खंडवा हॉस्टल खाने में इल्लियां: छात्रों का कलेक्ट्रेट मार्च, 4 सदस्यीय जांच समिति गठित
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में सरकारी लड़कों के छात्रावास में 7 अगस्त को दोपहर के भोजन में कथित तौर पर इल्लियां मिलने के बाद छात्रों ने हॉस्टल से कलेक्ट्रेट तक मार्च निकाला और प्रशासन को तत्काल जांच के आदेश देने पड़े। नगर मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया और जनजातीय मामलों के विभाग के सहायक आयुक्त को भी तलब किया।
मुख्य घटनाक्रम
शुक्रवार को दोपहर के भोजन में चावल के साथ परोसी गई दाल में इल्लियां मिलने की बात सामने आई। इसके बाद छात्र अपनी खाने की थालियां हाथ में लेकर हॉस्टल से कलेक्ट्रेट तक पहुंचे और हॉस्टल प्रबंधन व स्टाफ के खिलाफ नारेबाजी की। छात्रों ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए एक औपचारिक ज्ञापन भी सौंपा।
गौरतलब है कि यह कोई एकल घटना नहीं है — छात्रों के अनुसार महीने में तीन-चार बार ऐसी स्थिति उत्पन्न हो चुकी है, और बार-बार शिकायत करने के बावजूद हालात में कोई सुधार नहीं हुआ।
छात्रों के आरोप
छात्रों का दावा है कि भोजन सरकार द्वारा निर्धारित मेन्यू के अनुसार नहीं बनाया जा रहा था। उन्हें अक्सर अधपके चावल और पतली दाल परोसी जाती थी। जब भी वे शिकायत करते, हॉस्टल स्टाफ और वार्डन उनके साथ अभद्र व्यवहार करते थे।
कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि भोजन तैयार करने वाले कर्मचारी शराब के नशे में ड्यूटी पर आते थे और छात्रों से शराब के लिए पैसे मांगते थे। जो छात्र पैसे देने से इनकार करते, उन्हें उनके परिवारों से झूठी शिकायत करने की धमकी दी जाती थी। ये आरोप अभी जांच के दायरे में हैं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
नगर मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर ने कहा कि प्रशासन ने शिकायतों का गंभीरता से संज्ञान लिया है। उन्होंने बताया, 'छात्रों ने छात्रावास में परोसे जाने वाले घटिया भोजन और कर्मचारियों के अभद्र व्यवहार की शिकायत की है। शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले की तत्काल जांच के निर्देश जारी किए गए हैं।'
गठित चार सदस्यीय जांच समिति को तुरंत छात्रावास का दौरा करने, छात्रों के बयान दर्ज करने, परोसे जाने वाले भोजन का निरीक्षण करने और समग्र छात्रावास व्यवस्था की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। जनजातीय मामलों के विभाग के सहायक आयुक्त को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है।
आम जनता और छात्रों पर असर
यह छात्रावास जनजातीय वर्ग के छात्रों के लिए संचालित सरकारी सुविधा है, जहां रहने वाले अधिकांश छात्र दूरदराज के इलाकों से आते हैं और शिक्षा के लिए पूरी तरह इस व्यवस्था पर निर्भर हैं। भोजन की गुणवत्ता में लगातार गिरावट और कर्मचारियों के कथित दुर्व्यवहार ने इन छात्रों के स्वास्थ्य और मनोबल दोनों को प्रभावित किया है।
क्या होगा आगे
जांच दल की रिपोर्ट मिलने के बाद जिला प्रशासन दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करेगा। अधिकारियों द्वारा जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद विरोध प्रदर्शन समाप्त हो गया। यह मामला राज्य में सरकारी छात्रावासों की निगरानी व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े करता है।