड्स' रील का जिक्र करते हुए कहा गया कि सरकार को इस आईने में खुद को देखना चाहिए।
आगे की राह
शिवसेना (यूबीटी) ने माँग की है कि सरकार रोजगार सृजन पर पारदर्शी और सत्यापन-योग्य आंकड़े सार्वजनिक करे। आलोचकों का कहना है कि जब तक ग्रामीण रोजगार की गिरावट और शिक्षित बेरोजगारी की समस्या को नीतिगत प्राथमिकता नहीं मिलती, '5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था' का लक्ष्य समावेशी विकास की कसौटी पर खरा नहीं उतरेगा।