क्या सुप्रीम कोर्ट ने शब्बीर शाह की जमानत याचिका पर एनआईए से जवाब मांगा?
सारांश
Key Takeaways
- शब्बीर शाह की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय महत्वपूर्ण है।
- एनआईए को तीन सप्ताह का समय मिला है।
- किसी भी जमानत याचिका में उम्र और हिरासत में बिताया गया समय महत्वपूर्ण कारक होते हैं।
- इस मामले में कई गवाहों से पूछताछ की जा रही है।
- सुनवाई की अगली तारीख 10 फरवरी है।
नई दिल्ली, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। टेरर-फंडिंग के आरोप में फंसे कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) को जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। इस मामले की सुनवाई 10 फरवरी को होगी।
एनआईए ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में नए सबूत मिले हैं और वह शब्बीर अहमद शाह के हलफनामे पर एक विस्तृत जवाब प्रस्तुत करेगी। कोर्ट ने यह अनुरोध स्वीकार कर लिया है।
74 वर्षीय शब्बीर शाह ने अपनी उम्र और साढ़े छह साल से अधिक समय तक जेल में रहने का हवाला देते हुए जमानत मांगी है।
शाह की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने दलील दी कि यह मामला केवल एक भाषण पर आधारित है, जो पहले ही कई बार कोर्ट में प्रस्तुत किया जा चुका है। शाह ने पहले ही काफी समय हिरासत में बिताया है और बार-बार गिरफ्तारी का खतरा बना हुआ है।
इस याचिका का विरोध करते हुए एनआईए के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि शब्बीर शाह को जून 2019 में गिरफ्तार किया गया था, जबकि वह पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय के एक मामले में हिरासत में थे। उन्होंने आरोप लगाया कि शब्बीर अहमद शाह और अन्य लोग प्रशासन को पंगु बनाने के लिए विरोध प्रदर्शनों को फंड देने में शामिल थे।
लूथरा ने कोर्ट को बताया कि गवाहों ने कहा है कि शब्बीर शाह ने पाकिस्तान में मेडिकल सीटों के लिए छात्रों की सिफारिश की थी, जहां कश्मीरी छात्रों के लिए सीटें आरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि कुल 248 गवाहों में से अब तक 34 गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है और 16 मार्च 2022 को आरोप तय किए गए थे।
एनआईए के अनुसार, हर महीने चार से पांच गवाहों से पूछताछ की जा रही है।
दलीलों का जवाब देते हुए वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा कि शाह ने 1996 में ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (एपीएचसी) छोड़ दी थी और अपना स्वतंत्र समूह बनाया था। उन्होंने दलील दी कि आरोप मुख्य रूप से एपीएचसी से संबंधित हैं, न कि शब्बीर शाह से।
उन्होंने ट्रायल की गति पर भी सवाल उठाया, यह कहते हुए कि गवाहों की संख्या बढ़ाकर 290 करने के बावजूद, आठ वर्षों में केवल 30 गवाहों से पूछताछ की गई है, इसलिए शब्बीर शाह को जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।
शब्बीर शाह ने पिछले साल 12 जून को दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें जमानत देने से मना किया गया था। एनआईए ने पहले सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि इस मामले में सबूतों की रिकॉर्डिंग जारी है।